Israel की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम: आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू के साथ गठबंधन से किया इनकार, बोले- ट्रंप की दखलंदाजी भी नहीं करेंगे स्वीकार
तेल अवीव, 3 नवंबर 2026। इजरायल की राजनीति में नई सरकार के गठन को लेकर घमासान तेज हो गया है। विपक्षी नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़ेनकोट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने यहां तक कहा है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उनसे नेतन्याहू के साथ गठबंधन करने का अनुरोध करते हैं, तब भी वह अपना फैसला नहीं बदलेंगे।
इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आइज़ेनकोट ने एक बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ट्रंप से मुलाकात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इजरायल के आंतरिक राजनीतिक मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति की किसी भी तरह की दखलंदाजी स्वीकार नहीं करेंगे।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब इजरायल में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के बाद किसी भी राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और रणनीतिक जोड़-तोड़ तेज हो गई है।
आइज़ेनकोट ने क्या कहा?
इजरायल के सार्वजनिक प्रसारक KAN की रिपोर्ट के अनुसार, गादी आइज़ेनकोट ने बंद कमरे में हुई बैठक के दौरान कहा कि वह बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली किसी भी सरकार में शामिल नहीं होंगे।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित हस्तक्षेप पर भी अपना रुख स्पष्ट किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, आइज़ेनकोट ने कहा, “अगर ट्रंप मुझे फोन करते हैं, तो मैं राष्ट्रपति का सम्मान करूंगा और उनसे मिलने जाऊंगा। लेकिन मैं स्पष्ट कर दूंगा कि यह इजरायल का आंतरिक मामला है और मैं इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होने दूंगा।”
इस बयान से स्पष्ट है कि आइज़ेनकोट अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखने के पक्ष में हैं, लेकिन इजरायल की सरकार बनाने की प्रक्रिया को देश का आंतरिक राजनीतिक विषय मानते हैं।
उनका यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप प्रशासन की ओर से कथित तौर पर नेतन्याहू और आइज़ेनकोट को एक राष्ट्रीय एकता सरकार में साथ लाने की कोशिश की जा रही थी।
ट्रंप क्यों चाहते हैं नेतन्याहू और आइज़ेनकोट का गठबंधन?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिनिधियों ने इजरायल के अधिकारियों के साथ चुनाव के बाद एक संभावित राष्ट्रीय एकता सरकार को लेकर बातचीत की थी।
इस प्रस्ताव के तहत बेंजामिन नेतन्याहू और गादी आइज़ेनकोट को एक ही सरकार में शामिल करने की संभावना पर विचार किया जा रहा था।
इसकी प्रमुख वजह इजरायल में चुनाव के बाद पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता बताई जा रही है। किसी भी गठबंधन के पास अपने दम पर बहुमत नहीं होने के कारण सरकार बनाने की प्रक्रिया जटिल हो गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप चाहते हैं कि इजरायल में जल्द से जल्द एक स्थिर और भरोसेमंद सरकार बने। इससे अमेरिका और इजरायल के बीच सुरक्षा तथा रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वहीं, नेतन्याहू ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने कथित तौर पर आइज़ेनकोट को संभावित गठबंधन सहयोगी के रूप में उपयुक्त बताया था। लेकिन आइज़ेनकोट के ताजा बयान ने इस संभावना को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
चुनाव में किसी भी पक्ष को नहीं मिला स्पष्ट बहुमत
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव हुए थे। इन चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति को एक जटिल स्थिति में पहुंचा दिया है।
120 सदस्यीय नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है, लेकिन चुनाव में किसी भी राजनीतिक खेमे को यह आंकड़ा हासिल नहीं हुआ।
चुनाव के नतीजों के अनुसार:
राजनीतिक खेमा | सीटें |
|---|---|
नेतन्याहू का गठबंधन | 53 |
विपक्षी दल | 48 |
अरब राजनीतिक दल | 19 |
कुल | 120 |
इन नतीजों के कारण नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से आठ सीट पीछे रह गया। वहीं विपक्ष को सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत है।
अरब राजनीतिक दलों की 19 सीटें सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यदि विपक्षी दलों को इनका समर्थन मिलता है, तो उनके पास संभावित रूप से 67 सांसदों का समर्थन हो सकता है। हालांकि, इस समर्थन को लेकर भी राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
विपक्षी दलों ने आइज़ेनकोट के नाम पर जताई सहमति
नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के उद्देश्य से विपक्षी दलों ने गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व में एकजुट होने की कोशिश शुरू कर दी है।
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट, यायर गोलान और अविग्दोर लिबरमैन जैसे विपक्षी नेताओं ने आइज़ेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की घोषणा की है।
3 नवंबर को विपक्षी दलों के नेताओं ने हर्जलिया में बैठक भी की। चुनाव के बाद यह उनकी पहली संयुक्त बैठक थी। इसमें सरकार गठन की रणनीति और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के सामने अपना पक्ष रखने को लेकर चर्चा हुई।
विपक्षी नेताओं का उद्देश्य राष्ट्रपति के सामने आइज़ेनकोट को सरकार बनाने का अवसर देने की सिफारिश करना है।
हालांकि, विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती अरब दलों के समर्थन को लेकर बनी असहमति है। कुछ नेता अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं।
इसलिए विपक्षी एकजुटता के बावजूद सरकार गठन का रास्ता आसान नहीं दिखाई दे रहा है।
लिबरमैन ने भी नेतन्याहू के साथ गठबंधन से किया इनकार
इजरायल के विपक्षी नेता अविग्दोर लिबरमैन ने भी नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने से इनकार किया है।
उन्होंने अपनी पार्टी यिस्राएल बेतेनु की ओर से आइज़ेनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने की बात कही है।
हालांकि, लिबरमैन ने अरब राजनीतिक दलों के समर्थन पर निर्भर सरकार में शामिल होने से भी इनकार किया है। उनका कहना है कि वह ऐसी अल्पमत सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहते, जिसके गिरने का खतरा बना रहे।
इस स्थिति ने विपक्ष के सामने एक मुश्किल खड़ी कर दी है। एक तरफ नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट होना है, वहीं दूसरी तरफ सरकार बनाने के लिए आवश्यक सांसदों का समर्थन जुटाने पर सहमति बनाना भी जरूरी है।
आइज़ेनकोट के सामने अब इन सभी राजनीतिक मतभेदों को दूर करने की चुनौती होगी।
नेतन्याहू भी सरकार बनाने की कोशिश में जुटे
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सरकार बनाने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। उन्होंने व्यापक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की इच्छा जताई है, लेकिन उनकी शर्त है कि नई सरकार का नेतृत्व वही करेंगे।
नेतन्याहू ने विपक्षी दलों को बातचीत का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, अरब दलों के समर्थन पर निर्भर सरकार बनाने को लेकर उनका रुख अलग है।
इसका मतलब है कि नेतन्याहू और आइज़ेनकोट के बीच मतभेद केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकार की संरचना और संभावित सहयोगियों को लेकर भी राजनीतिक असहमति है।
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