Government एथेनॉल नीति पर किसानों की राय पर विचार करेगी: शिवराज सिंह चौहान
Government केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि केंद्र सरकार एथेनॉल (इथेनॉल) नीति से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में किसानों की राय को प्राथमिकता देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा ऐसी नीति बनाने की है, जिससे किसानों की आय बढ़े, कृषि क्षेत्र को मजबूती मिले और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हो। उन्होंने कहा कि किसानों, कृषि विशेषज्ञों, उद्योग जगत और संबंधित पक्षों के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, ताकि सभी के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति तैयार की जा सके।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत तेजी से जैव ईंधन (बायोफ्यूल) के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है और एथेनॉल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करना नहीं, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई गति देना है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि एथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली फसलों से किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस विषय में किसानों की कुछ चिंताएं हैं और सरकार उन्हें पूरी गंभीरता से सुनेगी। उनका कहना था कि किसी भी नीति का उद्देश्य किसानों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं होना चाहिए।
किसानों की चिंताएं
देश के विभिन्न किसान संगठनों ने समय-समय पर एथेनॉल नीति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि खाद्यान्न या अन्य आवश्यक कृषि उत्पादों का अत्यधिक उपयोग एथेनॉल उत्पादन में होने लगे, तो इससे खाद्य सुरक्षा और बाजार कीमतों पर असर पड़ सकता है। कुछ किसान संगठनों का मानना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित न हो।
इसके अलावा किसानों ने यह भी मांग की है कि यदि एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का या अन्य फसलों को बढ़ावा दिया जाता है, तो उनके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), खरीद व्यवस्था और भुगतान प्रणाली को भी मजबूत बनाया जाए। उनका कहना है कि केवल उत्पादन बढ़ाने से किसानों को लाभ नहीं होगा, जब तक उन्हें समय पर उचित मूल्य न मिले।
सरकार का दृष्टिकोण
कृषि मंत्री ने कहा कि Government का उद्देश्य किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में विभिन्न प्रयासों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि एथेनॉल नीति को कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण—तीनों क्षेत्रों के संतुलन को ध्यान में रखकर लागू किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि Government लगातार इस बात की समीक्षा कर रही है कि किन फसलों का उपयोग किस सीमा तक एथेनॉल उत्पादन में किया जाए, ताकि खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित न हो। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों के सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन करने में सरकार को कोई संकोच नहीं होगा।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम
Government पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर उत्पादित जैव ईंधन को बढ़ावा देना है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एथेनॉल उत्पादन का विस्तार वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से किया जाए, तो यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है। खासकर गन्ना और मक्का उत्पादक राज्यों में इसका सकारात्मक आर्थिक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों की राय
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल नीति का दीर्घकालिक लाभ तभी मिलेगा, जब कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। उनका सुझाव है कि सरकार को ऐसी फसलों और कृषि अवशेषों से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना चाहिए, जिनसे खाद्यान्न उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई सुविधाएं और आधुनिक कृषि पद्धतियों की सहायता प्रदान करने से एथेनॉल क्षेत्र का विस्तार अधिक टिकाऊ हो सकता है।
उद्योग जगत की अपेक्षाएं
एथेनॉल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि स्पष्ट और स्थिर नीति से निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि यदि सरकार किसानों और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करती है, तो उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और भारत जैव ईंधन क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा।
Government उद्योग जगत का यह भी कहना है कि नई डिस्टिलरी, भंडारण और परिवहन सुविधाओं में निवेश से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
किसानों के साथ संवाद पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने दोहराया कि सरकार किसानों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगी। उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय में किसानों की भागीदारी आवश्यक है और सरकार उनकी राय को महत्व देती है। उन्होंने सभी किसान संगठनों से रचनात्मक सुझाव देने की अपील की ताकि नीति को और प्रभावी बनाया जा सके।

