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नई दिल्ली, 08 अक्टूबर ( उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि गवाह का बयान अथवा

उससे जिरह उसी दिन या अगले ही दिन दर्ज किया जाना चाहिए और इसके स्थगन का कोई आधार
नहीं होना चाहिए।

शीर्ष अदालत हत्या के एक मामले में दो व्यक्तियों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दी गई
जमानत रद्द करने की मांग करने वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। न्यायालय को

सूचित किया गया कि अभियोजन पक्ष के एक गवाह का बयान दर्ज करने में लगभग तीन महीने लग
गए।

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की पीठ ने कहा, ‘‘कानून भी यही कहता
है कि मुख्य गवाही और जिरह उसी दिन या अगले दिन किया जाना चाहिए।

’’
शीर्ष अदालत ने 30 सितंबर को पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘दूसरे शब्दों में, अभियोजन पक्ष के
गवाह की मुख्य गवाही/ जिरह के स्थगन का कोई आधार नहीं होना चाहिए।’’

उच्च न्यायालय ने फरवरी और मार्च में पारित अपने दो अलग-अलग आदेशों में, उत्तर प्रदेश के
भदोही जिले में हत्या सहित विभिन्न अपराधों के लिए दर्ज मामले के संबंध में दो व्यक्तियों को
जमानत दी थी।

शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान पीठ को अवगत कराया गया कि गवाहों की सूची के
अनुसार तीन चश्मदीद गवाह हैं और मामले में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया गया है।

पीठ को यह भी अवगत कराया गया कि अभियोजन पक्ष के एक गवाह का बयान दर्ज किया गया है
लेकिन इसमें लगभग तीन महीने लग गए।

पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए छह सप्ताह बाद की तारीख तय की है।