ममता बनर्जी का कड़ा जवाब: राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद और राजनीति का टकराव
पश्चिम बंगाल की राजधानी Kolkata में राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। इस विवाद के केंद्र में हैं भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee।
राष्ट्रपति भवन की ओर से यात्रा के दौरान कुछ प्रोटोकॉल कमियों की ओर इशारा किया गया, जिसके बाद ममता बनर्जी ने BJP पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है।
विवाद की शुरुआत: कथित प्रोटोकॉल चूक
मार्च 2026 की शुरुआत में राष्ट्रपति Droupadi Murmu तीन दिन के कार्यक्रम के लिए Kolkata पहुँची थीं।
राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के अनुसार कुछ प्रमुख प्रोटोकॉल कमियाँ सामने आईं:
एयरपोर्ट पर पूरा गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया गया
सुरक्षा जिम्मेदारी के हस्तांतरण में देरी हुई
स्थानीय अधिकारियों को कार्यक्रम की पूरी जानकारी समय पर नहीं दी गई
हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि खराब मौसम और आखिरी समय में कार्यक्रम में बदलाव के कारण ये गड़बड़ियाँ हुईं।

शुरुआती प्रतिक्रियाएँ और मीडिया चर्चा
इस घटना के सामने आते ही कई मीडिया चैनलों और राजनीतिक नेताओं ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया।
कुछ रिपोर्टों में इसे “राष्ट्रीय गरिमा से जुड़ा मामला” बताया गया
सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर काफी बहस हुई
राज्यपाल भवन यानी Raj Bhavan Kolkata से भी कुछ संकेत मिले कि प्रोटोकॉल में कमियाँ हुई थीं
इसी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
ममता बनर्जी का जवाब: “राजनीति मत कीजिए”
मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में BJP पर सीधा हमला बोला।
उनके प्रमुख बयान:
“BJP की सलाह पर राजनीति मत कीजिए।”
“हमने राष्ट्रपति का पूरा सम्मान किया।”
“मौसम और कार्यक्रम में बदलाव के कारण कुछ तकनीकी समस्याएँ हुईं।”
उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन ने राष्ट्रपति के स्वागत के लिए पूरी तैयारी की थी और इसे जानबूझकर हुई गलती बताना गलत है।

राज्यपाल और केंद्र–राज्य तनाव
इस पूरे विवाद में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल C. V. Ananda Bose का नाम भी चर्चा में आया।
राज्यपाल ने प्रोटोकॉल कमियों पर चिंता जताई, जबकि ममता बनर्जी का आरोप है कि:
राज्यपाल अक्सर केंद्र सरकार की लाइन पर बोलते हैं
इससे राज्य और केंद्र के बीच टकराव बढ़ता है
पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों से राज्य सरकार और केंद्र के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखा गया है।
BJP की राजनीतिक रणनीति
BJP यानी Bharatiya Janata Party ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला किया।
विपक्ष के नेताओं का कहना है:
यह संवैधानिक पद का अपमान है
इससे राज्य प्रशासन की कमज़ोरी सामने आती है
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने भी टीएमसी सरकार की आलोचना की।

संघीय व्यवस्था पर असर
यह विवाद केवल प्रोटोकॉल का मुद्दा नहीं बल्कि भारत की संघीय व्यवस्था से भी जुड़ा है।
Trinamool Congress की नेता ममता बनर्जी का कहना है कि:
राज्य सरकारों को स्वायत्तता का सम्मान मिलना चाहिए
केंद्र सरकार को हर मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए
इस तरह यह मुद्दा केंद्र बनाम राज्य राजनीति की बहस को भी तेज कर रहा है।
पहले भी हुए हैं ऐसे विवाद
भारत में पहले भी वीवीआईपी यात्राओं के दौरान छोटे-मोटे प्रोटोकॉल विवाद सामने आए हैं, लेकिन बहुत कम मामलों में उन्हें इतना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार:
ऐसे मामलों में प्रशासनिक समन्वय बेहद जरूरी होता है
छोटी गलती भी राजनीतिक विवाद का कारण बन सकती है
राष्ट्रपति यात्रा के दौरान कथित प्रोटोकॉल चूक से शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक टकराव में बदल गया है।
मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इसे भाजपा की राजनीति बताया, जबकि Bharatiya Janata Party राज्य सरकार की आलोचना कर रही है।
यह घटना दिखाती है कि भारत की राजनीति में प्रोटोकॉल और सम्मान जैसे मुद्दे भी बड़े राजनीतिक संघर्ष का कारण बन सकते हैं।
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