दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर सरकारों द्वारा जनउपकार योजनाएँ
दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर सरकारों द्वारा जनउपकार योजनाएँ घोषित करना एक आम राजनीतिक एवं सामाजिक रणनीति बन गई है। ऐसे तोहफ़े न सिर्फ जनता को सीधी राहत देते हैं, बल्कि सरकार की छवि को लोकचाहे तौर पर मज़बूत करते हैं। यूपी की CM योगी सरकार ने इस बार दिवाली से पहले एक बड़ा ऐलान किया है — प्रदेश की 1.86 करोड़ उज्ज्वला योजना की महिला लाभार्थियों को इस वर्ष दो मुफ्त एलपीजी रिफिल देने का।
यह प्रस्ताव न केवल घरों की रसोई गैस संबंधी खर्च को कम करने का उद्देश्य रखता है, बल्कि स्वच्छ ईंधन उपयोग को बढ़ावा देना, महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुधारना, और राजनीतिक लाभ हासिल करना— ये सब आयामों को भी समेटता है।
उज्ज्वला योजना: पृष्ठभूमि और महत्व
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PM‑UJjwala / PMUY) की शुरुआत मई 2016 में हुई थी। इसका उद्देश्य था:
गरीब व वंचित परिवारों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जो अभी पारंपरिक ईंधन (लकड़ी, गोबर, कोयला आदि) पर निर्भर थे, उन्हें स्वच्छ रसोई ईंधन (एलपीजी) उपलब्ध कराना।
इससे महिलाओं और बच्चों पर धुएँ का असर कम करना, स्वास्थ्य सुधारना, रसोई में समय व श्रम की बचत करना।
ऊर्जा सुरक्षा एवं पर्यावरण के दृष्टिकोण से पारंपरिक ईंधन को छोड़कर स्वच्छ ईंधन की दखल देना।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में उज्ज्वला का क्रियान्वयन एक बड़े चुनौती और अवसर दोनों रहा है। प्रदेश में काफी संख्या में परिवार अब इस योजना से जुड़े हैं और कनेक्शन प्राप्त कर चुके हैं।
लेकिन, कनेक्शन मिलने के बाद रिफिल खर्च, गैस उपलब्धता, आय स्तर, सब्सिडी हस्तांतरण प्रक्रिया, वितरण तंत्र आदि मुद्दे बने रहते हैं। यह वही बिंदु है जहां अब इस दिवाली तोहफ़े प्रस्ताव का महत्व और जटिलताएँ बनती हैं।
दिवाली तोहफ़े का प्रस्ताव: विवरण
घोषणा और योजना
CM योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि उत्तर प्रदेश की 1.86 करोड़ महिलाओं — जो उज्ज्वला योजना की लाभार्थी हैं — उन्हें इस वर्ष दो मुफ्त एलपीजी रिफिल सिलेंडर प्रदान किए जाएंगे।
इस योजना को इस वित्तीय वर्ष 2025‑26 में लागू किया जाना है।
इस प्रस्ताव के लिए राज्य सरकार ने ₹1,500 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है।
वितरण दो चरणों में होगा:
पहला चरण — अक्तूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक। इस चरण में 1.23 करोड़ आधार-प्रमाणित लाभार्थियों को पहले रिफिल का लाभ मिलेगा।
दूसरा चरण — जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक। इससे बाकी पात्र महिलाओं को दूसरा रिफिल उपलब्ध कराया जाएगा।

क्रियान्वयन प्रक्रिया
लाभार्थियों को 14.2 किग्रा (पूर्ण एलपीजी) सिलेंडर खरीदना होगा, और सब्सिडी राशि उनके आधार-लिंक बैंक खाते में 3–4 दिन के अंदर ट्रांसफ़र की जाएगी।
