Election TMC के ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर फैसला जल्द? उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग में सुनवाई पूरी
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संगठन, पार्टी के नाम और उसके पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेज सुनने के बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने हैं। आयोग के संभावित फैसले का सीधा संबंध इस बात से है कि इन उपचुनावों में आधिकारिक तौर पर TMC के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल किस पक्ष को मिलेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
TMC के भीतर संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दो गुट आमने-सामने हैं। दोनों पक्ष खुद को पार्टी का वैध प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव आयोग के समक्ष अपना दावा पेश कर चुके हैं। विवाद केवल पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न ‘जोड़ाफूल’ पर भी दोनों पक्षों का दावा है।
ऋतब्रत बनर्जी के पक्ष ने आयोग के समक्ष अपने समर्थन और संगठन से जुड़े दस्तावेज पेश किए हैं। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला पक्ष भी पार्टी के नाम और प्रतीक पर अपना दावा बनाए हुए है। दोनों पक्षों की ओर से पेश दस्तावेजों और दावों की जांच आयोग कर रहा है।
उपचुनाव ने बढ़ाई समय की अहमियत
इस विवाद का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों—नंदीग्राम और रेजीनगर—में उपचुनाव होने हैं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर थी। ऐसे में उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आधिकारिक रूप से TMC का नाम और चुनाव चिह्न किसे मिलेगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयोग से अंतरिम निर्णय 17 सितंबर के आसपास आने की संभावना जताई गई है, हालांकि आयोग की ओर से इस तारीख को अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा के रूप में पुष्टि नहीं की गई है।
रेजीनगर सीट से TMC के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने ‘जोड़ाफूल’ चिह्न के साथ नामांकन दाखिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वह इस चिह्न के साथ नामांकन दाखिल करने वाले TMC के एकमात्र उम्मीदवार रहे।
चुनाव आयोग के सामने क्या है चुनौती?
भारत में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्नों का आवंटन चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। चुनाव चिह्नों के विवाद में आयोग संबंधित पक्षों द्वारा प्रस्तुत संगठनात्मक और विधायी समर्थन सहित उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच करता है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी आरक्षित चुनाव चिह्नों के आवंटन से संबंधित नियम और आदेश उपलब्ध हैं।
जब किसी राजनीतिक दल में विभाजन या संगठनात्मक विवाद पैदा होता है और दोनों पक्ष पार्टी के नाम तथा चुनाव चिह्न पर दावा करते हैं, तो आयोग को यह निर्धारित करना होता है कि लागू कानूनी और प्रक्रियात्मक मानकों के आधार पर किस पक्ष को मान्यता दी जाए। चुनाव चिह्न विवादों की प्रक्रिया में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और निर्वाचित प्रतिनिधियों के समर्थन जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाता है।
दोनों पक्षों से मांगे गए दस्तावेज
चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे थे। रिपोर्ट के अनुसार, इस गुट ने आयोग के सवालों के जवाब और आवश्यक कागजात जमा करने की बात कही है। इसी दौरान ममता बनर्जी के गुट के प्रतिनिधियों ने भी आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा।
ममता बनर्जी के पक्ष की ओर से आयोग के समक्ष प्रतिनिधिमंडल में डेरेक ओ’ब्रायन और कल्याण बनर्जी समेत अन्य नेता शामिल हुए। दोनों पक्षों को अपनी दलीलों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया।
‘जोड़ाफूल’ चिह्न क्यों महत्वपूर्ण है?
TMC के लिए ‘जोड़ाफूल’ केवल एक चुनावी पहचान नहीं है, बल्कि लंबे समय से पार्टी के चुनाव प्रचार और मतदाताओं के बीच उसकी पहचान का हिस्सा रहा है। इसलिए चिह्न को लेकर विवाद का असर उपचुनाव में उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार और मतदाताओं के सामने पार्टी की पहचान पर पड़ सकता है।
हालांकि, अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को उपलब्ध रिकॉर्ड, दावों और लागू नियमों के आधार पर करना है। किसी भी पक्ष को पहले से आधिकारिक रूप से विजेता या वैध पक्ष मानना तब तक उचित नहीं होगा जब तक आयोग अपना निर्णय जारी न कर दे।
Election नामांकन के बीच बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी
उपचुनाव के नामांकन चरण के दौरान यह विवाद विशेष रूप से चर्चा में है। एक ओर दोनों गुट पार्टी के नाम और चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ानी है। ऐसे में आयोग का निर्णय चुनावी कागजी कार्रवाई और प्रचार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
नंदीग्राम सीट का राजनीतिक महत्व पहले से रहा है। इसी तरह रेजीनगर में भी TMC का उम्मीदवार ‘जोड़ाफूल’ चिह्न के साथ मैदान में है। ऐसे में आयोग के निर्णय के बाद दोनों सीटों पर उम्मीदवारों और पार्टी संगठन की चुनावी पहचान को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
आयोग के फैसले पर सबकी नजर
फिलहाल चुनाव आयोग ने अंतिम रूप से यह घोषित नहीं किया है कि TMC के नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिह्न का अधिकार किस पक्ष को मिलेगा। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुन ली हैं और अतिरिक्त दस्तावेजों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है। रिपोर्टों में 17 सितंबर के आसपास अंतरिम निर्णय की संभावना जताई गई है, लेकिन इसे आयोग की आधिकारिक समयसीमा के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, चुनाव चिह्नों के आवंटन और संबंधित आदेशों के लिए अलग प्रक्रिया निर्धारित है। आयोग की वेबसाइट पर 2026 के चुनावों से जुड़े प्रतीक आवंटन संबंधी आदेश भी उपलब्ध हैं।
इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम आयोग का औपचारिक आदेश होगा। उसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आगामी उपचुनावों में TMC का आधिकारिक नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिह्न किस पक्ष के उम्मीदवार इस्तेमाल कर सकेंगे। तब तक दोनों गुटों के दावे और चुनावी तैयारियां जारी हैं।

