Amit Shah ने यमुना पुनर्जीवन प्रयासों की समीक्षा की, दिल्ली, हरियाणा और यूपी से संयुक्त कार्रवाई की अपील
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने यमुना नदी के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों की विस्तृत समीक्षा करते हुए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों से समन्वित और संयुक्त कार्रवाई करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए सभी संबंधित राज्यों को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर मिलकर काम करना होगा।
गृह मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों, जल संसाधन विशेषज्ञों तथा पर्यावरण विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण, सीवेज प्रबंधन की चुनौतियों और नदी की पारिस्थितिकी को पुनर्स्थापित करने के लिए चल रही योजनाओं की प्रगति का आकलन करना था।
Amit Shah ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यमुना की सफाई केवल सरकारी परियोजना नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदी के प्रदूषण का बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों से आता है जहां बिना उपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट सीधे नदी में छोड़े जाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और नियमित निगरानी आवश्यक है।
बैठक में यमुना के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण के स्तर, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) की क्षमता और उनके संचालन की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि कई स्थानों पर नए एसटीपी स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि पुराने संयंत्रों के आधुनिकीकरण का कार्य भी जारी है। अमित शाह ने निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा को तत्काल दूर किया जाए।
Amit Shah ने कहा कि यमुना की सफाई का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि और शहरी जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली में यमुना की स्थिति पर चिंता व्यक्त की, जहां नदी का एक बड़ा हिस्सा गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि राजधानी में नदी की स्वच्छता सुनिश्चित करना पूरे देश के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा।
बैठक के दौरान हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। दोनों राज्यों ने नदी में प्रदूषण कम करने के लिए विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के क्रियान्वयन का विवरण प्रस्तुत किया। अमित शाह ने इन प्रयासों की सराहना की, लेकिन साथ ही कहा कि अलग-अलग प्रयासों के बजाय साझा रणनीति और संयुक्त कार्ययोजना अधिक प्रभावी साबित होगी।
Amit Shah विशेषज्ञों ने बैठक में सुझाव दिया कि यमुना के पुनर्जीवन के लिए केवल प्रदूषण नियंत्रण पर्याप्त नहीं है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना, जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देना और अवैध अतिक्रमणों को हटाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गृह मंत्री ने इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
अमित शाह ने तकनीक के उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए आधुनिक डिजिटल प्रणालियों और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। इससे प्रदूषण के स्रोतों की पहचान तेजी से हो सकेगी और समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि यमुना संरक्षण अभियान में आम जनता की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। गृह मंत्री ने कहा कि जब तक नागरिकों, स्थानीय समुदायों और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक स्थायी परिणाम हासिल करना कठिन होगा। उन्होंने जागरूकता कार्यक्रमों और जनभागीदारी अभियानों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
यमुना नदी उत्तराखंड से निकलकर हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से होते हुए आगे बढ़ती है। इस कारण नदी के संरक्षण से जुड़े मुद्दे कई राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी की सफाई के लिए अंतरराज्यीय सहयोग सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। अमित शाह की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करती हैं, तो आने वाले वर्षों में यमुना की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। हालांकि इसके लिए निरंतर निगरानी, पर्याप्त वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी।
बैठक के अंत में अमित शाह ने सभी संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट संदेश दिया कि यमुना पुनर्जीवन परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और अविरल यमुना केवल पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण विरासत है। गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के संयुक्त प्रयासों से यमुना को पुनः स्वच्छ और जीवनदायिनी नदी के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।

