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इस्लामनगर में अवैधरूप से चल रहे फर्जी अस्पतालों में धड़ल्ले से हो रहा गर्भपात भोली भाली जनता के साथ किया जा रहा खिलवाड़.

इंडिया सावधान न्यूज़ मजहर अंसारी

लखनऊ बदायूं जनपद के नगर पंचायत इस्लामनगर में गली गली मोहल्ले मोहल्ले में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। चाय की गुमटियों जैसी दुकानाें में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीड़ित हो या फिर अन्य कोई बीमारी से। सभी बीमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करने को तैयार हो जाते हैं। खास बात यह है कि अधिकतर अनट्रेंड महिला दाइयों से मोटी रकम लेकर गर्भपात कराया जा रहा है

इसमें भी प्रत्येक महीने के गर्भपात की अमुक झोलाछाप डॉक्टरों के यहां अलग अलग दरों पर यह घिनौना कृत चल रहा है जिसकी जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह से होने पर भी इनके खिलाफ कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई जा रही है,उधर जब मरीज का केस खराब हो जाता है तब उक्त फर्जी चिकित्सक द्वारा
उसको आनन फानन में जिला अस्पताल भेज दिया जाता है या फिर बड़े शहर में भेज दिया । जाता है जबकि यह लापरवाही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की जानकारी में भी है।

जानकारी के अनुसार इस्लामनगर के ग्रामीण क्षेत्र के मोहल्लों सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुविधाएं नहीं होने की वजह से इसका फायदा सीधे तौर पर झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में सरकारी इलाज की सुविधा नहीं है इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है या फिर बीमार होने पर इन झोलाछाप डॉक्टरों से ही इलाज कराना पड़ता है, हां और
बिना लाइसेंस के दवाओं का भंडारण भी किया जाता है उक्त डॉक्टरों के यहां

झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा बिना पंजीयन के एलोपैथी चिकित्सा का व्यवसाय ही नहीं किया जा रहा है। बल्कि बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण व विक्रय भी अवैध रूप से किया जा रहा है। दुकानों के भीतर कार्टून में दवाओं का अवैध तरीके से भंडारण रहता है। इस्लामनगर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई सालों से अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय कर रहे लोगों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई भी नहीं की गई है इन दिनों मौसमी बीमारियों का कहर है। झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें मरीजों से भरी पड़ी हैं। गर्मी व तपन बढ़ने के कारण इन दिनो उल्टी, दस्त, बुखार जैसी बीमारियां ज्यादा पनप रही हैं। झोलाछाप डॉक्टर इन मर्जों का इलाज ग्लूकोज की बोतलें लगाने से शुरू करते हैं और एक बोतल चढ़ाने के लिए इनकी फीस Rs 500 से Rs1000 रुपए तक होती है। और जिसके चलते

झोलाछाप डॉक्टरों की वजह से अब तक कई लोगों की असमय जान चली गई है। इस्लामनगर में अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने स्थाई तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं की। इन झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन दूर से ही इन्हें देख रहा है।
केस बिगड़ने पर अस्पताल रैफर कर देते हैं मरीज

बीते कुछ वर्षों से फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों की वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में कोई सेक्स स्पेशलिस्ट है तो कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ और कोई अपने आप को बवासीर या दंत चिकित्सक बता रहा है लेकिन इनके निजी क्लीनिकों में लगभग सभी गंभीर बीमारियों का इलाज धड़ल्ले से किया जा जाता है कुछ डॉक्टरों ने तो अपनी क्लिनिक में ही ब्लड जांच, यूरीन जांच इत्यादि की सुविधा भी कर रखी है, स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया तो शायद भविष्य में न जाने कितनी मौतें और न जाने कितनी गर्भवती महिलाओं को अपनो जान से हाथ धोना पड़ेगा और अवैध भ्रूण हत्याओं पर अंकुश नहीं लग सकेगा स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि

टीम बनाकर उक्त झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई कराए ।
वहीं हमारी टीम को बदायूं मुख्य चिकित्साधिकारी ने ट्वीटर के माध्यम से अवगत कराया है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने देंगे और बहुत जल्द ही इस दिशा में वैधानिक कार्यवाही की जायेगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्यवाही करने का काम किया जाएगा,