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CJI सूर्या कांत ने युवाओं को न्याय का भरोसा दिलाया, कहा– सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे दिन के 24 घंटे खुले हैं

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI ) न्यायमूर्ति सूर्या कांत ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए न्यायपालिका की भूमिका, संविधान की गरिमा और नागरिकों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे देश के प्रत्येक नागरिक के लिए 24 घंटे खुले हैं, विशेष रूप से तब जब किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर संकट हो या तत्काल न्याय की आवश्यकता हो।

उन्होंने युवाओं से संविधान पर विश्वास बनाए रखने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान रखने का आह्वान करते हुए कहा कि न्यायपालिका प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखने की अपील

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति सूर्या कांत ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और न्याय की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि न्यायालय केवल विवादों के समाधान का मंच नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की स्वतंत्रता और अधिकारों का सबसे मजबूत संरक्षक भी है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है या किसी नागरिक को तत्काल न्याय की आवश्यकता होती है, तो सर्वोच्च न्यायालय हर समय उसकी सहायता के लिए तैयार रहता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायालय की जिम्मेदारी केवल कानूनी विवादों का निपटारा करना नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना की रक्षा करना भी है।

CJI Surya Kant told HT that the Supreme Court would hear grievances in accordance with the law and judicial procedure and make every effort to secure justice wherever warranted.

युवाओं को संविधान पढ़ने की सलाह

मुख्य न्यायाधीश ने युवाओं से संविधान को केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र के मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता तभी संभव है जब युवा अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें।

उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से मजबूत होती है। इसलिए युवाओं को संविधान, कानून और न्यायिक व्यवस्था के बारे में जागरूक होना चाहिए।

“24 घंटे खुले हैं सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे”

न्यायमूर्ति सूर्या कांत का यह बयान विशेष रूप से चर्चा में रहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे 24 घंटे खुले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह है कि यदि किसी नागरिक की स्वतंत्रता, जीवन या मौलिक अधिकारों पर तत्काल खतरा हो, तो न्यायपालिका आवश्यक होने पर अवकाश या रात के समय भी सुनवाई कर सकती है।

भारत में कई अवसरों पर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने देर रात या छुट्टियों के दौरान भी महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की है। ऐसे मामलों में न्यायालय ने यह संदेश दिया है कि न्याय केवल नियमित कार्यालय समय तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय उपलब्ध कराया जा सकता है।

न्याय तक आसान पहुंच पर जोर

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका लगातार इस दिशा में काम कर रही है कि आम नागरिकों को शीघ्र और सुलभ न्याय मिल सके। उन्होंने डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि ई-कोर्ट, वर्चुअल सुनवाई और ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं ने लोगों की पहुंच को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया है।

उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों के लोग भी न्यायिक प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं। इससे न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता सबसे बड़ी ताकत

न्यायमूर्ति सूर्या कांत ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका की सबसे बड़ी शक्ति उसकी स्वतंत्रता है। संविधान ने न्यायपालिका को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अधिकार दिया है ताकि प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के न्याय मिल सके।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का दायित्व केवल कानून की व्याख्या करना नहीं, बल्कि संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा करना भी है। इसी कारण न्यायपालिका लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक मानी जाती है।

CJI Surya Kant told HT that the Supreme Court would hear grievances in accordance with the law and judicial procedure and make every effort to secure justice wherever warranted.

युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी सबसे बड़ी ताकत युवा आबादी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे कानून का सम्मान करें, सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि यदि युवा संवैधानिक मूल्यों को अपनाते हैं तो भारत का लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने शिक्षा, जागरूकता और नैतिक मूल्यों को न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला बताया।

न्याय व्यवस्था में सुधार जारी

उन्होंने कहा कि लंबित मामलों की संख्या कम करने, न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज बनाने और न्याय तक पहुंच आसान करने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। नई तकनीकों के उपयोग और न्यायिक प्रशासन में सुधार से आम लोगों को लाभ मिल रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में न्यायपालिका और अधिक आधुनिक, पारदर्शी तथा नागरिक-केंद्रित बनेगी।

लोकतंत्र में न्यायपालिका की अहम भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका नागरिक अधिकारों की रक्षा करने वाली अंतिम संस्था है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत नागरिक सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं यदि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। इसी कारण सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक भी कहा जाता है।

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