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गाजीपुर, 18 अगस्त (जब भी आजादी की बात होती है तो जेहन में 18 अगस्त 1942 का वह दिन
याद आ जाता है, जब महात्मा गांधी के

;अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान पर जिले के शेरपुर के आंदोलित
आजादी के आठ दीवाने शहीद हो गए।

आजादी के दीवाने तहसील भवन पर झंडा फहराने के लिए परिसर में घुसने लगे और तहसीलदार ने गोली चलाने
का आदेश दिया। आठ लोग शहीद हो गए फिर भी तहसील पर तिरंगा फहरा कर ही माने। उन्हें वीर शहीदों की याद

में गुरुवार को उन्हें अवाम द्वारा पैतृक गांव शेरपुर स्थित शहीद वन के साथ ही मोहम्मदाबाद तहसील परिसर
स्थित शहीद पार्क में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

शहीद होने वालों में डॉ. शिवपूजन, वंश नारायण राय, ऋषेश्वर
राय, श्रीनारायण राय, वंश नारायण राय, राजा राय, वशिष्ठ नारायण राय, रामबदन उपाध्याय रहे।

शहीद दिवस के अवसर पर गुरुवार को शहीद पार्क मोहम्मदाबाद में 18 अगस्त 1942 को अपने प्राणों की आहुति
देने वाले अष्ट शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ शहीद स्मृति भवन पर एसडीएम ने
ध्वजारोहण कर किया।

इसके बाद राष्ट्रगान और अष्ट शहीद अमर रहे का नारा लगाया गया। शहीदों की याद में
हवन-पूजन भी किया गया।

इसी क्रम में संजय राय शेरपुरिया व डॉ राहुल राय ने दीप जलाकर शहीद झांकी का
अनावरण किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी के आह्वान पर जब पूरे देश में क्रांति का बिगुल बजा तो शेरपुर
के नौजवान भी आजादी की लड़ाई में भाग लेने के लिए सिर पर कफन बांधकर निकल पड़े थे।

अपने प्राणों की
आहुति देकर मोहम्मदाबाद तहसील भवन पर तिरंगा फहरा दिया था।

यह एक अहिंसक बेमिसाल क्रांति थी। अष्ट
शहीदों ने जिस तरह के देश की कल्पना कर अपने प्राण न्यौछावर किया

, उनके सपनों का भारत बनाने के लिए
हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इस मौके पर लोगों ने अमर शहीद डाॅ.
शिवपूजन राय एवं शहीद वंशनारायण राय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।

-गांधीजी के आह्वान भारत छोड़ो आंदोलन पर शेरपुर के लोगों ने लगा दी थी जान की बाजी
गांधीजी के आह्वान पर 14 अगस्त 1942 को शेरपुर के यमुना गिरी के नेतृत्व में युवा गौसपुर हवाई अड्डा पर

पहुंचकर उसमें आग लगा दी। वहां सुरक्षा में तैनात अंग्रेज सिपाहियों ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में
यमुना गिरी घायल हो गए, जिन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस आंदोलन का असर इलाके में पूरी तरह

से युवकों पर पड़ा। 18 अगस्त 1942 को शेरपुर के डाॅ. शिवपूजन राय के नेतृत्व में युवकों का जत्था तहसील
भवन पर झंडा फहराने के लिए चल दिया। युवकों के सीने में यमुना गिरी का बदला लेने की आग धधक रही थी।

युवक यमुना गिरी का बदला लेने का नारा लगाते हुए चल रहे थे। आंदोलनकारी युवा बड़की बारी गांव के पास
एकत्रित हुए

और वहां से निहत्थे तिरंगा लेकर तहसील पर पहुंचकर तहसील भवन पर झंडा फहराने के लिए चढ़ने
लगे।

अंग्रेजी सरकार के गुलाम तहसीलदार ने उन्हें झंडा फहराने से रोका। युवकों के न मानने पर उन पर गोली चलाने
का आदेश दिया, इसके बावजूद युवक पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ते गए सीने पर गोलियां खाते रहे, लेकिन तिरंगे
को झुकने नहीं दिया। गोली लगने से डॉ. शिवपूजन राय, वंश नारायण राय, ऋषेश्वर राय, श्रीनारायण राय, वंश

नारायण राय, राजा राय, वशिष्ठ नारायण राय व रामबदन उपाध्याय शहीद हो गए। बुरी तरह से जख्मी सीताराम
राय को मृत समझकर अंग्रेज कठवामोड़ बेसो नदी में ले जाकर फेंक दिए, जो काफी दिनों तक जीवित रहे। उन्हें

लोग जिंदा शहीद के नाम से जानते थे। इस घटना के बाद बौखलाए अंग्रेजों ने शेरपुर में दमन शुरू कर दिया। 29
अगस्त को अंग्रेजों की गोली से रमाशंकर लाल श्रीवास्तव,

खेदन सिंह यादव व राधिका पांडेय शहीद हो गए। उनकी
याद में शेरपुर में भी शहीद पार्क का निर्माण कराया गया है।

श्रद्धांजलि देने वालों में शहीद पुत्री डॉ. आशा राय, बाला जी राय, भाजपा नेता विरेंद्र राय, रविकांत राय, विजय
शंकर राय, अवधेश राय, देवप्रकाश सिंह, जयप्रकाश राय, अवधकिशोर राय, सचिदानंद राय, राजेश राय बागी,

कार्यक्रम की अध्यक्षता बृजनाथ राय एवं संचालन चौधरी दिनेशचंद्र राय ने किया।

समापन से पूर्व आयोजन समिति
के संयोजक आनंद राय सांकृत ने सभी का आभार प्रकट किया।

-कला प्रदर्शनी लगाकर अर्पित की श्रद्धांजलि
डाॅ. एमए अंसारी इंटर कॉलेज के कला शिक्षक राजकुमार सिंह के नेतृत्व में संभावना कला मंच से जुड़ी छात्राओं ने

शहीद स्मृति भवन और शहीद पार्क की दीवारों पर पेंटिंग प्रदर्शनी लगाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। अपनी पेंटिंग
के माध्यम से छात्राओं ने महिलाओं पर होने वाले अत्याचार,

अंग्रेजों द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों पर किए गए जुल्म,
आजादी की लड़ाई और समाज की विकृतियों का सुंदर चित्रण किया था, जिसकी लोगों ने जमकर सराहना की।