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नई दिल्ली भारत में धार्मिक स्थलों को लेकर रोज रोज एक न्या विवाद जन्म लेता नजर आता है इस से देश के भाई चारा खत्म सा होता नजर आ रहा है,

अब अगर इस तरह झूठे दावों करने वालों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो देश की एकता और अखंटता के लिए इस तरह के लोग नासूर बनते चले जाएंगे ।अभी जेसे तेसे अयोध्या का मामला शांत हुआ था तो मथुरा

और काशी का विवाद भी काफी समय से चला आ रहा है जो की न्यायलय में विचाराधीन है,फिर दिल्ली की कुतुब मीनार ,बैंगलोर की मस्जिद,और आगरा का ताज महल,

और तो और हिंद के वाली ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है जिसको महाराणा प्रताप सेना के लोगों ने आरोप लगाते हुए शिकायत की है

की दरगाह के अंदर स्वास्तिक का चिन्ह पाया गया है जो की पहले मंदिर था ,

अब सोचने वाली बात है कि इस तरह से अच्छे टुच्चे लोग समाज के भाईचारे को खत्म करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं,और धार्मिक स्थलों पर be बुनियाद आरोप लगा रहे हैं हैं ,ऐसे में देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को आगे आकर

हस्ताछेप करना चाहिए और इस तरह के समाज में पल रहे नफराती कीड़ों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही अमल लानी चाहिए जिस से की देश की एकता और अखंडता पर किसी प्रकार की आंच न आने पाए, वहीं ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती गरीब

नवाज दरगाह कमेटी के अध्यक्ष अमीन पठान ने भारत सरकार से मांग की है कि महाराणा प्रताप सेना के पदाधिकारियों ने जो झूठे आरोप दरगाह को लेकर लगाए हैं

उसको उन्होंने निराधार बताते हुए सरकार से उनके खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है, उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि इस तरह दरगाह शरीफ को बदनाम करने की एक साजिश है

जिसका मकसद झूठ और भ्रम फेलाना है

और झूठी वाह वाही निंदनीय एवं खेद जनक है,उन्होंने सरकार मांग करते हुए कहा कि जिस तरह मीडिया में झूठी और भ्रामक खबरें फैलने वाली खबरों से संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही करने की मांग है