Amit Shah ने सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर किया नमन, बोले- उन्होंने 1218 दिनों में अखंड भारत का निर्माण कर इतिहास बदल दिया
नई दिल्ली: देश के पहले उप प्रधानमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 31 अक्टूबर को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) के रूप में मनाए जाने वाले इस अवसर पर अमित शाह ने सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता में दिए गए योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने न केवल भारत का इतिहास बदला, बल्कि देश के भूगोल की संरचना को भी नया स्वरूप दिया।
Amit Shah नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने ‘रन फॉर यूनिटी’ यानी एकता दौड़ को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सरदार पटेल ने रियासतों को एक सूत्र में पिरोया
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि जब भारत को आजादी मिली थी, उस समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग रियासतों को एक साथ लाने की थी। उस दौर में कई लोगों को आशंका थी कि आजादी के बाद भारत एकजुट नहीं रह पाएगा।
लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी राजनीतिक दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व क्षमता से इस चुनौती का सामना किया।
शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने अनेक रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की नींव मजबूत की। उन्होंने बताया कि आज जिस एकीकृत भारत को हम देखते हैं, उसके निर्माण में पटेल की भूमिका ऐतिहासिक रही है।
Amit shah गृह मंत्री के अनुसार, आजादी के बाद मात्र 1,218 दिनों में सरदार पटेल ने ऐसा काम कर दिखाया, जिसे उस समय असंभव माना जा रहा था।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित हुई एकता दौड़
सरदार पटेल की जयंती पर देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इसका उद्देश्य नागरिकों को देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने एकता दौड़ को रवाना किया। इस दौड़ में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
एकता दौड़ के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि भारत की असली ताकत उसकी एकजुटता में है। देश की अलग-अलग भाषाएं, धर्म, संस्कृति और परंपराएं होने के बावजूद सभी नागरिक एक राष्ट्रीय पहचान से जुड़े हुए हैं।
अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन देश के युवाओं के लिए त्याग, समर्पण, देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा है।
विविधता भारत की कमजोरी नहीं, सबसे बड़ी ताकत
अपने भाषण में अमित शाह ने भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं, अलग-अलग तरह के कपड़े पहने जाते हैं और विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं।
इसके बावजूद भारत की राष्ट्रीय पहचान एक है।
उन्होंने कहा कि भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शक्ति है। संवाद, विश्वास और समावेशी सोच के माध्यम से पिछले 80 वर्षों में देश ने एक साझा राष्ट्रीय पहचान बनाई है।
शाह ने कहा कि सरदार पटेल का भी यही संदेश था कि देश की विविधता को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाना चाहिए।
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में भी याद किए गए सरदार पटेल
अमित शाह ने अपने संबोधन में गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीय सभ्यता और राष्ट्रीय पुनर्जागरण का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि मंदिर के पुनर्निर्माण की कल्पना सरदार पटेल ने भी की थी। शाह के अनुसार, यह केवल एक मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं था, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और आत्मसम्मान से जुड़ा विषय भी था।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने विपक्ष पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वर्षों तक सरदार पटेल को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान नहीं दिया गया और उनकी विरासत को भुलाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का योगदान इतना बड़ा है कि उसे कभी छिपाया नहीं जा सकता।
शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान शुरू की गई स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस विशाल प्रतिमा ने पूरी दुनिया के सामने सरदार पटेल के व्यक्तित्व और योगदान को प्रमुखता से स्थापित किया है।
युवाओं के लिए नशामुक्त भारत का लक्ष्य
अमित शाह ने अपने संबोधन में नशामुक्त भारत के लक्ष्य पर भी बात की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को नशे से दूर रखना जरूरी है।
उन्होंने 31 दिसंबर 2029 तक देश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का लक्ष्य दोहराया। शाह ने कहा कि नशामुक्त भारत का निर्माण देश के युवाओं और उनके भविष्य के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने और सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की अपील की।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के जरिए दुनिया में पहचान
सरदार पटेल के सम्मान में गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भी कार्यक्रम में उल्लेख किया गया। यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है और इसकी ऊंचाई 182 मीटर है।
अमित शाह ने कहा कि इस प्रतिमा ने सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सरदार पटेल की विरासत आज भी प्रासंगिक
सरदार वल्लभभाई पटेल को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए याद किया जाता है। वह स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे।
उनके नेतृत्व में रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया ने आधुनिक भारत की राजनीतिक एकता की नींव रखी।
151वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से देशवासियों को उनके विचारों और आदर्शों से जुड़ने का संदेश दिया गया।
अमित शाह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के लिए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और आपसी विश्वास बेहद जरूरी हैं। सरदार पटेल का जीवन और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को देश की एकता और अखंडता बनाए रखने की प्रेरणा देता रहेगा।
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