PM ने बिहार दौरे को रद्द कर दिया, यह समझते हुए कि भाजपा बैंकिपुर उपचुनाव हार जाएगी: तेजस्वी यादव का दावा
पटना, 28 जुलाई: बिहार की राजनीति में बैंकिपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने PM नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित बिहार दौरे को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि PM ने बिहार का दौरा इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि उन्हें यह आभास हो गया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बैंकिपुर विधानसभा उपचुनाव हार सकती है। हालांकि, PM इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा या राज्य सरकार की ओर से इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
तेजस्वी यादव ने पटना में पत्रकारों
PM से बातचीत के दौरान कहा कि PM का बिहार आने का कार्यक्रम था, जहां उन्हें एक पुल का उद्घाटन करना था। उनके अनुसार, छात्र आंदोलनों और राज्य सरकार के प्रति बढ़ती नाराजगी को देखते हुए भाजपा को उपचुनाव में हार की आशंका हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री का प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि बैंकिपुर सीट पर भाजपा की स्थिति कमजोर है और विपक्ष इस चुनाव में बढ़त बना चुका है।
राजद नेता ने यह भी कहा कि बैंकिपुर का उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं है, PM बल्कि यह राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का संकेतक बन गया है। उनके अनुसार, जनता सरकार की नीतियों और हाल के घटनाक्रमों से असंतुष्ट है, जिसका असर मतदान में दिखाई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि विपक्षी दल इस सीट पर जीत दर्ज करेंगे।
हालांकि, भाजपा ने तेजस्वी यादव के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है। समाचार प्रकाशित होने तक भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री के कथित रद्द दौरे को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी सरकार की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि दौरा आधिकारिक रूप से तय था या नहीं।
बैंकिपुर विधानसभा उपचुनाव इस बार कई कारणों से बेहद चर्चित हो गया है।
यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। चुनाव में भाजपा, PM राजद और जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के मैदान में होने से मुकाबला और दिलचस्प बन गया है।
PM चुनाव प्रचार के दौरान सभी प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। PM भाजपा जहां संगठन और सरकार की उपलब्धियों के आधार पर मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, वहीं राजद महंगाई, बेरोजगारी और हाल के छात्र आंदोलनों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है। दूसरी ओर, जन सुराज पार्टी खुद को पारंपरिक राजनीति का विकल्प बताकर मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।
इस उपचुनाव से पहले भाजपा को उम्मीदवार बदलने का फैसला भी करना पड़ा था। पार्टी के पहले घोषित उम्मीदवार ने नामांकन के बाद अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी, जिसके बाद भाजपा ने नया उम्मीदवार मैदान में उतारा। इस घटनाक्रम ने भी चुनावी चर्चा को और तेज कर दिया। विपक्ष ने इसे भाजपा की रणनीतिक कमजोरी बताया, जबकि भाजपा ने उम्मीदवार परिवर्तन को आंतरिक निर्णय और पारिवारिक कारणों से जुड़ा मामला बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैंकिपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा। यदि भाजपा यह सीट बरकरार रखती है तो उसे आगामी राजनीतिक मुकाबलों के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी। वहीं यदि विपक्ष जीत हासिल करता है तो इसे राज्य की राजनीति में बदलते जनमत के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
PM चुनाव प्रचार में डिजिटल माध्यमों का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। सोशल मीडिया अभियान, घर-घर संपर्क और स्थानीय सभाओं के जरिए सभी दल मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। भोजपुरी फिल्म कलाकारों और स्थानीय प्रभावशाली चेहरों की चुनाव प्रचार में भागीदारी ने भी इस चुनाव को अतिरिक्त चर्चा दिलाई है।
PM फिलहाल यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रधानमंत्री के दौरे को रद्द किए जाने और उसके पीछे भाजपा की संभावित हार की आशंका होने का दावा तेजस्वी यादव का राजनीतिक आरोप है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही भाजपा या संबंधित सरकारी एजेंसियों ने इसे स्वीकार किया है। ऐसे में इस बयान को चुनावी बयानबाजी के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।
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