NCPI की नई राष्ट्रीय टीम में सात पूर्व TMC सांसदों को अहम जिम्मेदारी, 27 पदाधिकारियों की घोषणा
कोलकाता, 23 सितंबर 2026: नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने अपनी नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम की घोषणा की है। पार्टी ने कुल 27 राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति की है, जिनमें सात पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद शामिल हैं। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के 20 लोकसभा सांसदों के NCPI में जाने और उनके खिलाफ चल रही अयोग्यता संबंधी कार्यवाही का मामला राजनीतिक और कानूनी चर्चा में है।
NCPI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी ने मंगलवार को नियुक्तियों की सूची जारी की। सात पूर्व TMC सांसदों में अबू ताहेर खान, दीपक अधिकारी देव, यूसुफ पठान, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, रचना बनर्जी, मिताली बाग और बापी हलदर शामिल हैं। इनमें पहले छह को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि बापी हलदर को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है।
सात पूर्व TMC सांसदों को मिली जिम्मेदारी
नई सूची में पूर्व TMC सांसदों को संगठन के महत्वपूर्ण पद दिए गए हैं। अबू ताहेर खान, दीपक अधिकारी देव, यूसुफ पठान, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, रचना बनर्जी और मिताली बाग को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं बापी हलदर को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है।
इनमें कई नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में पहले से चर्चित रहे हैं। यूसुफ पठान पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं, जबकि दीपक अधिकारी देव और रचना बनर्जी मनोरंजन जगत से राजनीति में आए। नई जिम्मेदारियां इन नेताओं को NCPI के राष्ट्रीय संगठन में औपचारिक भूमिका देती हैं।
इन सात नियुक्तियों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि वे उन 20 पूर्व TMC लोकसभा सांसदों के समूह का हिस्सा हैं जिन्होंने पार्टी छोड़कर NCPI का रुख किया था। NCPI के मुताबिक इन सांसदों ने BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन दिया है।
27 सदस्यीय संगठनात्मक ढांचा
NCPI की नई टीम में केवल पूर्व TMC सांसद ही नहीं, बल्कि पार्टी के अन्य नेताओं को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। चंद्रिमा पांजा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
महासचिवों के रूप में उत्तिया कुंडू, सुलेखा भूनिया, विवेक मिश्रा और शुभेंदु चक्रवर्ती को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा अभिषेक मुखर्जी, कल्लोल चक्रवर्ती, बप्पा सरदार, प्रबीर महता, मृत्युंजय सिन्हा, पल्लब मुखर्जी, दिब्येंदु दास, बिप्लब देब, प्रदीप धर, सुस्मिता भूनिया, स्वाति गोस्वामी बोस और मोनालिशा खातून को सचिव बनाया गया है।
स्वरूप जायसवाल को कोषाध्यक्ष और सुदाम जेट्टी को संयुक्त कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इस तरह पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष से लेकर सचिव और वित्तीय पदों तक एक विस्तृत संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है।
20 पूर्व TMC सांसदों के अलग होने की पृष्ठभूमि
नई नियुक्तियों को समझने के लिए TMC से सांसदों के अलग होने की घटनाओं को देखना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद पार्टी के लोकसभा सांसदों के एक समूह ने पार्टी से अलग होने का फैसला किया। करीब चार महीने पहले 20 TMC लोकसभा सांसद NCPI में शामिल हुए और BJP-नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने की घोषणा की।
इस घटनाक्रम के बाद TMC की ओर से इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दायर कीं। मामला आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
