Mizoram में पर्यटन और अदरक प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर सीएम ललदुहोमा और नीति आयोग सदस्य की चर्चा
Mizoram के मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने 21 सितंबर 2026 को नीति आयोग के सदस्य डॉ. जोरम अनिया से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में खास तौर पर पर्यटन को बढ़ावा देने, अदरक के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को मजबूत करने तथा स्कूलों में नवाचार को विस्तार देने पर जोर दिया गया। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पूर्वोत्तर राज्यों के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पर्यटन विकास पर विशेष जोर
Mizoram अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ी भू-दृश्यों, जैव-विविधता और स्थानीय संस्कृति के कारण पर्यटन की बड़ी संभावनाएं रखता है। मुख्यमंत्री ललदुहोमा ने नीति आयोग के साथ चर्चा में राज्य में अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के उपायों पर विचार किया। इसके साथ ही कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KMMTTP) के पूरा होने के बाद उसके प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा हुई। बेहतर संपर्क व्यवस्था से मिजोरम के पर्यटन और व्यापार दोनों को लाभ मिलने की संभावना है।
इससे पहले जून 2026 में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ नीति आयोग की बैठक में भी ललदुहोमा ने मिजोरम की पर्यटन क्षमता को प्रमुखता से रखा था। उन्होंने राज्य के कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म मॉडल का उल्लेख किया था, जिसमें स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके अनुसार, पिछले चार वर्षों में मिजोरम में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
पर्यटन को केवल बड़े होटल और पर्यटन स्थलों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय समुदायों को इससे जोड़ना मिजोरम के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। होम-स्टे, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रकृति आधारित पर्यटन जैसी गतिविधियां ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं।
अदरक प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन
बैठक का दूसरा प्रमुख विषय मिजोरम में अदरक प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन था। राज्य में अदरक एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद है और सरकार अब केवल कच्चे अदरक की बिक्री के बजाय उससे अधिक मूल्य वाले उत्पाद तैयार करने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य में प्रसंस्करण उद्योग और रोजगार के अवसर विकसित करना है।
मई 2026 में केंद्र सरकार ने ₹189.79 करोड़ की मिजोरम जिंजर मिशन शुरू की थी। इस मिशन का उद्देश्य अदरक की खेती से लेकर पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, विपणन और संस्थागत क्षमता तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है। इसमें कृषि, ग्रामीण विकास और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं के साथ NABARD, ICAR और APEDA जैसे संस्थानों तथा निजी निवेशकों के बीच समन्वय की परिकल्पना की गई है।
मिशन के तहत करीब 20,000 किसान परिवारों को एकीकृत अदरक वैल्यू-चेन से जोड़ने की योजना है। साथ ही एक इंटीग्रेटेड प्रोसेसिंग हब और तीन स्पोक सेंटर स्थापित करने तथा 30 से अधिक रणनीतिक हस्तक्षेपों को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे अदरक की गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
किसानों को मिलेगा संभावित लाभ
अदरक प्रसंस्करण को बढ़ावा देने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू किसानों के लिए बेहतर बाजार अवसर पैदा करना है। यदि अदरक को सुखाकर, पाउडर, तेल, पेस्ट या अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जाता है, तो कच्चे कृषि उत्पाद की तुलना में अधिक आर्थिक मूल्य पैदा किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध होने से किसानों को फसल को दूर के बाजारों तक ले जाने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
मिजोरम सरकार ने अदरक की खेती और प्रसंस्करण को मजबूत करने के लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की दिशा में भी काम शुरू किया है। राज्य सरकार की परियोजनाओं में चंफाई जिले के मुआल्कावी में मुख्य अदरक प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने की योजना शामिल है।
शिक्षा और नवाचार भी एजेंडे में
मुख्यमंत्री और नीति आयोग सदस्य की बातचीत केवल पर्यटन और कृषि तक सीमित नहीं रही। बैठक में अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) को मिजोरम के और अधिक स्कूलों तक विस्तारित करने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान, तकनीक, रचनात्मक सोच और समस्या-समाधान की क्षमता को बढ़ावा देना है।
यह पहल राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि पर्यटन और कृषि प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।
केंद्र-राज्य सहयोग पर जोर
ललदुहोमा ने नीति आयोग के सहयोग को मिजोरम की विकास प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने के लिए महत्वपूर्ण बताया। दूसरी ओर, डॉ. जोरम अनिया ने राज्य के विकास से जुड़े कार्यक्रमों में नीति आयोग के निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।
कुल मिलाकर, बैठक में जिन तीन क्षेत्रों—पर्यटन, अदरक मूल्यवर्धन और स्कूली नवाचार—पर चर्चा हुई, वे मिजोरम की अर्थव्यवस्था और मानव संसाधन विकास से सीधे जुड़े हैं। पर्यटन के जरिए स्थानीय रोजगार और सेवाओं का विस्तार, अदरक प्रसंस्करण के जरिए कृषि उत्पादों का अधिक मूल्य प्राप्त करना तथा शिक्षा में नवाचार के जरिए नई पीढ़ी को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना राज्य के विकास एजेंडे के महत्वपूर्ण हिस्से बन सकते हैं।

