PU चुनाव: AAP ने ABVP उम्मीदवार के नामांकन में अनियमितताओं का लगाया आरोप, चुनाव से पहले बढ़ा विवाद
पंजाब विश्वविद्यालय (PU) कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव 2026 से ठीक पहले राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के पंजाब विश्वविद्यालय चुनाव प्रभारी और विधायक अमृतपाल सुखानंद ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अंकित बिधान के नामांकन पत्रों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब विश्वविद्यालय में 31 अगस्त को छात्र परिषद के चुनाव होने हैं और कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
AAP ने नामांकन पत्रों पर उठाए सवाल
अमृतपाल सुखानंद ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि ABVP उम्मीदवार के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कई विसंगतियां सामने आईं। उनके अनुसार, नामांकन में करीब पांच गलतियां बताई गई थीं। AAP का कहना है कि विश्वविद्यालय के नियमों के तहत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के नामांकन पत्र में निर्धारित शर्तों से जुड़ी गंभीर त्रुटि पाए जाने पर नामांकन खारिज किया जाना चाहिए।
AAP की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि कथित आपत्तियों के बावजूद उम्मीदवार का नामांकन चुनावी प्रक्रिया में आगे कैसे बढ़ा। पार्टी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।
हाई कोर्ट जाने की चेतावनी
मामले को लेकर AAP ने विवाद बढ़ने की स्थिति में कानूनी रास्ता अपनाने के संकेत भी दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सुखानंद ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित अनियमितताओं पर उचित कार्रवाई नहीं की तो पार्टी अदालत का रुख कर सकती है।
इस बयान के बाद PU चुनावों का मुकाबला केवल छात्र संगठनों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहने की संभावना दिखाई दे रही है। चुनाव से ठीक पहले नामांकन को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
ABVP उम्मीदवार ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, ABVP उम्मीदवार अंकित बिधान ने AAP और उसकी छात्र इकाई ASAP द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। बिधान का कहना है कि उनके सभी शैक्षणिक और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन हो चुका है और ये दस्तावेज विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारियों के सामने उपलब्ध हैं।
बिधान ने यह भी सवाल उठाया कि यदि ASAP को नामांकन को लेकर वास्तव में गंभीर आपत्ति थी तो उसने निर्धारित आपत्ति अवधि के दौरान शिकायत क्यों नहीं की। उनके अनुसार, चुनाव नजदीक आने के बाद इस मुद्दे को उठाना राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश
चुनावी मुकाबले में बढ़ी गर्मी
पंजाब विश्वविद्यालय के छात्र चुनावों में अलग-अलग छात्र संगठन लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। इस बार भी अध्यक्ष पद का मुकाबला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ABVP की ओर से अंकित बिधान मैदान में हैं, जबकि AAP से जुड़े ASAP ने आदिल बराड़ को उम्मीदवार बनाया है। चुनाव 31 अगस्त को होने हैं।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, SOI के उम्मीदवार का नामांकन खारिज किए जाने के बाद विरोध हुआ था और ABVP के उम्मीदवार के नामांकन को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। इससे यह स्पष्ट है कि चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत से ही कैंपस में राजनीतिक गतिविधियां और तनाव बढ़ा हुआ है।
ABVP ने भी AAP पर लगाए राजनीतिक आरोप
अंकित बिधान ने पलटवार करते हुए AAP और ASAP पर छात्र मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति का केंद्र फीस, हॉस्टल, साफ-सफाई, सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल प्रशासन और विश्वविद्यालय के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जैसे मुद्दे होने चाहिए।
ABVP का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले व्यक्तिगत आरोप लगाने के बजाय छात्र संगठनों को अपने एजेंडे और काम के बारे में बात करनी चाहिए। बिधान ने AAP से यह भी सवाल किया कि पंजाब सरकार ने विश्वविद्यालय के लिए वित्तीय सहायता और अन्य संसाधनों को लेकर क्या कदम उठाए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था भी हुई सख्त
नामांकन विवाद के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से कराने पर भी जोर दे रहा है। कैंपस में सुरक्षा बढ़ाई गई है और विश्वविद्यालय के तीनों प्रवेश द्वारों पर जांच की जा रही है।
चुनाव से पहले सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय पहले ही सतर्क है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, कैंपस में बाहरी लोगों की आवाजाही और संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए सुरक्षा उपाय बढ़ाए गए हैं। विश्वविद्यालय अधिकारियों ने कई ऐसी वस्तुएं भी जब्त की हैं जिन्हें चुनावी हिंसा में इस्तेमाल किया जा सकता था।
विवाद का असर छात्रों पर कितना पड़ेगा?
नामांकन को लेकर जारी यह विवाद चुनावी माहौल पर सीधा असर डाल सकता है। एक तरफ AAP अपने आरोपों के जरिए नामांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है, वहीं ABVP इसे राजनीतिक रणनीति बता रही है। ऐसे में अंतिम फैसला विश्वविद्यालय के चुनावी नियमों और संबंधित अधिकारियों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हों और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिले। नामांकन की वैधता को लेकर यदि कोई आधिकारिक निर्णय आता है, तो वही इस विवाद की दिशा तय करेगा।
छात्र मुद्दे बनाम राजनीतिक आरोप
PU चुनावों में इस बार राजनीतिक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। AAP की ओर से चुनाव में सक्रिय भागीदारी को पार्टी की कैंपस राजनीति में वापसी की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले चुनाव में AAP से जुड़े संगठन का प्रदर्शन कमजोर रहा था और पार्टी अब छात्र राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
ऐसे माहौल में नामांकन विवाद दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। AAP इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा बना रही है, जबकि ABVP इसे अपने उम्मीदवार के खिलाफ राजनीतिक अभियान बता रही है।
अब सबकी नजर चुनावी प्रक्रिया पर
PU छात्र परिषद चुनाव से पहले ABVP उम्मीदवार के नामांकन को लेकर उठे सवालों ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप और जवाब सामने आ चुके हैं, लेकिन कथित अनियमितताओं पर अंतिम स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन या संबंधित सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से ही स्पष्ट होगी।
31 अगस्त को होने वाले चुनाव में छात्र अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। ऐसे में नामांकन विवाद के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की है।
निष्कर्ष: AAP ने ABVP उम्मीदवार अंकित बिधान के नामांकन में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाकर जांच और कार्रवाई की मांग की है, जबकि बिधान ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए अपने दस्तावेजों को सत्यापित बताया है। चुनाव से ठीक पहले सामने आया यह विवाद अब PU कैंपस की छात्र राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। अंतिम फैसला विश्वविद्यालय की आधिकारिक प्रक्रिया और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
