नई दिल्ली, 20 मई रियायती दरों पर ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट दिलाने के बहाने से निर्दोष लोगों
को ठगने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश उत्तरी पश्चिमी जिला की साइबर थाना पुलिस ने किया है। पुलिस
ने उक्त मामले में चार महिलाओं समेत छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जिनके पास से 20 मोबाइल फोन,
01 लैपटॉप, 05 एटीएम कार्ड और दस्तावेज बरामद किये हैं। पिछले छह महीने में आरोपित करीब तीन सौ लोगों
को ठग चुके थे। आरोपितों की पहचान मनीष अरोड़ा, राजा हुसैन, सोनिया कौर, रूपाली, मीनू कोहली और गीता के
रूप में हुई है।
आरोपितों ने तीस हजार रुपये में कॉल सेंटर किराये पर लेकर युवतियों को 10 से 13 हजार रुपये
तनख्वाह दिया करता था।
डीसीपी ऊषा रंगनानी ने शुक्रवार को बताया कि साइबर थाना पुलिस को एक शिकायत मिली थी। पीतमपुरा के रहने
वाले शिकायतकर्ता ललित कुमार जैन ने पुलिस को बताया कि उनके पास एक अंजान फोन नंबर से फोन आया
था। कॉलर ने उनके ड्राइविंग लाइसेंस की डेट आगे बढ़ाने की बात कही। जिसके लिये उसने 75 सौ रुपये मांगे।
जिसका उसने कॉलर के बताए खाते में रुपये जमा भी करवा दिये।
पैसे जमा करवाने के बाद उसका ड्राइविंग
लाईसेंस रेवन्यू नहीं हुआ।
फोन भी नहीं उठा रहा है। पुलिस ने उसके बयान पर मामला दर्ज किया। एसएचओ
विजेन्द्र कुमार के निर्देशन में महिला एसआई मोहिनी,एसआई सुनील चंन्द्र कांस्टेबल शेर सिंह,गौरव ओर मनोज को
आरोपितों को पकड़ने का जिम्मा सौंपा गया।
पीडि़त से आरोपित के बैंक खाते और मोबाइल फोन की डिटेल ली गई। जिसकी जांच करने के बाद मीरा बाग,
पश्चिम विहार इलाके में फर्जी कॉल सेंटर में छापेमारी कर सभी छह आरोपितों को गिरफ्तार किया। पूछताछ करने
पर पता चला कि आरोपित मनीष अरोड़ा मुख्य मास्टर माइंड और मालिक पाया गया जो इस फर्जी कॉल सेंटर को
चलाता है। सभी लड़कियों को प्रबंधक और टेली-कॉलर के रूप में काम पर रखता है।
आरोपित राजा हुसैन टीम
लीडर/मैनेजर है। मुख्य आरोपी मनीष अरोड़ा करीब 10 साल से एजेंट के तौर पर काम कर रहा था ताकि ग्राहकों
को अलग-अलग बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने में मदद की जा सके। जहां उन्होंने बेगुनाहों से दोस्ती करके उन्हें
ठगने की तकनीक सीखी।
उसने रियायती दरों पर ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट दिलाने के बहाने निर्दोष लोगों को ठगने के लिए फर्जी कॉल
सेंटर खोलने की योजना बनाई।
उसने छह महीने पहले पश्चिम विहार इलाके में फर्जी कॉल सेंटर शुरू किया। लेकिन
तीन महीने बाद उसने अपने कॉल सेंटर का स्थान बदल दिया,
क्योंकि आसपास के कई लोगों ने उन पर शक करना
शुरू हो गया था।
अब उसने अपने कॉल सेंटर को चलाने के लिए किराए पर एक और ऑफिस ले लिया। आरोपी
जनता को लुभाने के लिए बल्क एसएमएस भेजते थे। महिला टेली-कॉलर्स आकर्षक ऑफर देकर लीड जेनरेट करने
के लिए कॉल करती थीं। ग्राहकों से मंजूरी मिलने के बाद आरोपित राजा हुसैन अलग-अलग खातों में राशि ट्रांसफर
करवाता था,
जिसे मुख्य आरोपित मनीष अरोड़ा ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग नामों से खोला
था। पैसे ट्रांसफर कराने के तुरंत बाद आरोपित राजा हुसैन एटीएम से पैसे निकाल लेता था।

