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TMC की सुष्मिता देव ने ममता को दूसरा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दिया, फिर असम के मुख्यमंत्री सरमा से मुलाकात की

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद Sushmita Dev ने अचानक अपने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस्तीफे के कुछ ही समय बाद उनकी मुलाकात Himanta Biswa Sarma से हुई, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।

सुष्मिता देव का यह कदम ऐसे समय आया है जब TMC पहले से ही कई राज्यों में संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में पार्टी के कई नेताओं और सांसदों के बीच असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं।

TMC leader Sushmita Dev at the Parliament House premises

सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे के संबंध में विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह अपने राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय राजनीति में नई भूमिका को लेकर गंभीरता से विचार कर रही थीं। इस्तीफे के बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

गौरतलब है कि सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वह लंबे समय तक Indian National Congress TMC का हिस्सा रहीं और पार्टी की राष्ट्रीय महिला इकाई में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। वर्ष 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था। उस समय ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी में प्रमुख भूमिका दी थी और बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया था।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि असम और पूर्वोत्तर भारत में अपनी राजनीतिक पहचान रखने वाली सुष्मिता देव के लिए क्षेत्रीय राजनीति हमेशा महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में हिमंत बिस्वा सरमा से उनकी मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट मानना मुश्किल है। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

इस घटनाक्रम ने भाजपा और टीएमसी के बीच राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि TMC के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और पार्टी अपने नेताओं को एकजुट रखने में विफल हो रही है। दूसरी ओर TMC नेताओं ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि सुष्मिता देव का इस्तीफा उनका व्यक्तिगत निर्णय है और इसका पार्टी की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि टीएमसी 2026 के बाद की राजनीतिक चुनौतियों और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे समय में किसी वरिष्ठ सांसद का इस्तीफा विपक्षी दलों को पार्टी पर हमला करने का अवसर दे सकता है।

TMC leader Sushmita Dev at the Parliament House premises

असम की राजनीति के संदर्भ में भी यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। सुष्मिता देव का परिवार लंबे समय से बराक घाटी की राजनीति में प्रभावशाली रहा है। उनके पिता स्वर्गीय Santosh Mohan Dev कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रह चुके थे। इस कारण सुष्मिता देव का असम में अभी भी अच्छा राजनीतिक प्रभाव माना जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि यदि सुष्मिता देव भविष्य में भाजपा का दामन थामती हैं तो यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि हो सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वह किसी नए राजनीतिक मंच या स्वतंत्र भूमिका की भी तलाश कर सकती हैं।

टीएमसी नेतृत्व फिलहाल इस पूरे मामले पर सतर्क नजर बनाए हुए है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि संगठन मजबूत है और किसी एक नेता के जाने से उसकी राजनीतिक स्थिति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि विपक्षी दल इस घटनाक्रम को टीएमसी के भीतर बढ़ती अस्थिरता का संकेत बताने में जुट गए हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुष्मिता देव का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा। क्या वह भाजपा में शामिल होंगी, कोई नई राजनीतिक दिशा चुनेंगी या फिर कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखेंगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन इतना तय है कि उनके इस्तीफे और हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और टीएमसी के लिए यह घटनाक्रम निश्चित रूप से चिंता का विषय बन गया है।

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