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जौनपुर की अदालत ने सोमवार को उमाकांत यादव के साथ छह अन्य को भी उम्रक़ैद की सज़ा दी है. उमाकांत यादव और उसके साथियों पर साल 1995 में एक राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) कांस्टेबल की हत्या का आरोप लगाया गया था.

अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश शरद कुमार त्रिपाठी ने इस मामले में सभी सात अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

अदालत ने उमाकांत यादव पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इसके अलावा अन्य दोषियों पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगा है.

उमाकांत यादव हत्या के आरोप में पहले से ही जेल में थे, वहीं छह अन्य ज़मानत पर बाहर थे. फैसले के बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मामला 4 फरवरी 1995 का है. अपने ड्राइवर राजकुमार यादव

को जीआरपी लॉकअप से छुडाने के लिए उमाकांत यादव और उनके साथियों ने कथित रूप से अंधाधुंध फायरिंग की थी. इस फायरिंग में एक जीआरपी कांस्टेबल की मौत हो गई थी.

ड्राइवर राजकुमार यादव की जौनपुर के शाहगंज रेलवे प्लेटफॉर्म पर सीट शेयरिंग को लेकर एक यात्री के साथ बहस हो गई थी, जिसके बाद राजकुमार ने एक कांस्टेबल की पिटाई कर कर दी थी,

बाद में जीआरपी पुलिस ने राजकुमार को हिरासत में ले लिया था.

शुरुआत में मामले की जांच जीआरपी ने की थी. बाद में मामला यूपी पुलिस की अपराध शाखा को ट्रांसफर कर दिया गया था.( इशाकत अली खान)