इन सांसदों ने अपने कदम को वैध विलय बताया है। दूसरी ओर, उनकी अयोग्यता से जुड़ा विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए NCPI की नई संगठनात्मक नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब इन नेताओं की संसदीय स्थिति पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।
लोकसभा अध्यक्ष के नोटिस और कानूनी स्थिति
20 पूर्व TMC सांसदों को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से नोटिस जारी किए गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, सांसदों को नोटिस का जवाब देने के लिए पहले दी गई समयसीमा समाप्त हो चुकी है और उन्होंने अतिरिक्त चार सप्ताह का समय मांगा है। उनका कहना है कि जवाब तैयार करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने में और समय की जरूरत है।
इसका अर्थ यह है कि NCPI ने इन नेताओं को संगठनात्मक पद तो दे दिए हैं, लेकिन उनके संसदीय दर्जे से जुड़ा कानूनी प्रश्न अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। संगठनात्मक नियुक्ति और सांसद के रूप में अयोग्यता का प्रश्न अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित हैं।
कुछ प्रमुख नाम नई सूची से बाहर
नई राष्ट्रीय टीम में पूर्व TMC सांसदों के सात नाम शामिल किए गए हैं, लेकिन सभी प्रमुख विद्रोही सांसदों को पद नहीं मिला। सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार के नाम 27 सदस्यीय सूची में नहीं हैं।
काकोली घोष दस्तीदार को विद्रोही सांसदों के समूह में एक प्रमुख चेहरा माना गया था। Moneycontrol के अनुसार, उन्होंने 20 सांसदों के NCPI में जाने और NDA को समर्थन देने की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद उनका नाम नई राष्ट्रीय पदाधिकारी सूची में नहीं है। सुदीप बंद्योपाध्याय का नाम भी सूची से बाहर है।
इन दोनों नामों का शामिल न होना संगठन के भीतर जिम्मेदारियों के वितरण को लेकर चर्चा का विषय बना है। हालांकि NCPI ने सूची जारी करते समय इन नेताओं को पद न दिए जाने का कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है।
NCPI के लिए संगठन विस्तार का संकेत
27 राष्ट्रीय पदाधिकारियों की घोषणा NCPI के लिए संगठनात्मक विस्तार का एक महत्वपूर्ण कदम है। पार्टी ने हाल में TMC से आए नेताओं को अपने ढांचे में शामिल किया था और अब उनमें से कुछ को औपचारिक राष्ट्रीय जिम्मेदारियां दी गई हैं। इससे NCPI की नई राजनीतिक संरचना को संस्थागत रूप देने की कोशिश दिखाई देती है।
विशेष रूप से सात पूर्व TMC सांसदों को उपाध्यक्ष और महासचिव जैसे पद दिए जाने से यह स्पष्ट है कि पार्टी ने नए आए नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। हालांकि इन नियुक्तियों का भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
आगे की चुनौती
NCPI की नई टीम के सामने संगठन विस्तार के साथ-साथ कई व्यावहारिक और राजनीतिक चुनौतियां भी रहेंगी। सबसे तत्काल मुद्दों में पूर्व TMC सांसदों की संसदीय स्थिति और उनके खिलाफ चल रही अयोग्यता प्रक्रिया शामिल है। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण इस मुद्दे पर अंतिम कानूनी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
दूसरी ओर, पार्टी को नए नेताओं और पुराने संगठन के बीच जिम्मेदारियों का समन्वय करना होगा। 27 पदाधिकारियों की नियुक्ति से संगठन को औपचारिक ढांचा जरूर मिला है, लेकिन उसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में पार्टी की गतिविधियों, संगठनात्मक विस्तार और मतदाताओं के बीच उसके प्रदर्शन से तय होगा।
फिलहाल, 23 सितंबर 2026 की घोषणा का सबसे स्पष्ट संदेश यह है कि NCPI ने 27 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम में TMC से आए सात पूर्व सांसदों को प्रमुख संगठनात्मक जिम्मेदारियां देकर अपने नए राजनीतिक ढांचे को औपचारिक रूप दिया है। साथ ही, 20 पूर्व TMC सांसदों से जुड़ा दल-बदल और अयोग्यता विवाद अभी कानूनी प्रक्रिया में है, इसलिए इन नियुक्तियों का संसदीय प्रभाव फिलहाल अंतिम रूप से तय नहीं माना

