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सुबह- सुबह लगभग 7 बजे के आसपास अमेरिका से भैय्या का वीडियो कॉल आया। मैं चौंकी !

कभी समय न निकाल पाने वाले भाई आज खुद कॉल कर रहे हैं। फौरन कॉल उठाया और बोली,
“नमस्ते भैया।”
“हाँ ठीक है -ठीक है।” भैया ने अपने चिर परिचित अंदाज में जवाब दिया। हम दोनों में लगभग 12 वर्षों का अंतर है इसलिए भैया मुझे बच्ची ही समझते हैं जबकि मैं दो बच्चों की मां बन चुकी हूँ। भैया आगे बोले,
“तुमने कुछ सुना कि नहीं, पापा जी शादी कर रहे हैं उसी नर्स से जो मां के जाने के बाद से उनकी सेवा कर रही है। मैं तो अभी आ नहीं सकता। तुम ही उन्हें समझाओ अब बुढ़ापे में भद्द क्यों पिटवा रहे हैं।” शायद पापा जी के पड़ौस में रहने वाले अंकल ने उन्हें फ़ोन किया था।
मैं छोटी तो जरूर हूँ पर पापा के लिए इस तरह की भाषा के लिए मैंने उन्हें डांट दिया। वे बोले,
“अच्छा सॉरी-सॉरी, पर पापा को समझाओ जरा।तेरी तो सुन भी लेते हैं। मुझसे तो सदा नाराज ही रहतें हैं।” मैं बोली,
“अभी दो दिनों पहले ही तो हमारी बात हुई। तब तो कुछ नहीं बोले। वीडियो कॉल पर बातें तो जाती हैं पर बहुत दिनों से मुलाकात नहीं हुई है। आज हम तीनों, मैं मनोज और विकी की छुट्टी है हम उनसे मिलकर आते हैं दो घंटे का तो रास्ता है। देखतें हैं मामला क्या है।
पापा जी के चरण स्पर्श करके मैं पापा के पास ही पलंग पर बैठ गई। कुछ इधर-उधर की बातों करके मैं माहौल बना रही थी कि पापा ही बोल पड़े,
” अंजू बेटी, मैं जो मेरी नर्स हैं न कस्तूरी उससे कल शादी करने वाला हूँ। बेटी, कुछ कहने के पहले मेरी पूरी बात ध्यान से सुन।” मैं सुनने लगी।
कुछ क्षणों के ‘पाज’ के बाद वे बोले,
” बेटी, तेरी मां के जाने के बाद से लगभग 15 वर्षों से कस्तूरी और उसकी लड़की दीपा मेरी तन-मन से सेवा कर रहीं हैं। कस्तूरी विधवा है। दीपा अभी पढ़ रही है। कई बार नियंत्रण नहीं रहता तो सब बिस्तर पर ही हो जाता है पर वो बिना किसी शिकन के साफ करती है। खाना भी बना कर खिलाती और दोनों में से कोई न कोई सदा मेरे पास बनी रहतीं है। कस्तूरी जिस प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करती है। वहां उसे 9000 रूपये मिलते हैं। बताओ आज के समय में इतने रुपयों में क्या होता है। मैं 80 का हो चुका हूँ। अब लगता है कि कभी भी बुलावा आ सकता है। मुझे 50000 + पेंशन मिलाती है। अगर मैं कस्तूरी से शादी करता हूँ तो मेरे बाद आधी यानी लगभग 25000 रूपये, कस्तूरी को पेंशन मिलेगी। मैं तो चला जाऊंगा पर उसका भला हो जाएगा। बाकी सब मैंने वकील अंकल से मिलकर सारी लिखा पढ़ी कर दी है। उनसे मिल कर पता कर लेना। बस बेटी अब खुश होकर उदार हृदय से ‘नई मां का स्वागत करो।”
पापा जी के वृतांत के बाद मैं अवाक् रह गई।