NEET पेपर विवाद: जेपी नड्डा ने जम्मू-कश्मीर के पेपर लीक का किया जिक्र, उमर अब्दुल्ला बोले— ‘समयरेखा कुछ और कहानी बताती है’
नई दिल्ली/श्रीनगर: NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आमने-सामने आ गए हैं। विवाद उस समय गहरा गया जब नड्डा ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए विभिन्न राज्यों में हुए परीक्षा पेपर लीक के मामलों का उल्लेख किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (JKSSB) का मामला भी शामिल था। इसके जवाब में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नड्डा ने घटना का जिक्र तो सही किया, लेकिन उसकी समयरेखा गलत बताई है।
नड्डा ने विपक्ष को घेरा
NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच जेपी नड्डा ने विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं, वे उन राज्यों में हुई परीक्षा अनियमितताओं पर चुप रहे, जहां उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राजनीतिक भूमिका रही है।
इसी क्रम में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के सेवा चयन बोर्ड (JKSSB) पेपर लीक मामले का भी उल्लेख किया और इसे विपक्ष की कथित दोहरी नीति का उदाहरण बताया।
उमर अब्दुल्ला का पलटवार
जेपी नड्डा के बयान के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नड्डा का यह कहना सही है कि जम्मू-कश्मीर में पेपर लीक हुआ था, लेकिन उन्होंने उसकी तारीख और राजनीतिक संदर्भ गलत बताया।
उमर अब्दुल्ला ने लिखा कि JKSSB पेपर लीक की घटना वर्ष 2022 में हुई थी। उस समय जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस की सरकार नहीं थी, बल्कि केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) के नेतृत्व में प्रशासन चल रहा था। इसलिए उस घटना की जिम्मेदारी वर्तमान या तत्कालीन विपक्षी दलों पर डालना तथ्यों के अनुरूप नहीं है।
हाई लेवल कमेटी पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केवल समयरेखा पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि उस मामले की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति (High Level Committee) की रिपोर्ट का भी मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार उस मामले का उल्लेख कर रही है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि जांच समिति की रिपोर्ट का क्या हुआ और अब तक उसके आधार पर क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में पारदर्शिता भी उतनी ही आवश्यक है जितनी राजनीतिक जवाबदेही।
NEET विवाद के बीच बढ़ी सियासत
देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है। विपक्ष परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सुधार किए जा रहे हैं।
इसी व्यापक बहस के दौरान विभिन्न राज्यों में हुए पुराने पेपर लीक मामलों का भी राजनीतिक विमर्श में उल्लेख किया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर का पुराना मामला फिर चर्चा में
JKSSB भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामला वर्ष 2022 में सामने आया था। आरोपों के बाद परीक्षा रद्द की गई थी और मामले की जांच शुरू हुई थी। इस प्रकरण में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं और जांच की दिशा पर सवाल उठाए गए थे।
इसी पुराने मामले का उल्लेख करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि सरकार इस घटना को वर्तमान राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रही है, तो उसे उसकी पूरी पृष्ठभूमि भी बतानी चाहिए।
भाजपा की प्रतिक्रिया
उमर अब्दुल्ला के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी पलटवार किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष तथ्यों को अपने राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत कर रहा है और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के मुद्दे पर सभी दलों को समान रूप से आत्ममंथन करना चाहिए।
भाजपा का यह भी कहना है कि पेपर लीक की समस्या किसी एक राज्य या एक सरकार तक सीमित नहीं रही है, इसलिए इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय व्यापक सुधारों के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
परीक्षा सुधार पर बढ़ा जोर
NEET विवाद के बाद केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार, डिजिटल निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे कदमों पर जोर दे रही है। वहीं विपक्ष की मांग है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और सभी लंबित जांचों की रिपोर्ट सार्वजनिक की