यदि किसी महिला लाभार्थी के पास 5 किलो सिलेंडर कनेक्शन है, अथवा उसके पास केवल एक कनेक्शन है, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगी।
लाभार्थियों की पहचान एवं प्रमाणीकरण के लिए आधार सत्यापन अनिवार्य होगा। ऐसे लाभार्थी जिनका आधार सत्यापन पहले हो चुका है, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।
योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए विभिन्न कदम उठाए जाएंगे, जैसे:
हर जिले में मॉनिटरिंग एवं शिकायत-निवारण तंत्र।
वितरण एजेंसियों (आईओसी, बीपीसीएल, एचपीसीएल) के साथ समन्वय।
विज्ञापन, awareness कैंप, आधार-सक्षमता अभियान।
वज़न-संबंधित निरीक्षण — सुनिश्चित करने के लिए कि सिलेंडर में पूरा गैस हो।
लाभ और अपेक्षित प्रभाव
आर्थिक राहत
एलपीजी रिफिल की लागत आमतौर पर गरीब-नाबालिग परिवारों के लिए एक भारी व्यय होती है। इस मुफ्त रिफिल की घोषणात्मक नीति उन्हें त्योहार के समय (दिवाली) राहत दे सकती है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बजट पर दबाव कम होगा, विशेष रूप से महिलाओं की गतिविधियों (खाना बनाना, बचत आदि) में अधिक सहजता आएगी।
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स्वास्थ्य व पर्यावरण
पारंपरिक ईंधन (लकड़ी, गोबर आदि) जलाने से उत्पन्न धुआँ व वायु प्रदूषण महिलाओं और बच्चों पर सबसे अधिक असर डालते हैं। उज्ज्वला योजना + मुफ्त रिफिल से स्वच्छ ईंधन उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
इससे श्वसन संबंधी बीमारियाँ कम हो सकती हैं, घरेलू रसोई में धुएँ की समस्या घट सकती है।
सामाजिक एवं लैंगिक सशक्तिकरण
यह घोषणा विशेष रूप से महिलाओं को लक्षित है — “माताएँ और बहनें” — जो घर के ईंधन निर्णयों में भूमिका निभाती हैं।
इस कदम से उन्हें यह संदेश मिलेगा कि उनकी आर्थिक एवं सामाजिक भूमिका सरकार की योजनाओं में मान्यता पाती है।
सुरक्षा एवं समय की बचत — क्योंकि उन्हें बार-बार रिफिल के लिए दुकान या स्टोर तक जाना कम करना होगा।
राजनीतिक निहितार्थ
यह एक विशिष्ट लोककल्याणकारी घोषणात्मक रणनीति (welfare announcement) है, जो त्योहारों के समय उपयोगी राहत देकर सरकार और राजनीतिक दलों का जनसामना मजबूत करने का साधन भी हो सकती है।
यूपी जैसे विधानसभा चुनाव को मद्देनज़र रखते हुए, यह कदम महिला मतदाताओं और ग्रामीण-शहरी मध्यम वर्गों पर सकारात्मक प्रभाव डालने का अवसर प्रदान कर सकता है।
यह घोषणात्मक कदम सरकार की लोककल्याण छवि को और अधिक पुष्ट कर सकता है।
चुनौतियाँ और आलोचनाएँ
बजटीय दबाव और वित्तीय व्यवहार्यता
₹1,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है, पर यह राशि पर्याप्त होगी या नहीं — अगर वितरण में खामियां हों और लाभार्थी संख्या बढ़ जाए — यह एक बड़ा दबाव बन सकती है।
निधि की उपलब्धता, जारी करने में देरी, और अन्य वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बीच प्राथमिकताएँ तय करना चुनौती हो सकती है।
वितरण और भ्रष्टाचार
वास्तव में लाभार्थियों को रिफिल मिलने में त्रुटियाँ हो सकती हैं — वितरण एजेंसियों की अक्षमता, गैस कंपनी की आपूर्ति, रोल आउट मुद्दे।
