Haryana चुनाव विवाद: दीपेंद्र हुड्डा ने CEC के इस्तीफे और दोबारा चुनाव की मांग की
हरियाणा के 2024 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही उन्होंने हरियाणा विधानसभा को भंग कराकर राज्य में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी उठाई है। हुड्डा का आरोप है कि 2024 के विधानसभा चुनाव में वोटों में बड़े स्तर पर हेरफेर हुआ और भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया का अनुचित लाभ उठाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि चुनाव आयोग या किसी न्यायिक निष्कर्ष से नहीं हुई है।
1. दीपेंद्र हुड्डा ने क्या कहा?
26-27 सितंबर 2026 को हरियाणा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठकों के दौरान दीपेंद्र हुड्डा ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने कथित तौर पर वोटों में हेरफेर के जरिए 2024 में राज्य की सरकार बनाई।
हुड्डा ने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं तो दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए। उनका कहना था कि ऐसा नहीं होने पर लोगों का चुनाव प्रणाली पर विश्वास प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से भी इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की।
2. सात प्रतिशत वोट बढ़ने का दावा
Haryana हुड्डा ने अपने आरोपों के समर्थन में एक प्रमुख सवाल उठाया। उनका दावा है कि चुनाव के दो दिन बाद भाजपा के वोट शेयर में लगभग सात प्रतिशत की वृद्धि कैसे हुई।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से सवाल किया कि वोट प्रतिशत में इस कथित बदलाव का कारण क्या था और इसका संतोषजनक जवाब अभी तक नहीं मिला है। यह हुड्डा द्वारा उठाया गया राजनीतिक सवाल है; इसे चुनावी धांधली का स्थापित प्रमाण नहीं माना जा सक
3. CEC पर सीधे लगाए आरोप
दीपेंद्र हुड्डा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि हाल में सामने आई कुछ रिपोर्टों और दो चुनाव आयुक्तों से संबंधित कथित खुलासों के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर उनकी आशंकाएं मजबूत हुई हैं।
हुड्डा ने आरोप लगाया कि CEC की भूमिका के कारण हरियाणा चुनाव में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। इसी आधार पर उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं, और उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई अंतिम न्यायिक या चुनाव आयोग का निष्कर्ष नहीं है जो इन आरोपों को सिद्ध करता हो।
4. दोबारा चुनाव कराने की मांग क्यों?
Haryana हुड्डा का तर्क है कि यदि 2024 के विधानसभा चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल हैं, तो जनता को दोबारा मतदान का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा को संबंधित कुछ विसंगतियों पर सवाल उठाए थे। उस समय कांग्रेस ने कुछ EVM में कथित गड़बड़ियों की जांच और VVPAT पर्चियों के मिलान की मांग की थी। भंग करके नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। कांग्रेस नेता के अनुसार, इससे मतदाताओं के विश्वास को बहाल करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, किसी विधानसभा चुनाव को रद्द करना या दोबारा चुनाव कराना संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। केवल राजनीतिक आरोप के आधार पर चुनाव स्वतः रद्द नहीं हो जाता।
5. विवाद की पृष्ठभूमि: 2024 का विधानसभा चुनाव
हरियाणा में अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव हुए थे। चुनाव के बाद कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और मतगणना से संबंधित कुछ विसंगतियों पर सवाल उठाए थे। उस समय कांग्रेस ने कुछ EVM में कथित गड़बड़ियों की जांच और VVPAT पर्चियों के मिलान की मांग की थी।
चुनाव आयोग ने कांग्रेस के आरोपों को स्वीकार नहीं किया। आयोग की ओर से कहा गया था कि EVM की प्रक्रिया उम्मीदवारों और उनके एजेंटों की मौजूदगी में होती है और मतदान समाप्त होने के समय उम्मीदवारों के एजेंटों की ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी।
6. राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोपों से जुड़ा मामला
हरियाणा चुनाव को लेकर कांग्रेस के आरोप केवल दीपेंद्र हुड्डा तक सीमित नहीं हैं। 2025 में राहुल गांधी ने भी मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित विसंगतियों को लेकर सवाल उठाए थे।
कांग्रेस की ओर से कुछ उदाहरण देते हुए मतदाता सूची में कथित डुप्लीकेट या संदिग्ध प्रविष्टियों का मुद्दा उठाया गया। चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन करते हुए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में अपना पक्ष रखा था।
इसलिए वर्तमान विवाद को समझने के लिए 2024 के चुनाव के बाद से चले आ रहे कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच मतभेदों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
7. कांग्रेस के पुराने आरोप और चुनाव आयोग का जवाब
2024 में कांग्रेस ने चुनाव परिणामों के बाद कुछ EVM में कथित असामान्यताओं का आरोप लगाया था। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि EVM से जुड़ी निर्धारित प्रक्रियाएं उम्मीदवारों और उनके एजेंटों की मौजूदगी में पूरी की गई थीं। आयोग के अनुसार, मतदान बंद होने के समय किसी उम्मीदवार या उसके एजेंट ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति नहीं की थी।
कांग्रेस की ओर से उस समय VVPAT पर्चियों का मिलान कराने की मांग भी उठाई गई थी। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान आरोप अचानक सामने आया विवाद नहीं, बल्कि 2024 के चुनाव के बाद से जारी राजनीतिक और संस्थागत बहस का हिस्सा है।
8. चुनावी प्रक्रिया पर भरोसे का सवाल
दीपेंद्र हुड्डा ने अपने हालिया बयानों में चुनावी संस्थाओं पर जनता के भरोसे को प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनका कहना है कि यदि चुनावों की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पहले ऐसे आरोपों का जवाब देते हुए अपनी प्रक्रियाओं और उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड का हवाला दिया है। इसलिए इस विवाद में आरोपों और आधिकारिक रूप से सत्यापित तथ्यों को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है।
9. मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं
हरियाणा चुनाव विवाद का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह केवल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं है। इसमें चुनाव आयोग, मतदाता सूची, EVM, VVPAT, मतगणना और चुनावी पारदर्शिता जैसे संस्थागत प्रश्न जुड़े हैं।
यदि किसी राजनीतिक दल के पास चुनावी अनियमितता के ठोस दस्तावेज या प्रमाण हैं, तो उनका परीक्षण संबंधित संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा सकता है। केवल चुनाव परिणाम से असहमति और चुनाव में कानूनी रूप से सिद्ध हेरफेर—दोनों अलग बातें हैं।
10. आगे क्या हो सकता है?
Haryana दीपेंद्र हुड्डा की मांग के बाद अब मुख्य प्रश्न यह है कि कांग्रेस अपने आरोपों के समर्थन में कौन से दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करती है तथा चुनाव आयोग या अन्य संबंधित संस्थाएं उन पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।
हुड्डा ने दोबारा विधानसभा चुनाव कराने और CEC के इस्तीफे की मांग की है। लेकिन इन मांगों पर निर्णय संबंधित संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही हो सकता है।
निष्कर्ष
हरियाणा के 2024 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद एक बार फिर चर्चा में है। दीपेंद्र हुड्डा ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और हरियाणा में नए विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है, साथ ही उन्होंने 2024 के चुनाव में कथित वोट हेरफेर का आरोप लगाया है।
हालांकि, इन आरोपों को अभी राजनीतिक दावों के रूप में देखना चाहिए। चुनाव आयोग ने पहले EVM और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया था। इसलिए अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच, चुनावी रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया से स्थापित तथ्यों को देखना आवश्यक होगा।

