Mahanadi

Mahanadi जल विवाद जल्द सुलझने की संभावना: छत्तीसगढ़ CM

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद को लेकर हाल के दिनों में समाधान की उम्मीद बढ़ी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 20 सितंबर 2026 को कहा कि दोनों राज्यों के बीच महानदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा बहुत जल्द सुलझने की संभावना है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों राज्यों के तकनीकी अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है और महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण की अगली सुनवाई 28 सितंबर को प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान

ओडिशा की दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भुवनेश्वर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अब महानदी के पानी के वितरण को लेकर विवाद नहीं रहना चाहिए और मामला जल्द सुलझाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों राज्य केंद्रीय जल आयोग (CWC) के निर्णय का पालन करने पर पहले ही सहमत हो चुके हैं।

साय के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियां बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के लिए अनुकूल हैं। उन्होंने केंद्र और दोनों राज्यों में एक ही राजनीतिक गठबंधन की सरकार होने का उल्लेख भी किया। यह उनका राजनीतिक आकलन है; वास्तविक समाधान के लिए जल बंटवारे की तकनीकी और कानूनी शर्तों पर सहमति आवश्यक होगी।

मुख्यमंत्री का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महानदी विवाद एक दशक से अधिक समय से दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बना हुआ है।

He said the matter, which was earlier being heard by the Mahanadi Water Disputes Tribunal, has now been referred to the Central Water Commission (CWC).

ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद की पृष्ठभूमि

महानदी दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण नदी है। इसका पानी कृषि, पेयजल, उद्योग और बिजली उत्पादन सहित कई आवश्यकताओं के लिए इस्तेमाल होता है। विवाद मुख्य रूप से महानदी के ऊपरी हिस्से में छत्तीसगढ़ द्वारा बनाए गए बैराजों और अन्य जल संरचनाओं तथा ओडिशा में नदी के प्रवाह को लेकर रहा है।

ओडिशा का पक्ष रहा है कि छत्तीसगढ़ में ऊपरी हिस्से में विभिन्न परियोजनाओं के कारण राज्य में महानदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ का कहना रहा है कि वह नदी के अपने हिस्से के पानी का वैध उपयोग कर रहा है और ओडिशा उपलब्ध जल संसाधनों का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं कर रहा है। दोनों राज्यों के इन अलग-अलग दृष्टिकोणों के कारण विवाद लंबे समय तक जारी रहा।

न्यायाधिकरण की भूमिका

विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था। यह कदम ओडिशा द्वारा दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने के बाद उठाया गया था। ओडिशा ने छत्तीसगढ़ में नदी के ऊपरी हिस्से में चल रही परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताई थी।

न्यायाधिकरण की कार्यवाही के समानांतर अब दोनों राज्यों के बीच बातचीत का रास्ता भी खुला है। अप्रैल 2026 में केंद्र ने न्यायाधिकरण का कार्यकाल नौ महीने बढ़ाकर 13 जनवरी 2027 तक कर दिया था। इससे दोनों पक्षों को समाधान के लिए अतिरिक्त समय मिला है।

तकनीकी स्तर पर बातचीत तेज

हालिया घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों राज्यों की तकनीकी टीमों ने केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में दो दौर की बातचीत की है। 21 सितंबर को भी एक और बैठक निर्धारित थी, जिसमें अधिकारी और विशेषज्ञ महानदी के पानी के संभावित बंटवारे के ढांचे पर चर्चा करने वाले थे।

ओडिशा के महाधिवक्ता पितांबर आचार्य ने न्यायाधिकरण के समक्ष बताया था कि राज्य बातचीत में शामिल है और ऐसा समाधान तलाशना चाहता है जो ओडिशा के हितों की रक्षा करते हुए दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो। बातचीत में केंद्र की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसी कारण न्यायाधिकरण की कार्यवाही को 28 सितंबर तक टाला गया है। इसका उद्देश्य दोनों राज्यों को समझौते की संभावनाओं पर आगे बातचीत के लिए समय देना है।

ओडिशा की ओर से भी समाधान की उम्मीद

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहले भी इस मुद्दे पर बातचीत कर चुके हैं। 30 जुलाई को दोनों मुख्यमंत्रियों ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में महानदी विवाद पर चर्चा की थी। इसके बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री ने भी उम्मीद जताई थी कि विवाद का समाधान दीवाली से पहले हो सकता है।

He said the matter, which was earlier being heard by the Mahanadi Water Disputes Tribunal, has now been referred to the Central Water Commission (CWC).

20 सितंबर की बैठक में साय और माझी ने महानदी के अलावा दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच सहयोग तथा विकास से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की। इससे संकेत मिलता है कि दोनों सरकारें केवल न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर रहने के बजाय आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने पर जोर दे रही हैं।

किसानों और जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा

महानदी विवाद का समाधान केवल दो राज्य सरकारों के बीच प्रशासनिक या कानूनी समझौते का विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध दोनों राज्यों के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। सिंचाई के लिए पर्याप्त और नियमित पानी मिलने से कृषि गतिविधियों को स्थिरता मिल सकती है। इसके अलावा जलाशयों और बांधों के बेहतर समन्वय से बाढ़ तथा सूखे जैसी परिस्थितियों के प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है।

छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण पर भी हाल में जोर दिया गया है। राज्य सरकार के अनुसार, जल संरक्षण अभियान के तहत 79,775 संरचनाएं दर्ज की गईं और 77,719 पूरी हो चुकी थीं। मुख्यमंत्री साय ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया है।

आगे की राह

हालांकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विवाद के जल्द समाधान को लेकर विश्वास जताया है, लेकिन अंतिम समझौता अभी घोषित नहीं हुआ है। पानी की उपलब्धता, मौसमी प्रवाह, सिंचाई की जरूरत, मौजूदा जल परियोजनाओं और दोनों राज्यों के अधिकारों से जुड़े तकनीकी सवालों पर सहमति बनना जरूरी होगा।

28 सितंबर को प्रस्तावित न्यायाधिकरण की सुनवाई और दोनों राज्यों के बीच चल रही तकनीकी बातचीत इस प्रक्रिया के अगले महत्वपूर्ण चरण होंगे।

यदि बातचीत से स्वीकार्य समझौता निकलता है, तो यह लंबे समय से चले आ रहे महानदी विवाद में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। फिलहाल दोनों राज्यों के नेताओं के बयानों और तकनीकी स्तर पर जारी वार्ताओं से समझौते की दिशा में सकारात्मक माहौल बनने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन अंतिम परिणाम बातचीत की शर्तों और दोनों राज्यों की सहमति पर निर्भर करेगा।

 

Delhi में वोटर सूची का SIR शुरू हुआ; सीएम रेखा गुप्ता ने इसे ‘लोकतंत्र का यज्ञ’

Follow us on Facebook

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.