सब्सिडी राशि सीधे बैंक खाते में भेजने की प्रक्रिया में त्रुटियाँ, गड़बड़ी, या लेनदेन में देरी हो सकती है।
आधार सत्यापन की प्रक्रिया में गलत नामांकन, तकनीकी गड़बड़ी या पहचान न हो पाना — जिससे कुछ पात्र महिलाएं वंचित रह जाएँ।
जैसे अन्य सरकारी योजनाओं में शिकायत‑निवारण तंत्र ठीक न होने की स्थितियाँ सामने आई हैं, वैसे ही इस योजना में भी शिकायत समाधान को त्वरित और पारदर्शी रखना होगा।
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लाभार्थी पहचान और पात्रता विवाद
यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन पात्र है — केवल महिलाएँ जिनके पास उज्ज्वला कनेक्शन है या अन्य शर्तें भी (बीपीएल रेखा, आधार प्रमाणन आदि)। कुछ रिपोर्टों में यह शर्त बताई गई है कि लाभार्थियों का नाम BPL सूची में होना चाहिए।
जो महिलाएं योजना में नामांकित हैं, पर आधार सत्यापन नहीं हुई है — वे कैसे लाभ ले सकेंगी? इस तरह की लाभवंचिताओं की संभावना बनी रहती है।
महिलाओं के कनेक्शन की संख्या — कुछ परिवारों में एक से अधिक कनेक्शन हो सकते हैं या 5 किग्रा कनेक्शन हो — इन मामलों में नीति की स्पष्टता चाहिए।
दीर्घकालीन स्थिरता
यह एक त्योहार आधारित राहत कार्यक्रम है — वर्ष में सिर्फ दो रिफिल मुफ्त देना — क्या यह दीर्घकालीन समस्या समाधान कर पायेगा?
अगर गैस कनेक्शन की संख्या बढ़े, रिफिल लागत बढ़े, तो इस योजना को स्थिर रूप से जारी रखना चुनौती हो सकती है।
अन्य राजनैतिक दल या विपक्ष इस पर यह तर्क दे सकते हैं कि यह “वायदा घोषणाएँ” हैं और वास्तविक अमल में कम ही दिखेंगी।
अन्य उदाहरण और तुलनाएँ
इस तरह की मुफ्त गैस रिफिल घोषणाएँ पहले भी होली और दिवाली पर यूपी सरकार ने की हैं। मार्च 2025 में श्री योगी ने होली पर 1.86 करोड़ परिवारों को मुफ्त गैस रिफिल देने की घोषणा की थी।
तब राज्य ने ₹1,890 करोड़ राशि जारी की थी।
यह कदम इस दिवाली की घोषणा का पूर्वावलोकन भी माना जा सकता है — कि सरकार ने पहले भी ऐसे “त्योहार उपहार” देने की रणनीति अपनाई है।
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सुझाव
CM सरकार का यह दिवाली तोहफ़ा — 1.86 करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला योजना के अंतर्गत दो मुफ्त एलपीजी रिफिल देना — एक महत्वाकांक्षी और दूरगामी राजनीतिक-सामाजिक कदम है। इसका उद्देश्य आर्थिक राहत देना, स्वच्छ ईंधन उपयोग को बढ़ावा देना, महिलाओं को सशक्त करना और सरकार की जनसामना लोकप्रियता को बढ़ाना है।
लेकिन, इस योजना की सफलता इसके क्रियान्वयन, पारदर्शिता, लाभार्थी पहचान, वित्तीय प्रबंधन, और निरंतरता पर निर्भर करेगी। संस्था तंत्रों को सुनिश्चित करना होगा कि:
कोई पात्र महिला वंचित न रह जाए।
सब्सिडी राशि समय पर और सही हिस्से में लाभार्थी के खाते में पहुंचे।
वितरण एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो।
शिकायत निवारण तंत्र त्वरित, पारदर्शी और सुचारु हो।
भविष्य की लागत वृद्धि व योजना विस्तार को ध्यान में रखते हुए बजट की योजना बनाई जाए।
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