Congress नंदीग्राम उपचुनाव: बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ के हलफनामे पर कांग्रेस की शिकायत, उम्र और शैक्षणिक योग्यता पर उठाए सवाल
कोलकाता, 23 सितंबर 2026: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग (ECI) में शिकायत कर उनके हलफनामे में उम्र और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी कथित विसंगतियों की जांच की मांग की है। बाद में कांग्रेस ने इसी मुद्दे को कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष भी उठाया।
Congress में उपचुनाव 6 अक्टूबर 2026 को होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। ऐसे में उम्मीदवार के नामांकन से जुड़े दस्तावेजों पर उठे सवाल ने चुनावी प्रक्रिया में एक नया विवाद जोड़ दिया है।
Congress ने क्या आपत्ति उठाई?
Congress पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने 22 सितंबर को निर्वाचन आयोग से शिकायत की। कांग्रेस का मुख्य आरोप हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे में दर्ज दो सूचनाओं के बीच कथित असंगति को लेकर है।
रिपोर्टों के मुताबिक, हलफनामे में रथ ने अपनी उम्र 60 वर्ष से अधिक बताई है। वहीं शैक्षणिक योग्यता के कॉलम में उन्होंने 1965 में माध्यमिक (कक्षा 10) परीक्षा पास करने की जानकारी दी है। कांग्रेस का कहना है कि दोनों सूचनाओं को साथ रखे जाने पर उम्र और परीक्षा पास करने के वर्ष के बीच गंभीर सवाल पैदा होता है।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया है कि हलफनामे में जिस स्कूल—चौखाली गंगा पद्म मिलन कन्या विद्यापीठ—का नाम माध्यमिक परीक्षा के लिए दिया गया है, उसे लेकर भी दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि उस समय स्कूल को कक्षा 10 के लिए सरकारी मान्यता प्राप्त नहीं थी। यह दावा अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है।
बीजेपी ने आरोपों को बताया टाइपिंग की गलती
बीजेपी ने Congress के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि हसीरानी रथ की उम्र को लेकर कोई वास्तविक समस्या नहीं है और हलफनामे में 1965 का उल्लेख टाइपोग्राफिकल गलती के कारण हुआ।
बीजेपी के अनुसार, रथ ने वास्तव में 1980 में कक्षा 10 में पढ़ाई की थी। रथ के चुनाव कार्यालय ने भी यही दावा किया है कि उन्होंने बंगाल में उस समय लागू माध्यमिक परीक्षा व्यवस्था के तहत उसी स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी।
बीजेपी ने अपनी स्थिति के समर्थन में स्कूल द्वारा जारी एक प्रमाणपत्र का भी हवाला दिया है, जिसमें रथ की जन्मतिथि 8 जून 1965 बताई गई है। पार्टी का कहना है कि यदि 1980 को परीक्षा वर्ष माना जाए तो उम्र और शैक्षणिक विवरण में बताई गई विसंगति समाप्त हो जाती है।
इस तरह फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग हैं। कांग्रेस इसे हलफनामे में गंभीर विरोधाभास मान रही है, जबकि बीजेपी इसे दस्तावेज में हुई टाइपिंग संबंधी गलती बता रही है।
मामला कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा
निर्वाचन आयोग में शिकायत के बाद कांग्रेस ने 23 सितंबर को कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख भी किया। कांग्रेस नेता और अधिवक्ता रित्जू घोषाल ने न्यायमूर्ति कृष्ण राव के समक्ष मामला उठाया और हलफनामे में उम्र तथा शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी पर सवाल रखे।
Congress ने अदालत से हसीरानी रथ की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग करने की बात कही है, यदि जांच में शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी गलत पाई जाती है। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि निर्वाचन आयोग ने हलफनामे की जांच की, लेकिन कथित विसंगति के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की।
हालांकि अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद इस तरह की चुनौती के लिए कौन-सा कानूनी रास्ता उचित होगा। मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
चुनावी हलफनामे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामे मतदाताओं को उनकी व्यक्तिगत, शैक्षणिक, संपत्ति और आपराधिक मामलों से संबंधित घोषित जानकारी उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए हलफनामे में दर्ज किसी तथ्य में वास्तविक गलती या विरोधाभास सामने आने पर उसकी जांच चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि, केवल किसी जानकारी में विसंगति पाए जाने से यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी वास्तव में गलत थी या टाइपिंग/दस्तावेजी त्रुटि थी और संबंधित चुनावी कानून के तहत उसका क्या प्रभाव पड़ता है।
नंदीग्राम मामले में भी यही प्रश्न केंद्रीय है—क्या 1965 का वर्ष वास्तव में गलत तरीके से दर्ज हुआ, क्या 1980 वाला दावा आधिकारिक दस्तावेजों से प्रमाणित कानूनी विवाद चल रहा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि यदि प्रधान को जमानत मिलती है तो उन्हें चुनाव लड़ने की उचित अनुमति दी जानी चाहिए होता है और स्कूल तथा परीक्षा से संबंधित रिकॉर्ड क्या कहते हैं।
नंदीग्राम में पहले से राजनीतिक तनाव
हसीरानी रथ के हलफनामे का विवाद नंदीग्राम उपचुनाव से जुड़ा एकमात्र विवाद नहीं है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी और उनकी चुनावी भागीदारी को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को कहा था कि यदि प्रधान को जमानत मिलती है तो उन्हें चुनाव लड़ने की उचित अनुमति दी जानी चाहिए।
प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार किया गया है। कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस और अन्य पक्षों की ओर से मामलों और वारंटों की अलग व्याख्या सामने आई है। यह मामला हसीरानी रथ के हलफनामे से अलग कानूनी विवाद है।
इस बीच, नंदीग्राम उपचुनाव में राजनीतिक समीकरण भी बदले हैं। कांग्रेस को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े का समर्थन मिला है और इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार से जुड़े घटनाक्रम ने चुनाव को और चर्चा में ला दिया है।
अब आगे क्या होगा?
हसीरानी रथ के मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम अदालत और निर्वाचन अधिकारियों द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों की जांच होगा। यदि 1965 और 1980 के परीक्षा-वर्ष को लेकर कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आता है, तो उससे विवाद की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हलफनामे में हुई कथित विसंगति के कारण रथ की उम्मीदवारी स्वतः रद्द हो जाएगी। बीजेपी का पक्ष है कि यह टाइपिंग की गलती है और उसने 1980 में कक्षा 10 की पढ़ाई करने तथा 1965 की जन्मतिथि का हवाला दिया है। दूसरी ओर, कांग्रेस इस दावे की स्वतंत्र जांच चाहती है
इसलिए नंदीग्राम उपचुनाव में अब एक अहम सवाल केवल राजनीतिक मुकाबले का नहीं, बल्कि उम्मीदवार द्वारा दाखिल दस्तावेजों की सटीकता का भी है। निर्वाचन आयोग और अदालत की आगे की कार्रवाई से यह तय होगा कि हलफनामे में दर्ज जानकारी को किस तरह देखा जाता है और इसका उम्मीदवार की उम्मीदवारी पर कोई कानूनी प्रभाव पड़ता है या नहीं।

