Jantar Mantar सीजन 2 जल्द आ रहा है’: अभिजीत दीपके का दावा, बैठक के लिए स्थल नहीं मिलने पर भाजपा के दबाव का आरोप
दिल्ली के Jantar Mantarपर लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद अब कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन के अगले चरण का संकेत दिया है। दीपके ने इसे ‘Jantar Mantarसीजन 2’ का नाम देते हुए कहा है कि नया अभियान जल्द शुरू किया जाएगा। इसी बीच उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में CJP के स्वयंसेवकों की बैठक के लिए तय किए गए स्थल को अंतिम समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया और इसके पीछे उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव का आरोप लगाया है। हालांकि, यह आरोप दीपके और CJP की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
CJP का नाम 2026 में Jantar Mantarपर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। संगठन के नेतृत्व में अभिजीत दीपके और उनकी टीम ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया और कथित NEET अनियमितताओं जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन किया। यह प्रदर्शन कई सप्ताह तक चला और इसके दौरान छात्रों, युवाओं तथा विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी देखने को मिली। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन को चलाने में 12 सदस्यीय स्वयंसेवी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें वकील, पत्रकार, MBA स्नातक, राजनीतिक विज्ञान के छात्र और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े लोग शामिल थे।
37 दिनों के आंदोलन के बाद नए चरण की तैयारी
CJP का पहला बड़ा जंतर-मंतर अभियान करीब 37 दिनों तक चला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा संबंधी शिकायतों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलन के दौरान CJP की गतिविधियां केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहीं और देश के दूसरे हिस्सों में भी इसके समर्थन की चर्चा हुई। Business Standard ने भी इस अभियान के दिल्ली से बाहर फैलने और छात्रों तथा सोशल मीडिया आधारित लामबंदी की भूमिका का उल्लेख किया है।
अब दीपके का ‘सीजन 2’ वाला बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि CJP आंदोलन को नए मुद्दों और नई रणनीति के साथ आगे बढ़ाना चाहती है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस नए चरण को ग्रामीण स्कूलों और शिक्षा की गुणवत्ता से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। CJP की ओर से ‘लिसनिंग टूर’ जैसे अभियान की भी बात सामने आई है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों और अभिभावकों की समस्याएं सुनने तथा उन्हें दस्तावेज के रूप में दर्ज करने पर जोर दिया जाएगा।

बैठक के लिए हॉल नहीं मिलने का दावा
नए घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस बैठक की है, जो दिल्ली में CJP के स्वयंसेवकों के साथ प्रस्तावित थी। रिपोर्टों के अनुसार, बैठक के लिए दिल्ली के नरैना इलाके में एक बैंक्वेट हॉल तय किया गया था, लेकिन कार्यक्रम से पहले स्थल संचालक की ओर से जगह देने से इनकार कर दिया गया। दीपके ने आरोप लगाया कि हॉल मालिकों पर बाहरी दबाव था और इसी वजह से बैठक का आयोजन प्रभावित हुआ।
यही आरोप राजनीतिक बहस को जन्म दे रहा है। यदि किसी संगठन को केवल बैठक आयोजित करने के लिए स्थान उपलब्ध कराने में कठिनाई आती है, तो यह सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव की भूमिका थी। दूसरी ओर, किसी भी आरोप को तथ्य मानने से पहले स्वतंत्र प्रमाण और संबंधित पक्ष का जवाब आवश्यक है। उपलब्ध रिपोर्टों में BJP की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं दिखाई देती।
CJP और सत्ता के बीच बढ़ता टकराव
CJP का आंदोलन शुरुआत से ही तीखे राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा है। संगठन की पहचान उस समय तेजी से बनी जब CJI की अदालत में की गई ‘cockroaches’ और ‘parasites’ संबंधी टिप्पणी के बाद युवाओं और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देखने को मिली। इसके बाद CJP ने इसे व्यापक राजनीतिक-सामाजिक अभियान में बदलने की कोशिश की।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की बड़ी तैनाती रही, लेकिन भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने टकराव से बचने और प्रदर्शन को नियंत्रित तरीके से संभालने पर जोर दिया। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच कई मौकों पर बातचीत भी हुई।
सरकार से बातचीत भी बनी थी बड़ा मुद्दा
जुलाई में आंदोलन के दौरान सरकार और CJP के बीच बातचीत के लिए तटस्थ स्थान की मांग भी सामने आई थी। CJP नेताओं ने कहा था कि वे सरकार के घर या कार्यालय में बैठक करने के बजाय किसी neutral venue पर बातचीत चाहते हैं। एक समय संविधान क्लब में बैठक की बात भी सामने आई थी।
इस पृष्ठभूमि में अब बैठक के लिए निजी स्थल नहीं मिलने का आरोप CJP के लिए केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव के दावे में बदल गया है। दीपके के अनुसार, संगठन पीछे हटने वाला नहीं है और नए अभियान की तैयारी जारी रहेगी।
‘सीजन 2’ में क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘जंतर-मंतर सीजन 2’ का स्वरूप क्या होगा। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, CJP ग्रामीण स्कूलों, शिक्षा की गुणवत्ता और अभिभावकों तथा छात्रों की समस्याओं को अभियान का हिस्सा बना सकती है। संगठन का प्रस्तावित ‘लिसनिंग टूर’ इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
इसका मतलब यह भी हो सकता है कि CJP केवल दिल्ली में धरना देने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को समझने की कोशिश करे। यदि ऐसा होता है, तो संगठन के लिए यह उसके पहले आंदोलन से अलग रणनीति होगी।
पहले चरण में जंतर-मंतर मुख्य केंद्र था, जबकि दूसरे चरण में स्कूल, छात्र, अभिभावक और स्थानीय समुदाय अभियान के केंद्र में आ सकते हैं। इससे CJP को अपने आंदोलन का सामाजिक आधार व्यापक करने का अवसर मिल सकता है।
राजनीतिक असर पर भी नजर
CJP के नए अभियान का राजनीतिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है। पहले आंदोलन के दौरान विपक्षी नेताओं और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने इसे व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बनाया था। हालांकि, CJP स्वयं को किस राजनीतिक दिशा में आगे ले जाएगी, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
आने वाले दिनों में यदि ‘जंतर-मंतर सीजन 2’ की औपचारिक घोषणा होती है और इसके मुद्दे स्पष्ट किए जाते हैं, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने लोग इससे जुड़ते हैं और सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
फिलहाल अभिजीत दीपके का संदेश स्पष्ट है—पहला आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन CJP की राजनीतिक-सामाजिक सक्रियता खत्म नहीं हुई है। बैठक के लिए स्थल नहीं मिलने और कथित दबाव के आरोपों ने नए अभियान की शुरुआत से पहले ही इसे चर्चा में ला दिया है। अब असली परीक्षा यह होगी कि ‘जंतर-मंतर सीजन 2’ केवल घोषणा बनकर रह जाता है या फिर पहले आंदोलन की तरह देशव्यापी बहस और राजनीतिक दबाव का नया केंद्र बनता है।


