SP नेता राम गोपाल यादव ने कहा—पार्टी टिकट देगी तो यूपी से फिर लड़ेंगे राज्यसभा चुनाव
लखनऊ, 23 सितंबर 2026: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मौजूदा राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव ने आगामी राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से दोबारा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि यदि पार्टी उन्हें टिकट देती है, तो वह निश्चित रूप से चुनाव लड़ेंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होगा।
राम गोपाल यादव ने उम्मीदवारों की संख्या को लेकर कहा कि किसी पार्टी का फैसला उसके विधानसभा में मौजूद संख्याबल के आधार पर होता है। उनके मुताबिक, पार्टियां अपनी क्षमता के अनुसार उम्मीदवार उतारती हैं और आम तौर पर उतने ही उम्मीदवार मैदान में आते हैं, जितनी सीटें जीतने की उनकी संख्या होती है।
राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित
चुनाव आयोग ने 22 सितंबर को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 11 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव कार्यक्रम जारी किया। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। एक सीट पहले ही खाली हो चुकी है, क्योंकि भाजपा के दिनेश शर्मा ने 11 सितंबर को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार:
राम गोपाल यादव ने उम्मीदवारों की संख्या को लेकर कहा कि किसी पार्टी का फैसला उसके विधानसभा में मौजूद संख्याबल के आधार पर होता है। उनके मुताबिक, पार्टियां अपनी क्षमता के अनुसार उम्मीदवार उतारती हैं और आम तौर पर उतने ही उम्मीदवार मैदान में आते हैं, जितनी सीटें जीतने की उनकी संख्या होती है।
चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी।
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।
नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी।
उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक नाम वापस ले सकेंगे।
जरूरत पड़ने पर मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा।
मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे शुरू होगी।
पूरी चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक समाप्त होनी है।
राम गोपाल यादव की मौजूदा स्थिति
राम गोपाल यादव उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के मौजूदा सांसद हैं और उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। PRS Legislative Research के अनुसार, वह 26 नवंबर 2020 से मौजूदा कार्यकाल में हैं और यह उनका राज्यसभा में पांचवां कार्यकाल है। उनकी संसदीय उपस्थिति और बहसों में भागीदारी भी दर्ज की गई है।
नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम गोपाल यादव समाजवादी पार्टी के प्रमुख रणनीतिक नेताओं में रहे हैं। वह पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा भी हैं। Indian Express ने उन्हें अखिलेश यादव के बाद पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक और INDIA गठबंधन के संपर्क सूत्रों में शामिल नेता के रूप में वर्णित किया है।
उनका यह कहना कि पार्टी टिकट मिलने पर वह चुनाव लड़ेंगे, फिलहाल उम्मीदवारी की इच्छा की पुष्टि है; इसे पार्टी की ओर से औपचारिक टिकट घोषणा नहीं माना जा सकता। अंतिम उम्मीदवारों की घोषणा समाजवादी पार्टी को करनी होगी।
यूपी में क्या है विधानसभा का गणित?
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक इन चुनावों में मतदान करते हैं। राज्यसभा चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) प्रणाली से होते हैं।
मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगियों की स्थिति मजबूत है। हालिया रिपोर्टों में भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए आठ सीटों तक पहुंचने की संभावना का उल्लेख किया गया है, जबकि समाजवादी पार्टी के लिए दो सीटें अपने मौजूदा विधानसभा समर्थन के आधार पर संभव मानी जा रही हैं। हालांकि यह चुनावी गणित उम्मीदवारों की अंतिम सूची, गठबंधन समर्थन और मतदान के दौरान विधायकों के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
इसी वजह से समाजवादी पार्टी के सामने सबसे पहले अपनी उपलब्ध सीटों को सुरक्षित करने की चुनौती है। इसके बाद अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने का सवाल आता है।
क्या SP तीसरा उम्मीदवार उतारेगी?
समाजवादी पार्टी के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी तीन उम्मीदवार उतारने की संभावना पर विचार कर रही है। इनमें राम गोपाल यादव के अलावा पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का नाम भी चर्चा में है। तीसरे उम्मीदवार के लिए पार्टी अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को ध्यान में रख सकती है।
हालांकि तीन उम्मीदवार उतारने की स्थिति में पार्टी को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी सीट के लिए SP को अपने मौजूदा संख्याबल से बाहर लगभग 16-17 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
इसलिए तीसरे उम्मीदवार का प्रश्न केवल नाम तय करने का नहीं, बल्कि विधानसभा में समर्थन जुटाने का भी है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण चुनाव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का समय भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। राज्य में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए अक्टूबर का राज्यसभा चुनाव राजनीतिक दलों के लिए विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठनात्मक और विधायी समर्थन का आकलन करने का एक अवसर भी होगा। Indian Express के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के कुछ समय बाद उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए भी चुनाव प्रस्तावित हैं।
ऐसे में SP के लिए राज्यसभा में अपने मौजूदा प्रतिनिधित्व को बनाए रखना महत्वपूर्ण संगठनात्मक मुद्दा है। राम गोपाल यादव की उम्मीदवारी इस संदर्भ में पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की निरंतरता से जुड़ी हुई है।
राम गोपाल यादव का राजनीतिक अनुभव
राम गोपाल यादव लंबे समय से समाजवादी पार्टी के केंद्रीय नेताओं में शामिल रहे हैं। राज्यसभा में उनका पांचवां कार्यकाल चल रहा है और संसद में उन्होंने विभिन्न विषयों पर बहस में हिस्सा लिया है। PRS के आंकड़ों के अनुसार, उनके मौजूदा कार्यकाल में उपस्थिति 86 प्रतिशत दर्ज की गई है और उन्होंने 398 बहसों में भाग लिया है।
ऐसे अनुभव को देखते हुए उनकी संभावित पुनर्नियुक्ति का अर्थ केवल एक सीट को भरना नहीं होगा, बल्कि SP के संसदीय दल में एक अनुभवी नेता को बनाए रखना भी होगा। फिर भी अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और चुनावी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
आगे की तस्वीर
फिलहाल राम गोपाल यादव ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है—यदि समाजवादी पार्टी उन्हें टिकट देती है, तो वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। अब अगला कदम पार्टी द्वारा उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा करना होगा।
उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के कारण मुख्यतः भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे पर केंद्रित रहेगा। तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की SP की कोशिश, उम्मीदवारों का चयन और अन्य दलों के विधायकों का रुख चुनाव की दिशा तय करने वाले प्रमुख तथ्य होंगे।
इसलिए राम गोपाल यादव का बयान अभी उम्मीदवारी की इच्छा को दर्शाता है, जबकि वास्तविक तस्वीर 29 सितंबर से शुरू होने वाली नामांकन प्रक्रिया और समाजवादी पार्टी की आधिकारिक सूची सामने आने के बाद स्पष्ट होगी।

