नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव
ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कृषि पराली जलाने सहित अन्य कारणों से होने
वाले वायु प्रदूषण के मुद्दे को लेकर एक समीक्षा बैठक की।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की कुछ घटनाएं सामने
आई हैं।
डिजिटल माध्यम से हुई इस बैठक में इस बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री और पर्यावरण विभाग के
प्रभारी मनोहर लाल खट्टर, राजस्थान के पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री
गोपाल राय, उत्तर प्रदेश के पर्यावरण मंत्री अरुण कुमार और पंजाब के गुरमीत सिंह मीत ने भाग
लिया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में इस मौसम में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सभी हितधारकों की
समन्वित कार्रवाई और सहयोग सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
यादव ने बैठक के बाद एक ट्वीट में कहा, ‘‘बैठक में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई उनमें
पराली जलाना, औद्योगिक
प्रदूषण, वाहन प्रदूषण, निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों से होने
वाला प्रदूषण शामिल है।’’
उन्होंने बताया कि राज्यों द्वारा धान के पुआल के दिए गए अनुमानित आंकड़ों के आलोक में प्रदूषण
की समस्या की भयावहता पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग
(सीएक्यूएम) ने इस मौसम के दौरान वायु प्रदूषण के प्रबंधन के लिए तैयार की गई गतिविधियों के
साथ-साथ उठाए गए कदमों, निर्देशों और सुझावों के बारे में बताया।
इस बीच, मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सीएक्यूएम की ओर से बैठक में
बताया गया कि वायु प्रदूषण के प्रबंधन, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के साथ-साथ निगरानी तथा
कार्यालय के बारे में जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए एजेंसियों और राज्य सरकारों के साथ कई
बैठकें की गई हैं।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘पराली जलाने का मुद्दा सभी हितधारकों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है।
बैठक में राज्यों द्वारा धान के अवशेष जलाने की घटनाओं पर की गई कार्रवाई और योजना पर भी
प्रकाश डाला गया। राज्य सरकारों द्वारा सीआरएम मशीनरी की उपलब्धता और आवंटन के संबंध में
नवीनतम जानकारी दी गई। राज्य सरकारों ने सूचित किया है कि उन्होंने स्थानीय निकायों को इस
काम में शामिल किया है और फसल अवशेषों के बेहतर निपटारे के उपायों को बढ़ावा देने के लिए
किसानों को नई मशीनरी उपलब्ध कराई जा रही है।’’
बैठक में पराली के प्रबंध की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में बायो-डीकंपोजर के तहत क्षेत्र
के विस्तार पर भी चर्चा की गई।
मंत्रालय ने कहा कि राज्यों ने धान की पराली के वैकल्पिक इस्तेमाल को आर्थिक संसाधन के रूप में
बढ़ावा देने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन और गतिविधियों की प्रगति के बारे में जानकारी दी।
बैठक में वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया और राज्यों ने सभी
वाहनों में प्रदूषण जांच (पीयूसी) प्रमाण-पत्र सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही सख्त
कार्रवाइयों के बारे में जानकारी दी। सड़क यातायात प्रबंधन प्रणालियों के बारे में भी चर्चा की गई।
बयान में कहा गया, ‘‘दिल्ली में पटाखे जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है जबकि
हरियाणा और उत्तर प्रदेश ने हरित पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी है।’’
बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सभी
हितधारकों के संयुक्त प्रयास के साथ-साथ जन-जागरूकता और भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

