Piyush Goyal, 7.8% GDP वृद्धि पर घमासान: पीयूष गोयल ने सुभाष चंद्र गर्ग पर साधा निशाना, आलोचकों को बताया ‘नौकरीविहीन’
नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की GDP वृद्धि ने जहां सरकार को उत्साहित किया है, वहीं इसके आंकड़ों की विश्वसनीयता और रोजगार पर बहस भी तेज हो गई है। इसी बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं और पूर्व नौकरशाहों पर तीखा हमला बोला है। गोयल ने आलोचकों को ‘नकारात्मक सोच’ वाला बताते हुए कहा कि कुछ लोग टेलीविजन चैनलों पर बैठकर अर्थव्यवस्था के बारे में ऐसे तर्क पेश कर रहे हैं, जिनसे देश का मनोबल कमजोर होता है।
यह विवाद खास तौर पर पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की टिप्पणियों के बाद बढ़ा। गर्ग ने 7.8 प्रतिशत की headline GDP growth को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आंकड़ों को नए GDP series और बदले हुए base year के संदर्भ में देखना जरूरी है। उनके अनुसार, मौजूदा कीमतों पर पिछले वर्ष की GDP के आंकड़े में बदलाव हुआ है और यदि पुराने आंकड़े को आधार बनाया जाए तो तस्वीर काफी अलग दिखाई दे सकती है।
गोयल ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आलोचक पुरानी और नई GDP series के आंकड़ों की तुलना कर रहे हैं, जबकि दोनों को सीधे-सीधे मिलाकर देखना उचित नहीं है। उन्होंने ‘apples with apples’ की तुलना करने की बात कही और जोर दिया कि GDP की नई श्रृंखला में base year बदल चुका है। उनके अनुसार, इसी वजह से पुराने और नए series के आंकड़ों को मिलाकर वृद्धि दर पर सवाल उठाना भ्रामक हो सकता है।
Piyush Goyal सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने भी इसी विवाद के बीच छह बिंदुओं में स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि जिस ₹86.05 लाख करोड़ के आंकड़े को पुराने GDP आंकड़े के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, वह 2011-12 base year वाली पुरानी series से संबंधित है। इसे 2022-23 base year वाली नई series के आंकड़ों से सीधे तुलना करना सांख्यिकीय रूप से सही नहीं है। मंत्रालय ने इस आधार पर उस दावे को खारिज किया कि पिछले वर्ष की GDP को जानबूझकर कम दिखाकर 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर तैयार की गई
GDP विवाद में रोजगार का मुद्दा भी प्रमुख बन गया है। आलोचकों का सवाल है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी तेज गति से बढ़ रही है, तो इसका लाभ पर्याप्त संख्या में अच्छे और स्थायी रोजगार के रूप में क्यों दिखाई नहीं दे रहा। पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने भी GDP आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वृद्धि इतनी तेज है तो अधिक और बेहतर नौकरियां क्यों नहीं बन रही हैं तथा निजी निवेश में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं दिखाई दे रही
इसी सवाल के जवाब में गोयल ने आलोचकों पर तीखा व्यक्तिगत हमला किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह पूछकर कि ‘नौकरियां कहां हैं’, आंकड़ों में खामियां तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। गोयल ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि आलोचकों के पास शायद टेलीविजन पैनल पर बैठना ही बचा हुआ काम है। उन्होंने ऐसे लोगों को ‘jobless’ बताते हुए आरोप लगाया कि वे अर्थव्यवस्था की उपलब्धियों को स्वीकार करने के बजाय नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
गोयल ने 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि को देश के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार या मंत्री GDP के आंकड़े तैयार नहीं करते और आंकड़ों में सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता। उनके मुताबिक, भारत ने वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भी मजबूत प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय देश के करोड़ों लोगों की मेहनत और सरकार की नीतियों को दिया।
Piyush Goyal पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि बाजार की उम्मीदों से बेहतर रही और RBI के लगभग 7 प्रतिशत के अनुमान से भी ऊपर रही। घरेलू मांग, विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्र को आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख आधारों में गिना गया है।
हालांकि, मजबूत GDP growth के बावजूद रोजगार और निजी निवेश से जुड़े सवाल पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अर्थशास्त्रियों के बीच यह बहस जारी है कि headline growth को व्यापक आर्थिक सुधार में कैसे बदला जाए। केवल GDP की तेज वृद्धि पर्याप्त नहीं मानी जाती; रोजगार सृजन, उत्पादकता, निजी निवेश, निर्यात और आम परिवारों की आय में वृद्धि भी आर्थिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
राजनीतिक स्तर पर यह विवाद सरकार और विपक्ष के बीच आर्थिक नैरेटिव की लड़ाई में बदलता दिखाई दे रहा है। विपक्ष GDP आंकड़ों को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार इसे भारत की आर्थिक मजबूती का प्रमाण बता रही है। गोयल ने विपक्ष पर भारत को ‘dead economy’ के रूप में पेश करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी नकारात्मक सोच देश की उपलब्धियों को कमतर आंकती है।
फिलहाल, 7.8 प्रतिशत की GDP वृद्धि के आंकड़े आधिकारिक रूप से मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का संकेत देते हैं, लेकिन इन आंकड़ों की व्याख्या और उससे मिलने वाले वास्तविक आर्थिक लाभ को लेकर बहस जारी रहना तय है। सरकार के लिए चुनौती अब केवल तेज GDP growth बनाए रखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होगी कि आर्थिक विस्तार का असर रोजगार, आय और निजी निवेश पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे। दूसरी ओर, आलोचकों के लिए भी आंकड़ों की समीक्षा करते समय नई और पुरानी GDP series के बीच सांख्यिकीय अंतर को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
इस पूरे विवाद से इतना स्पष्ट है कि भारत की आर्थिक कहानी अब केवल विकास दर के एक आंकड़े तक सीमित नहीं है। 7.8 प्रतिशत की वृद्धि सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ रोजगार की गुणवत्ता, निवेश और आम लोगों की आर्थिक स्थिति जैसे सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में नाम सुभाष चंद्र गर्ग (Subhash Chandra Garg) है; आपके शीर्षक में “सबाश गर्ग” लिखा गया था, इसलिए मैंने कॉपी में सही नाम का इस्तेमाल किया है।

