Women आरक्षण विधेयक: लोकसभा में प्रियंका गांधी का पीएम मोदी पर हमला
भारत की संसद में Women आरक्षण विधेयक, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है, पर जोरदार बहस देखने को मिली। यह कानून संसद और राज्य विधानसभाओं में Women के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का वादा करता है। लेकिन लोकसभा में प्रियंका गांधी वाड्रा के तीखे भाषण ने इस मुद्दे को और गरमा दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि वे असली बदलाव को राजनीतिक फायदे के लिए टाल रहे हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सियासी घमासान-Women
2023 में इस बिल का पास होना Women के अधिकारों के लिए बड़ा कदम माना गया। लेकिन प्रियंका गांधी ने लोकसभा में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह कानून लागू कब होगा, यही सबसे बड़ा सवाल है।
उनका तर्क था कि यह सिर्फ कानून बनाने की बात नहीं, बल्कि उसे ज़मीन पर लागू करने की है। विपक्ष का मानना है कि यह बिल वोट पाने का जरिया बन सकता है, न कि महिलाओं को तुरंत सशक्त करने का।

प्रियंका गांधी की मुख्य आपत्तियाँ: देरी और लागू करने की रणनीति-Women
समयसीमा पर सवाल
Women आरक्षण बिल पहली बार 1996 में पेश हुआ था, लेकिन कई बार अटक गया। 2023 में इसे पास किया गया, लेकिन प्रियंका गांधी ने कहा कि इसे चुनावी समय पर लाया गया।
उन्होंने संसद में पूछा—
“आपने बिल पास कर दिया, लेकिन इसे लागू कब करेंगे?”
उनका कहना था कि Women 25 साल से इंतजार कर रही हैं, और अब भी उन्हें और इंतजार करना पड़ेगा।
जनगणना और परिसीमन की शर्त-Women
इस कानून को लागू करने के लिए अगली जनगणना और परिसीमन जरूरी बताया गया है।
परिसीमन यानी चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को नई जनसंख्या के आधार पर तय करना।
प्रियंका गांधी ने इसे “पोस्ट-डेटेड वादा” बताया। उनका कहना था कि इससे यह कानून 2029 के चुनाव तक टल सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: कांग्रेस की भूमिका
कांग्रेस पार्टी लंबे समय से महिला आरक्षण की समर्थक रही है।
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय से ही Women की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की कोशिशें होती रही हैं।
राजीव गांधी ने पंचायत स्तर पर 33% आरक्षण लागू किया था, जिससे लाखों महिलाएं राजनीति में आईं।
प्रियंका गांधी का कहना है कि कांग्रेस हमेशा इसे बिना देरी के लागू करना चाहती थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इसमें शर्तें जोड़ दी हैं।

सरकार का पक्ष: पीएम मोदी का जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल को Women के लिए “गारंटी” बताया। उनका कहना है कि सही तरीके से लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी हैं।
सरकार का तर्क है कि बिना सही डेटा के सीटों का बंटवारा न्यायसंगत नहीं होगा और इससे कानूनी दिक्कतें आ सकती हैं।
राजनीति और भविष्य की दिशा
भारत में Women वोटर्स की संख्या बहुत बड़ी है—करीब 47 करोड़। ऐसे में इस मुद्दे का चुनावों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विपक्ष का कहना है कि अगर यह कानून 2029 तक लागू नहीं होता, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक वादा बनकर रह जाएगा।
प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेता मांग कर रहे हैं कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए—कम से कम 2024 के चुनाव से पहले।
प्रियंका गांधी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच यह टकराव एक बड़े सवाल को सामने लाता है—
क्या Women आरक्षण सिर्फ कागज पर रहेगा या हकीकत बनेगा?
यह बहस अभी खत्म नहीं हुई है। असली परीक्षा इस बात की होगी कि यह कानून कब और कैसे लागू होता है।
PM मोदी कर्नाटक पहुंचे, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
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