नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने एक भारतीय कंपनी
द्वारा निर्मित एक कफ सीरप के कथित सेवन से गांबिया में बच्चों की मौत को लेकर शुक्रवार को
केंद्र पर निशाना साधा और सरकार से जवाबदेही तय करने को कहा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को चेतावनी दी कि हरियाणा के सोनीपत स्थित
‘मेडेन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड’ द्वारा कथित तौर पर उत्पादित ‘दूषित’ और ‘कम गुणवत्ता’ वाले चार
कफ सीरप पश्चिमी अफ्रीका के देश गांबिया में हुई बच्चों की मौत का कारण हो सकते हैं।
भारत के औषधि महानियंत्रक डीसीजीआई ने पहले ही जांच शुरू कर दी है और डब्ल्यूएचओ से और
जानकारी मांगी है।
पूर्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने इस मुद्दे पर एक बयान में कहा कि गांबिया में दर्जनों
बच्चों की मौत ‘‘एक भारतीय कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल्स द्वारा बनाई गई खांसी की दवाई के
सेवन से हुई है, इससे दुनिया को झटका लगा है।’’
शर्मा ने कहा, ‘‘यह एक बड़ी घटना है जो गंभीर चिंताओं को उठाती है जिसका उल्लेख डब्ल्यूएचओ
द्वारा किया गया है, यह साथ ही ऐसे सवाल भी खड़े करती है जिनका उत्तर दिया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के बयान संवेदनशीलता
और सहानुभूति से रहित हैं
और इसमें इस मुद्दे की गंभीरता और इसके प्रतिकूल परिणाम नहीं
झलकते।’’
शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में, भारतीय दवा उद्योग ने एक प्रतिष्ठा और वैश्विक
स्वीकार्यता का निर्माण किया है। शर्मा ने कहा कि भारतीय जेनरिक के आने से जीवन रक्षक दवाओं
की लागत में कमी आई है और इससे दवाएं अफ्रीका और महाद्वीपों के विकासशील देशों में सस्ती
कीमत पर उपलब्ध हुईं। उन्होंने कहा कि इससे लाखों लोगों की जान बची और भारत को ‘‘दुनिया की
फार्मेसी’’ के रूप में पहचान मिली।
उन्होंने कहा, ‘‘इसने निहित स्वार्थ वाले बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों को परेशान कर दिया। मैं अमेरिका
के ‘ग्लोबल अलायंस’ और यूरोपीय दवा लॉबी के गठन तथा 2010-11 में भारत द्वारा उत्पादित
दवाओं और जेनेरिक दवाओं को बदनाम करने के लिए अफ्रीका को लक्ष्य करके नकली दवाओं के
खिलाफ एक सुनियोजित अभियान शुरू करने को उल्लेखित करना जरूरी मानता हूं।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘भारत ने इस अभियान का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया। भारतीय मिशन
सक्रिय थे और व्यक्तिगत रूप से अफ्रीकी मंत्रियों के साथ सम्पर्क में थे और वरिष्ठ अधिकारियों ने
अफ्रीका और अन्य विकासशील देशों की यात्रा की थी। यह एक कठिन लड़ाई थी जिसे भारत ने
जीता।’’
उन्होंने कहा कि भारत के पास सुरक्षा, गुणवत्ता और विनिर्माण के मानक पर एक मजबूत कानूनी
ढांचा और नियामक तंत्र है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा के परीक्षण में विफल रहने वाली कोई भी दवा का
निर्यात तो छोड़ दीजिये, विपणन भी नहीं किया जा सकता।
शर्मा ने कहा कि सरकारी प्राधिकारियों और औषधि नियामक के इस ‘‘चलताऊ बयान’’ से गंभीरता
नहीं झलकती कि ये सिरप भारत में नहीं बेचे जाते हैं और केवल गांबिया को निर्यात किए जाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अस्वीकार्य है और तत्काल सुधारात्मक उपाय करने की आवश्यकता है।’’

