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Congress VB-G RAM G एक्ट को लेकर Congress का केंद्र पर हमला, कहा- ‘रोज़गार अधिकार की चोरी’

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित VB-G RAM G एक्ट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। Congress ने इस विधेयक पर कड़ा हमला बोलते हुए इसे देश के युवाओं और कर्मचारियों के “रोज़गार अधिकार की चोरी” करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस कानून के माध्यम से रोजगार सुरक्षा, श्रमिक अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़े प्रावधानों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। वहीं केंद्र सरकार का दावा है कि यह कानून रोजगार सृजन, उद्योगों को बढ़ावा देने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है।

Congress नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि देश पहले से ही बेरोजगारी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। ऐसे समय में सरकार को स्थायी रोजगार, रिक्त पदों पर नियुक्ति और श्रमिकों के हितों की रक्षा पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन इसके विपरीत नए कानून के जरिए कर्मचारियों के अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।

Congress का आरोप

Congress प्रवक्ताओं ने कहा कि सरकार लगातार सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में भर्ती कम कर रही है और निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना है कि यदि VB-G RAM G एक्ट लागू होता है तो इसका सबसे अधिक असर युवाओं, संविदा कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर पड़ेगा।

Congress का आरोप है कि इस कानून से रोजगार की स्थिरता प्रभावित होगी और कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों में अधिक छूट मिल जाएगी। कांग्रेस ने इसे संविधान में निहित सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना के खिलाफ बताया।

‘रोज़गार अधिकार की चोरी’

Congress नेताओं ने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकार उनके अधिकारों को कमजोर करने में लगी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बेरोजगारी दर को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं।

पार्टी का कहना है कि रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन नए कानून के जरिए इस जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। सरकार का कहना है कि VB-G RAM G एक्ट का उद्देश्य निवेश बढ़ाना, उद्योगों को प्रोत्साहित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए कानून से उद्योगों को प्रक्रियागत सरलता मिलेगी, जिससे निवेश आकर्षित होगा और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। सरकार का दावा है कि लंबे समय में इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

सरकार ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि कानून का उद्देश्य किसी भी कर्मचारी के अधिकारों को समाप्त करना नहीं बल्कि रोजगार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

विपक्षी दलों का समर्थन

Congress के अलावा कई अन्य विपक्षी दलों ने भी इस कानून पर चिंता जताई है। विपक्ष का कहना है कि किसी भी बड़े श्रम या रोजगार संबंधी कानून को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा, राज्यों से परामर्श और श्रमिक संगठनों की राय ली जानी चाहिए।

कुछ ट्रेड यूनियनों ने भी इस प्रस्तावित कानून के विरोध में प्रदर्शन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती की गई तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

श्रमिक संगठनों की प्रतिक्रिया

श्रमिक संगठनों का कहना है कि भारत जैसे देश में सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि यदि कंपनियों को अत्यधिक छूट दी गई तो नौकरी की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

हालांकि उद्योग संगठनों का मत इससे अलग है। उनका कहना है कि श्रम कानूनों को सरल बनाना निवेश आकर्षित करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

राजनीतिक असर

विश्लेषकों का मानना है कि रोजगार का मुद्दा हमेशा से भारतीय राजनीति का प्रमुख विषय रहा है। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रही है। आगामी चुनावों को देखते हुए रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रह सकते हैं।

Congress ने संकेत दिए हैं कि वह इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाएगी। पार्टी ने सरकार से कानून के विवादित प्रावधानों को वापस लेने और सभी हितधारकों के साथ चर्चा करने की मांग की है।

युवाओं के बीच बढ़ी बहस

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है। एक वर्ग सरकार के सुधारों का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग रोजगार सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहा है। कई छात्र संगठनों और युवा समूहों ने भी इस विषय पर अपनी राय रखी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी श्रम या रोजगार सुधार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह उद्योगों की जरूरतों और कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन बना पाता है या नहीं।

VB-G RAM G एक्ट को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। कांग्रेस इसे युवाओं और कर्मचारियों के अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार को घेर रही है, जबकि केंद्र सरकार इसे आर्थिक सुधार और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।

आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर इस प्रस्तावित कानून के अंतिम प्रावधानों और वास्तविक प्रभाव का आकलन उसके आधिकारिक मसौदे और लागू होने के बाद ही स्पष्ट रूप से किया जा सकेगा।

 

 

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