NEET परीक्षा रद्द होने पर राहुल गांधी का BJP पर हमला: “छात्रों के सपने और परिवारों की कुर्बानियां बर्बाद”
NEET-UG 2024 परीक्षा विवाद ने देशभर के लाखों छात्रों और उनके परिवारों को झकझोर कर रख दिया। पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद परीक्षा के कुछ हिस्सों को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने BJP सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि छात्रों की मेहनत, माता-पिता के कर्ज और वर्षों की कुर्बानियां “भ्रष्ट व्यवस्था” की वजह से बर्बाद हो गईं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि BJP शासन में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता खत्म होती जा रही है।
NEET विवाद: क्या हुआ था?
पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप
मई 2024 में NEET-UG परीक्षा के बाद बिहार और गुजरात समेत कई राज्यों में पेपर लीक की खबरें सामने आईं। छात्रों और अभिभावकों ने दावा किया कि परीक्षा से पहले ही कुछ कोचिंग संस्थानों में सवाल पहुंच गए थे।
जांच के दौरान बिहार में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र बेचने वाले गिरोह और बिचौलियों का खुलासा किया।
इसके बाद परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था National Testing Agency यानी NTA पर सवाल उठने लगे।

छात्रों और परिवारों पर असर
मेहनत और सपनों पर चोट
NEET देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर सालों तैयारी करते हैं।
- कई परिवार बच्चों की कोचिंग के लिए जमीन बेच देते हैं।
- कुछ लोग बैंक से लाखों रुपये का कर्ज लेते हैं।
- छात्र घर छोड़कर कोटा, दिल्ली और पटना जैसे शहरों में रहते हैं।
जब परीक्षा में गड़बड़ी की खबर आई तो छात्रों में गुस्सा और निराशा फैल गई।
राहुल गांधी ने इसी दर्द को उठाते हुए कहा कि “गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की कुर्बानियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं।”
राहुल गांधी का आरोप: “भ्रष्टाचार ने शिक्षा व्यवस्था को खोखला कर दिया”
Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि BJP सरकार के दौरान संस्थाओं की जवाबदेही कमजोर हो गई है।
उनका कहना था कि:
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता नहीं है।
- पेपर लीक माफिया सक्रिय हैं।
- सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा सुरक्षित नहीं रह सकती, तो छात्रों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?

आर्थिक बोझ: परिवारों पर बढ़ता दबाव
NEET की तैयारी बेहद महंगी मानी जाती है।
तैयारी पर होने वाला खर्च
- कोचिंग फीस: 2 से 5 लाख रुपये तक
- हॉस्टल और खाने का खर्च: 50 हजार से 1 लाख रुपये सालाना
- टेस्ट सीरीज और किताबें: हजारों रुपये अतिरिक्त
कई परिवार अपनी बचत खत्म कर देते हैं या सोना गिरवी रखकर बच्चों को पढ़ाते हैं।
परीक्षा दोबारा होने का मतलब:
- फिर से मानसिक दबाव
- अतिरिक्त खर्च
- भविष्य को लेकर अनिश्चितता
सरकार का जवाब
केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
- प्रभावित छात्रों के लिए पुनः परीक्षा
- जांच समिति का गठन
- मामले की जांच CBI को सौंपना
- भविष्य के लिए बायोमेट्रिक और सुरक्षा उपायों पर जोर
BJP नेताओं का कहना है कि यह कुछ लोगों की साजिश थी, पूरे सिस्टम की विफलता नहीं।

राजनीतिक टकराव तेज
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाया।
वहीं BJP ने विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
यह विवाद अब सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि:
- शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता
- सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही
- युवाओं के भविष्य
जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है।
आगे का रास्ता क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए:
- परीक्षा एजेंसियों में पारदर्शिता बढ़ानी होगी
- पेपर लीक के मामलों में त्वरित सजा जरूरी है
- डिजिटल सुरक्षा मजबूत करनी होगी
- छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा
NEET-UG 2024 विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी का आरोप कि “BJP सरकार में भ्रष्टाचार ने छात्रों की मेहनत और परिवारों की कुर्बानियां बर्बाद कर दीं” राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है — क्या देश के युवाओं को निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था मिल पाएगी?
लाखों छात्रों और उनके परिवारों की उम्मीदें इसी जवाब पर टिकी हैं।
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