Kharge ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के 6 आरोप गिनाए, ‘जनता की अदालत’ में सार्वजनिक महाभियोग के दौरान रखीं 4 मांगें
नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026
देश की चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक विवाद शनिवार को एक नए मोड़ पर पहुंच गया। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह गंभीर आरोप लगाते हुए INDIA ब्लॉक की ओर से सार्वजनिक महाभियोग की प्रतीकात्मक कार्यवाही शुरू की। इस दौरान विपक्षी गठबंधन ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सहित चार प्रमुख मांगें रखीं।
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार ने की। कार्यक्रम में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA ब्लॉक के कई अन्य नेता मौजूद रहे।
विपक्ष ने इस आयोजन को लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा के लिए एक प्रतीकात्मक जन-अदालत के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि, यह संसद या संविधान के तहत होने वाली औपचारिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं थी। यह विपक्ष की ओर से आयोजित राजनीतिक और प्रतीकात्मक कार्यवाही थी।
Kharge ने CEC पर लगाए छह बड़े आरोप
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए। INDIA ब्लॉक की ओर से पेश प्रस्ताव में छह प्रमुख आरोप शामिल किए गए।
1. चुनावों में कथित हेरफेर की साजिश
विपक्ष का पहला आरोप था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कथित तौर पर चुनावों में हेरफेर करने और सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाने की साजिश में भूमिका निभाई। खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित की जा रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता कमजोर हो रही है।
2. 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप
दूसरा और सबसे गंभीर आरोप मतदाता सूचियों से लगभग 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर था। खड़गे ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित किया गया।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम हटाना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। हालांकि, 13.2 करोड़ नाम हटाए जाने और इसके पीछे कथित राजनीतिक मंशा के आरोप विपक्ष के दावे हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
3. संसद की जानकारी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव
तीसरे आरोप में विपक्ष ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में कथित बदलावों पर सवाल उठाए। INDIA ब्लॉक का आरोप है कि संसद की जानकारी और मंजूरी के बिना नियमों में बदलाव किया गया।
विपक्ष के मुताबिक, इन बदलावों से पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। खड़गे ने इसे युवाओं के संवैधानिक मताधिकार के साथ खिलवाड़ बताया।
4. ECINET के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण
चौथे आरोप में निर्वाचन आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET और ERONET के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए।
विपक्ष का दावा है कि मतदाता सूची से संबंधित अधिकारों का अत्यधिक केंद्रीकरण किया जा रहा है। इसके कारण स्थानीय स्तर पर काम करने वाले इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) की भूमिका और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
खड़गे ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के जरिए वैध मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है।
5. दो अन्य चुनाव आयुक्तों को फैसलों से बाहर रखना
पांचवें आरोप में मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निर्वाचन आयोग के अन्य दो आयुक्तों को महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर रखने का आरोप लगाया गया।
विपक्ष का कहना है कि आयोग के भीतर सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था का पालन नहीं किया गया। INDIA ब्लॉक ने दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों पर आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं।
6. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के इशारे पर काम करने का आरोप
छठे आरोप में खड़गे ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं।
विपक्ष ने इसे निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर चुनौती बताया। हालांकि, यह राजनीतिक आरोप है और इसे साबित करने के लिए स्वतंत्र प्रमाण तथा कानूनी जांच आवश्यक होगी।
इन सभी आरोपों का विस्तृत उल्लेख विपक्ष की ओर से पेश प्रस्ताव में किया गया।
Kharge की चार प्रमुख मांगें क्या हैं?
छह आरोपों को सामने रखने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं।
1. ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए: INDIA ब्लॉक ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से हटाने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जिनके खिलाफ चुनावी निष्पक्षता को लेकर गंभीर आरोप हैं, उन्हें इस संवैधानिक पद पर बने नहीं रहना चाहिए।
2. SIR प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए: विपक्ष ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने की मांग की। उसका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना आगे बढ़ना उचित नहीं है।
3. 2023 के कानून में संशोधन किया जाए: खड़गे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित 2023 के कानून में बदलाव की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी सुरक्षा जवाबदेही की व्यवस्था को कमजोर करती है।
4. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह के आरोप में मुकदमा चलाया जाए: खड़गे ने मांग की कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की कानूनी जांच हो और संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाए। उन्होंने इसे देश और संविधान के साथ विश्वासघात से जुड़ा मामला बताया।
मीरा कुमार ने की कार्यवाही की अध्यक्षता
इस प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की रक्षा होना जरूरी है।
मीरा कुमार ने कहा कि यदि किसी एक व्यक्ति को भी मतदान के अधिकार से वंचित किया जाता है तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।
कार्यक्रम में उन नागरिकों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया गया, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए थे। विपक्ष ने कहा कि प्रभावित लोगों की शिकायतों को सुनना और उनका समाधान करना आवश्यक है।
बीजेपी ने विपक्ष के कार्यक्रम पर उठाए सवाल
INDIA ब्लॉक के इस कार्यक्रम पर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी नेताओं ने इसे राजनीतिक दिखावा बताते हुए विपक्ष पर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
बीजेपी प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने इस आयोजन को वास्तविक संसदीय प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक नाटक करार दिया। वहीं, पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली
सार्वजनिक महाभियोग की यह कार्यवाही INDIA ब्लॉक के अगले दिन प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले हुई। विपक्ष ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के तहत रैली आयोजित करने की योजना बनाई है।
राहुल गांधी ने राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।
विपक्ष का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है।
आगे क्या होगा?
इस पूरे घटनाक्रम ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
हालांकि, विपक्ष की ओर से आयोजित सार्वजनिक महाभियोग का प्रस्ताव अपने आप में ज्ञानेश कुमार को पद से नहीं हटा सकता। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी निर्धारित संसदीय प्रक्रिया लागू होती है।
ऐसे में अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या विपक्ष अपने आरोपों को औपचारिक संसदीय और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से आगे बढ़ा पाएगा और निर्वाचन आयोग इन आरोपों पर क्या जवाब देता है।
फिलहाल, INDIA ब्लॉक ने इस मुद्दे को देशव्यापी राजनीतिक अभियान बनाने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है।
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