Digvijaya सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने NEET पर सरकार के रुख का समर्थन किया
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Digvijaya सिंह की अध्यक्षता वाली संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की स्थायी समिति ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को जारी रखने के सरकार के निर्णय का समर्थन किया है। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए एक समान परीक्षा व्यवस्था छात्रों के लिए पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करती है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब कुछ राज्यों और राजनीतिक दलों द्वारा NEET को समाप्त करने या उसमें बड़े बदलाव करने की मांग की जा रही है। समिति ने व्यापक विचार-विमर्श और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की हैं।
NEET को बताया राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी व्यवस्था
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि NEET ने देशभर में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया है। पहले विभिन्न राज्यों और निजी संस्थानों द्वारा अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती थीं, जिससे छात्रों को कई परीक्षाओं में शामिल होना पड़ता था। इससे आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता था।
रिपोर्ट के अनुसार, एकल प्रवेश परीक्षा व्यवस्था ने छात्रों को राहत प्रदान की है और मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं को कम करने में मदद की है। समिति ने माना कि NEET के माध्यम से मेरिट आधारित चयन प्रणाली को मजबूती मिली है।
सरकार के रुख को मिला समर्थन
केंद्र सरकार लगातार यह कहती रही है कि NEET देश में मेडिकल शिक्षा के मानकों को बनाए रखने और समान अवसर सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है। संसदीय समिति ने भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली को समाप्त करने के बजाय उसमें सुधार किए जाने चाहिए।
समिति ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाए ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता की संभावना को कम किया जा सके।
परीक्षा में सुधार की जरूरत पर जोर
हालांकि समिति ने NEET का समर्थन किया, लेकिन उसने परीक्षा प्रणाली में कई सुधारों की आवश्यकता भी बताई। रिपोर्ट में कहा गया कि परीक्षा आयोजन से जुड़े सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जाना चाहिए। प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा उपायों को और बेहतर बनाने की सिफारिश की गई है।
समिति ने यह भी कहा कि छात्रों को परीक्षा संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए और शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जाए। इसके अलावा, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों के लिए सुविधाओं को बढ़ाने की भी आवश्यकता बताई गई।
Digvijaya – क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा को बढ़ावा
रिपोर्ट में क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। समिति ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा को अधिक से अधिक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि विभिन्न राज्यों के छात्र अपनी मातृभाषा में परीक्षा देकर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
समिति का मानना है कि भाषा किसी भी छात्र की प्रतिभा के आकलन में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसलिए क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और अनुवाद की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए विशेष तंत्र विकसित करने की सिफारिश की गई है।
छात्रों के मानसिक दबाव पर चिंता
NEET जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं से जुड़े मानसिक दबाव और तनाव का मुद्दा भी समिति की चर्चा का हिस्सा रहा। रिपोर्ट में कहा गया कि परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए परामर्श सेवाओं और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत किया जाना चाहिए।
समिति ने सुझाव दिया कि स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में छात्रों के लिए नियमित काउंसलिंग कार्यक्रम चलाए जाएं ताकि परीक्षा संबंधी तनाव को कम किया जा सके। इसके साथ ही अभिभावकों को भी जागरूक करने की आवश्यकता बताई गई है।
मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का लक्ष्य
समिति ने कहा कि NEET का उद्देश्य केवल प्रवेश परीक्षा आयोजित करना नहीं है, बल्कि देश में मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना भी है। एक समान परीक्षा के माध्यम से योग्य छात्रों का चयन सुनिश्चित होता है, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, फैकल्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। समिति का मानना है कि केवल प्रवेश परीक्षा में सुधार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पूरे मेडिकल शिक्षा तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।
राजनीतिक बहस के बीच महत्वपूर्ण संदेश
NEET को लेकर विभिन्न राज्यों, विशेष रूप से दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में लंबे समय से राजनीतिक बहस चल रही है। कुछ दलों का तर्क है कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होती है। वहीं समर्थकों का कहना है कि एक राष्ट्रीय परीक्षा समान अवसर प्रदान करती है।
Digvijaya सिंह की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के सांसद शामिल हैं। ऐसे में समिति का सरकार के मूल रुख का समर्थन करना व्यापक सहमति का संकेत माना जा रहा है।
संसदीय समिति की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि NEET को समाप्त करने के बजाय उसे और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। समिति ने एकल राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को मेडिकल प्रवेश के लिए उपयुक्त माना है, साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और तकनीकी सुधारों पर विशेष जोर दिया है।
Digvijaya सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति की सिफारिशें आने वाले समय में मेडिकल शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। रिपोर्ट का मुख्य संदेश यही है कि NEET को बनाए रखते हुए उसमें आवश्यक सुधार किए जाएं ताकि देशभर के छात्रों को समान और निष्पक्ष अवसर मिल सकें।
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