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Delhi हाईकोर्ट ने विजाग एयरपोर्ट बंद करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

नई दिल्ली: Delhi हाईकोर्ट ने विशाखापत्तनम यानी विजाग एयरपोर्ट से वाणिज्यिक उड़ानें बंद किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए, क्योंकि कथित रूप से इस फैसले का प्रत्यक्ष प्रभाव विशाखापत्तनम के लोगों पर पड़ रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका को ‘forum non conveniens’ के आधार पर खारिज किया। इसका अर्थ broadly यह है कि अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए किसी अन्य अधिक उपयुक्त न्यायिक मंच को उचित माना। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में कारण-ए-कार्रवाई का बड़ा हिस्सा किसी दूसरे राज्य या क्षेत्र से जुड़ा है, तो संबंधित क्षेत्र का हाईकोर्ट उस विवाद की सुनवाई के लिए अधिक उपयुक्त मंच हो सकता है।

क्या है पूरा मामला?

Delhi  विशाखापत्तनम के पुराने एयरपोर्ट से निर्धारित वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं 16 अगस्त 2026 को समाप्त हो गईं। आखिरी उड़ान के रूप में इंडिगो की दिल्ली जाने वाली फ्लाइट 6E 2018 ने रात करीब 10:45 बजे उड़ान भरी। इसके बाद विशाखापत्तनम की नियमित वाणिज्यिक हवाई सेवाओं को नए Alluri Sitarama Raju International Airport, Bhogapuram की ओर स्थानांतरित कर दिया गया।

केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 28 जुलाई को कहा था कि विशाखापत्तनम एयरपोर्ट से निर्धारित वाणिज्यिक उड़ान संचालन 16 अगस्त के बाद 30 वर्षों की अवधि के लिए बंद रहेगा। 17 अगस्त से ‘VTZ’ IATA एयरपोर्ट कोड भी नए भोगापुरम एयरपोर्ट को स्थानांतरित कर दिया गया।

इस फैसले को लेकर याचिकाकर्ता गोपाला कृष्ण कोसराजू ने जनहित याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि भोगापुरम में अत्याधुनिक एयरपोर्ट का निर्माण स्वागत योग्य है, लेकिन इसके लिए मौजूदा और पूरी तरह कार्यरत एयरपोर्ट पर 30 साल का पूर्ण परिचालन प्रतिबंध लगाना मनमाना और अनुचित है।

याचिकाकर्ता की क्या दलील थी?

याचिकाकर्ता की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दलील दी गई कि विशाखापत्तनम में पहले से मौजूद एयरपोर्ट को बंद करने के बजाय दोनों एयरपोर्ट को समानांतर रूप से संचालित किया जा सकता था। याचिकाकर्ता के अनुसार, नए एयरपोर्ट पर सभी वाणिज्यिक गतिविधियों को स्थानांतरित करने का फैसला शहर के यात्रियों के लिए असुविधा पैदा कर सकता है।

Delhi  याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि नया एयरपोर्ट विशाखापत्तनम शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है और वहां पहुंचने में करीब दो घंटे तक लग सकते हैं। इसलिए पुराने एयरपोर्ट को बंद करने का असर स्थानीय आबादी पर पड़ेगा।

वकील ने यह तर्क भी दिया कि चूंकि एयरपोर्ट बंद करने से संबंधित निर्णय दिल्ली में केंद्र सरकार के स्तर पर लिया गया, इसलिए दिल्ली हाईकोर्ट को मामले की सुनवाई करनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाना चाहिए।

अदालत ने क्या कहा?

Delhi हाईकोर्ट की पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने पूछा कि ऐसा कौन-सा आदेश है जिसका प्रभाव सीधे Delhi के लोगों पर पड़ रहा है। पीठ ने कहा कि जहां कारण-ए-कार्रवाई का कुछ हिस्सा दो अलग-अलग हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में आता है, वहां यह देखना होगा कि विवाद का प्रमुख हिस्सा कहां स्थित है।

अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में मुख्य कारण-ए-कार्रवाई विशाखापत्तनम में है, क्योंकि एयरपोर्ट बंद होने से प्रभावित होने वाले लोग वहीं हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि “सuffering was of people of Visakhapatnam, not Delhi” और याचिकाकर्ता को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

पीठ ने यह भी ध्यान में रखा कि एयरपोर्ट बंद किए जाने के मुद्दे पर पहले से ही आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लंबित है। ऐसे में उसी अदालत के समक्ष मामले को आगे बढ़ाना अधिक उचित माना गया।

फैसले का मतलब क्या है?

Delhi हाईकोर्ट का यह आदेश एयरपोर्ट बंद करने के फैसले को सही या गलत घोषित करने वाला फैसला नहीं है। अदालत ने मूल विवाद के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी। याचिका को मुख्य रूप से उपयुक्त न्यायिक मंच के सवाल पर खारिज किया गया है।

इसका मतलब यह है कि याचिकाकर्ता अभी भी आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के सामने अपनी आपत्तियां और कानूनी दलीलें रख सकता है। वहां अदालत यह जांच सकती है कि पुराने विशाखापत्तनम एयरपोर्ट को बंद करने का निर्णय कानूनी प्रक्रिया, सार्वजनिक हित और प्रशासनिक निर्णय लेने के स्थापित मानकों के अनुरूप है या नहीं।

यात्रियों के लिए क्या बदला?

पुराने विशाखापत्तनम एयरपोर्ट से नियमित वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन समाप्त होने के बाद यात्रियों को अब भोगापुरम स्थित नए एयरपोर्ट का इस्तेमाल करना होगा। नए एयरपोर्ट के शुरू होने को आंध्र प्रदेश के विमानन ढांचे के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

हालांकि, पुराने एयरपोर्ट को शहर के अपेक्षाकृत करीब होने के कारण बंद किए जाने से जुड़ी चिंताएं भी सामने आई हैं। खासकर शहर के निवासियों, कारोबारियों और नियमित हवाई यात्रियों के लिए नए एयरपोर्ट तक पहुंच, यात्रा समय और परिवहन सुविधाएं महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे।

आगे क्या?

Delhi हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस विवाद का कानूनी केंद्र आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट बन सकता है। चूंकि वहां एयरपोर्ट बंद करने के मुद्दे पर पहले से PIL लंबित है, इसलिए आने वाले समय में इस मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक सुनवाई हो सकती है।

फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने इतना स्पष्ट कर दिया है कि विशाखापत्तनम एयरपोर्ट बंद होने से संबंधित मुख्य विवाद का उचित मंच आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट है। एयरपोर्ट को 30 वर्षों तक वाणिज्यिक उड़ानों के लिए बंद रखने के फैसले की वैधता और सा

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