Delhi कालकाजी अपार्टमेंट ट्रिपल डेथ: बेदखली नोटिस देने पहुँचे मकान मालिक को महिला और दो बेटों के शव मिले – पूरी कहानी
कल्पना कीजिए, एक साधारण बेदखली नोटिस देने के लिए दरवाज़ा खटखटाना और भीतर एक दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आ जाना। Delhi के व्यस्त कालकाजी इलाके में हुई इस तीन लोगों की रहस्यमयी मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक मकान मालिक को किराया न चुकाने पर नोटिस देने के दौरान एक महिला और उसके दो नाबालिग बेटों के शव मिले। यह घटना दिल्ली में किराया, आवास और मानसिक तनाव से जुड़ी गंभीर सच्चाइयों को उजागर करती है।
चौंकाने वाली घटना की शुरुआत: कालकाजी में क्या हुआ?
दक्षिण Delhi की शांत गलियों में यह खोज किसी सदमे से कम नहीं थी।
दिसंबर 2025 की एक ठंडी सुबह, कालकाजी मंदिर इलाके की एक पुरानी इमारत में मकान मालिक किराया बकाया होने के कारण नोटिस देने पहुँचा। लेकिन जैसे ही दरवाज़ा खोला गया, वह पल एक भयावह दुःस्वप्न में बदल गया।
घटना स्थल और शुरुआती जानकारी
यह फ्लैट कालकाजी मंदिर के पास स्थित एक भीड़भाड़ वाले इलाके में था, जहाँ कम आय वाले परिवार रहते हैं।
सुबह करीब 10 बजे पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुँचते ही पुलिस ने इलाका सील कर दिया। शुरुआती जांच में पारिवारिक तनाव के कारण सामूहिक आत्महत्या की आशंका जताई गई।
पुलिस को संदेह है कि परिवार कई दिनों से घर के अंदर बंद था। पड़ोसियों ने किसी तरह की आवाज़ नहीं सुनी थी, जिससे शक और गहरा गया।
मृतकों की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि
मृत महिला की पहचान मीरा शर्मा (38 वर्ष) के रूप में हुई, जो अकेली माँ थीं और छोटे-मोटे काम करके अपने बच्चों का पालन-पोषण करती थीं।
उनके दो बेटे:
रवि (12 वर्ष)
अमित (10 वर्ष)
दोनों पास के एक सरकारी स्कूल में पढ़ते थे।
मीरा के पति की मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी थी, जिसके बाद वह अकेले ही बच्चों की परवरिश कर रही थीं। तीनों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव था।

बेदखली नोटिस का संदर्भ
मकान मालिक ने कई महीनों से किराया न मिलने के कारण नोटिस जारी किया था।
Delhi में यह एक आम समस्या बनती जा रही है, जहाँ बढ़ते किराए और कम आमदनी के कारण परिवार दबाव में आ जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात कई बार लोगों को चरम कदम उठाने के लिए मजबूर कर देते हैं। सवाल यही है — क्या यह नोटिस आखिरी मानसिक झटका साबित हुआ?
जांच का दायरा: पुलिस और फॉरेंसिक सबूत
Delhi पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गहन जांच शुरू की।
मौके से मिले सुराग
कमरे में खाली दवा की शीशियाँ मिलीं
कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ
एक डायरी मिली, जिसमें आर्थिक तंगी के संकेत थे
घर में किसी तरह की तोड़फोड़ या संघर्ष के निशान नहीं थे
पड़ोसियों ने बताया कि मीरा को कुछ दिन पहले दवाइयाँ खरीदते देखा गया था।
पोस्टमार्टम और मौत का संभावित कारण
अगले दिन तीनों शवों का AIIMS में पोस्टमार्टम किया गया।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार:
मौत ज़हर/दवाइयों के ओवरडोज़ से हुई
किसी तरह की हिंसा या संघर्ष के संकेत नहीं
तीनों की मौत कुछ घंटों के अंतराल में हुई
फुल टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट के बाद अंतिम निष्कर्ष आएगा।

