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Dharmendra प्रधान ने पीएम मोदी के ‘मन की बात’ को बताया ‘जन आंदोलन’

केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात को “जन आंदोलन” बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देशवासियों को सकारात्मक परिवर्तन, सामाजिक भागीदारी और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने वाला एक व्यापक अभियान बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने नागरिकों को प्रेरित किया है कि वे समाज और राष्ट्र के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

मन की बात : संवाद का अनूठा मंच

‘मन की बात’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया एक मासिक रेडियो कार्यक्रम है, जिसमें वे देशवासियों से सीधे संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इसका उद्देश्य सरकार की योजनाओं का प्रचार करना भर नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और सामुदायिक प्रयासों को सामने लाना भी है।

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, नवाचार, विज्ञान, खेल, संस्कृति, स्थानीय उत्पाद, पर्यटन, स्वास्थ्य और युवाओं की उपलब्धियों जैसे अनेक विषयों पर चर्चा की जाती है। इसके माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से प्रेरणादायक कहानियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।

Dharmendra प्रधान का बयान

Dharmendra प्रधान ने कहा कि ‘मन की बात’ ने लोकतंत्र में संवाद की परंपरा को मजबूत किया है। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम सरकार और जनता के बीच एक प्रभावी सेतु का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केवल अपनी बात नहीं रखते, बल्कि देशभर से प्राप्त सुझावों, अनुभवों और प्रेरक उदाहरणों को भी साझा करते हैं, जिससे नागरिकों को यह महसूस होता है कि उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी और जनभागीदारी की भावना विकसित हुई है। स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण, ‘वोकल फॉर लोकल’, मिलेट्स के उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल भुगतान जैसे कई विषयों पर लोगों की भागीदारी बढ़ी है।

Dharmendra Pradhan lauds PM Modi's dedication to India's development - The  Statesman

क्यों कहा गया ‘जन आंदोलन’?

Dharmendra प्रधान ने ‘मन की बात’ को “जन आंदोलन” इसलिए बताया क्योंकि यह कार्यक्रम केवल सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सामाजिक बदलाव का सहभागी बनने के लिए प्रेरित करता है। कई अभियानों में नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, छात्रों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया है।

उदाहरण के लिए, स्वच्छता अभियान के दौरान लाखों लोगों ने अपने क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाए। जल संरक्षण के लिए तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल बचाने के प्रयासों को भी कार्यक्रम में प्रमुखता से स्थान मिला। इसी प्रकार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और डिजिटल लेन-देन को अपनाने जैसे विषयों पर भी व्यापक जनभागीदारी देखने को मिली।

शिक्षा और युवाओं पर विशेष जोर

केंद्रीय शिक्षा मंत्री होने के नाते धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ‘मन की बात’ में शिक्षा, नवाचार और युवाओं को लगातार प्रोत्साहित किया जाता है। परीक्षा के तनाव से लेकर वैज्ञानिक सोच, स्टार्टअप संस्कृति और कौशल विकास जैसे विषयों पर प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संदेश विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के छात्रों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों और नवाचार करने वाले युवाओं का उल्लेख किया जाता है, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।

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सामाजिक परिवर्तन का माध्यम

‘मन की बात’ के माध्यम से कई ऐसे व्यक्तियों और संगठनों की कहानियां सामने आई हैं, जिन्होंने अपने छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में बड़ा बदलाव लाया। किसी गांव में जल संरक्षण, कहीं जैविक खेती, कहीं महिला स्वयं सहायता समूहों की सफलता, तो कहीं स्थानीय हस्तशिल्प को नई पहचान मिलने जैसे उदाहरणों को कार्यक्रम में साझा किया गया।

इन प्रेरक कहानियों से यह संदेश जाता है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से भी संभव है।

लोकतांत्रिक संवाद की नई पहल

Dharmendra प्रधान के अनुसार, लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि निरंतर संवाद, सुझाव और जनसहभागिता इसकी मूल भावना है। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ ने संवाद की इस परंपरा को मजबूत किया है, जहां विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों के विचार और अनुभव राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बनते हैं।

कार्यक्रम में कई बार नागरिकों द्वारा भेजे गए सुझावों और अभियानों का उल्लेख किया जाता है, जिससे लोगों में भागीदारी की भावना बढ़ती है।

कार्यक्रम का व्यापक प्रसार

‘मन की बात’ का प्रसारण रेडियो के अलावा टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर भी किया जाता है। इसे अनेक भारतीय भाषाओं में प्रसारित किया जाता है, जिससे देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोग इसे सुन और समझ सकते हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय भी इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत से जुड़े रहते हैं।

इस व्यापक पहुंच के कारण यह कार्यक्रम देश के सबसे अधिक सुने जाने वाले सार्वजनिक संवाद कार्यक्रमों में शामिल हो गया है।

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आलोचना और समर्थन

‘मन की बात’ को लेकर समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की अलग-अलग राय रही है। समर्थकों का मानना है कि इस कार्यक्रम ने सकारात्मक सामाजिक अभियानों को गति दी है और लोगों को प्रेरित किया है। वहीं आलोचकों का कहना है कि लोकतांत्रिक संवाद को और अधिक सहभागितापूर्ण बनाने के लिए विभिन्न पक्षों के साथ प्रत्यक्ष संवाद भी महत्वपूर्ण है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे कार्यक्रमों का मूल्यांकन विभिन्न दृष्टिकोणों से किया जाता है, और यही लोकतंत्र की स्वाभाविक विशेषता है।

भविष्य की संभावनाएं

Dharmendra प्रधान का मानना है कि यदि नागरिकों की भागीदारी इसी प्रकार बढ़ती रही, तो ‘मन की बात’ आगे भी सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण के अभियानों को नई दिशा दे सकती है। शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, नवाचार, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे विषयों पर जनभागीदारी बढ़ाने में इस कार्यक्रम की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रह सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और उद्यमियों की प्रेरक कहानियों को राष्ट्रीय मंच मिलने से समाज में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का विस्तार होगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra प्रधान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम मन की बात को “जन आंदोलन” बताना इस बात को रेखांकित करता है कि उनके अनुसार यह कार्यक्रम केवल सरकारी संदेशों का माध्यम नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी, प्रेरणा और सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देने वाला मंच बन चुका है। साथ ही, इस कार्यक्रम को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर विभिन्न दृष्टिकोण भी मौजूद हैं। लोकतांत्रिक समाज में ऐसे संवाद कार्यक्रमों का महत्व इस बात पर भी निर्भर करता है कि वे नागरिकों की भागीदारी, विचारों के आदान-प्रदान और सकारात्मक सामाजिक पहलों को किस हद तक प्रोत्साहित करते हैं।

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