इंडिया सावधान न्यूज़
नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी योगी टू में कुछ नया करना चाहती है जिस से मुस्लिम समाज की जो भाजपा की ओर से जो विचार धारा बनी हुई है
उसको लेकर भाजपा अपनी छवि को कहीं न कहीं सुधारने की कोशिश कर रही है
योगी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुधार लाने में अपने प्रयासों को जमीनी स्तर पर उतारना चाहती है इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में
बड़ा परिवर्तन करने जा रही है,जल्दी ही सरकार मदरसों में TET को अनिवार्य करने का फरमान जारी करने जा रही है मतलब अब मदरसों में जो भी शिक्षकों की भर्ती होगी वोह अब TET के माध्यम से ही होगी ।
जबकि पूर्व की सरकारों ने मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने या खुश करनें के लिए जेसे चाहा भर्ती करा दी जो अभी तक मदरसों में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षक के लिए न्यूनतम योग्यता उर्दू या किसी समकक्ष प्रमाण पत्र के साथ
इंटरमीडिएट पास होना और कक्षा 5 से 8 में पढ़ाने के लिए शिक्षक के लिए न्यूनतम योग्यता कामिल डिग्री या अरबी फारसी या दीनियात और फाजिल के साथ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री या आलिम,मुअल्लिम हाई स्कूल के साथ या
अरबी फारसी होना भीअनिवार्य थी, जबकि राज्य में लगभग 16,461 से अधिक मदरसे हैं जिनमें से 560 सरकार द्वारा सहायता प्राप्त हैं, जानकारी के अनुसार, सरकार मदरसों में NCERT के पाठ्यक्रम को लागू कर शिक्षकों की भर्ती के लिए
TET को अनिवार्य बनाएगी, जबकि ये व्यवस्था उर्दू, फारसी, अरबी और दीनियात के शिक्षकों की भर्ती पर लागू नहीं होगीI उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने मिडिया को ये जानकारी देते हुए
बताया है कि, सरकार इस विषय से सम्बंधित एक प्रारूप तैयार कर रही है और उसको जल्दी ही अमली जामा पहनाकर मदरसों पर लागू किया जाएगा ,
वहीं राज्य मंत्री ने कहा कि मदरसों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए हमारी सरकार जल्दी ही एन सी ई आर टी को लागू कर इन पाठ्यक्रमों के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्कता होगी जिन्हें TET के माध्यम से भर्ती किया जाएगा ,वहीं
सरकार के इस कदम को लेकर शिक्षक संघ मदारिस अरबिया ने कहा कि प्रदेश में NCERT के इस पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए मदरसों में टीईटी के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती से, उनके बीच भेदभाव होने की संभावना हो सकती है वहीं
उन्होंने कहा कि “आधुनिक शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने से एक ही मदरसे में पढ़ाने वाले शिक्षकों के बीच योग्यता और शिक्षा का अंतर होगा, क्योंकि टीईटी पास करने के बाद भर्ती होने वाले शिक्षकों की
शैक्षिक योग्यता अरबी, फारसी, दीनियात और उर्दू पढ़ाने वालों की तुलना में अधिक होगी, इसलिए अन्य सभी विषयों के लिए भी TET का होना अनिवार्य होना चाहिए जिस से मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को आगे चलकर आधुनिक शिक्षा प्राप्त
करने के लिए कहीं और जाने की जरूरत न पड सके,अब देखना यह होगा कि इस प्रणाली को लागू करने के बाद सरकार के इस फैसले को मुस्लिम समुदाय किस तरह किस तरह से देखेगा।