मकान मालिक की भूमिका और बयान
मकान मालिक राजेश कुमार (55 वर्ष) ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कभी धमकी नहीं दी।
उनका कहना है कि कई बार दरवाज़ा खटखटाने के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला, तब उन्होंने दरवाज़ा खोला।
फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस पुराने विवादों और कानूनी प्रक्रिया की जाँच कर रही है।
तनाव की जड़ें: आर्थिक और सामाजिक दबाव
किराए को लेकर विवाद का इतिहास
मीरा और मकान मालिक के बीच पिछले छह महीनों से विवाद चल रहा था।
मीरा ने कई बार समय माँगा, क्योंकि उनकी आमदनी अनियमित थी। नोटिस से पहले कई चेतावनियाँ दी जा चुकी थीं।
परिवार की आर्थिक स्थिति
सिलाई और छोटे काम से गुज़ारा
बच्चों की मेडिकल ज़रूरतों से कर्ज
कई बार खाना छोड़कर किराया चुकाने की कोशिश
2025 में बढ़ती महंगाई ने हालात और बिगाड़ दिए।
मानसिक स्वास्थ्य पहलू
हालाँकि घरेलू हिंसा की कोई पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मानसिक तनाव साफ दिखता है।
मीरा ने एक बार मुफ़्त काउंसलिंग सेंटर से संपर्क किया था।
बच्चों में भी चिंता के लक्षण देखे गए थे।
कम आय वाले इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इस त्रासदी को और गहरा बनाती है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: भारत में किराएदार संकट
भारत के बेदखली कानून
मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021
Delhi में कम से कम 30 दिन का नोटिस ज़रूरी
बिना अदालत की अनुमति ज़बरदस्ती बेदखली अवैध
कानून मौजूद हैं, लेकिन ज़मीनी अमल कमजोर है।

बढ़ता आर्थिक दबाव – आंकड़े
2025 में शहरी किराया 15% तक बढ़ा
Delhi के 40% परिवार अपनी आधी आय किराए में देते हैं
2024 में हर 5 में से 1 किराएदार को बेदखली नोटिस मिला
संकट में कानूनी मदद कैसे लें
स्थानीय टेनेंट यूनियन से संपर्क
रेंट कंट्रोल ऑफिस में शिकायत
जिला अदालतों में निःशुल्क कानूनी सहायता
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे MyAdalat
समय पर कदम ज़िंदगी बचा सकता है।
सामुदायिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
पड़ोसियों की प्रतिक्रिया
इलाके में डर और सन्नाटा है।
लोगों को अफ़सोस है कि उन्होंने कुछ संकेत नहीं पहचाने।
CCTV और सुरक्षा बढ़ाने की माँग उठी है।
विशेषज्ञों की राय
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं:
“अलग-थलग पड़ना, चुप्पी और निराशा – ये संकेत गंभीर होते हैं।”
हेल्पलाइन 104 जैसी सेवाएँ 24×7 उपलब्ध हैं।

आगे का रास्ता
कालकाजी अपार्टमेंट की यह तीन मौतों की त्रासदी केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि हमारे शहरी समाज की सच्चाई है।
जांच की मौजूदा स्थिति
फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतज़ार
आत्महत्या पुष्टि होने पर केस बंद हो सकता है
बेदखली प्रक्रिया की अलग जाँच जारी
सीख: विवादों का शांतिपूर्ण समाधान
किराया विवाद में संवाद और मध्यस्थता ज़रूरी
मानसिक तनाव को नज़रअंदाज़ न करें
पड़ोसियों और समुदाय की भूमिका अहम
अगर समय पर मदद मिल जाती, शायद यह कहानी अलग होती।
Jefferies की रिपोर्ट में पुतिन की भारत यात्रा का विश्लेषण किया गया है: दिल्ली रूस के पक्ष में नहीं हो सकती है।
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