BJP पश्चिम बंगाल में RRTS नेटवर्क की मांग, BJP प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र को लिखा पत्र
पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) नेटवर्क विकसित करने की मांग सामने आई है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सामिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर राज्य में RRTS की संभावनाओं की जांच कराने का आग्रह किया है। प्रस्ताव में कोलकाता को दक्षि
ण बंगाल के प्रमुख औद्योगिक, व्यावसायिक और पर्यटन केंद्रों से तेज क्षेत्रीय रेल सेवा के जरिए जोड़ने की बात कही गई है।
Namo Bharat की तर्ज पर नेटवर्क का प्रस्ताव
सामिक भट्टाचार्य ने अपने पत्र में RRTS को NCRTC के Namo Bharat कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कई महत्वपूर्ण शहरों के बीच यात्रियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में इन शहरों के बीच संपर्क मुख्य रूप से पारंपरिक रेल और सड़क नेटवर्क पर निर्भर है, जहां भीड़भाड़ के कारण तेज और नियमित क्षेत्रीय आवागमन में परेशानी होती है। प्रस्ताव के मुताबिक, RRTS को मेट्रो जैसी नियमितता और क्षेत्रीय स्तर पर अपेक्षाकृत तेज यात्रा की सुविधा देने वाले नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल कोलकाता से आने-जाने की सुविधा बढ़ाना नहीं, बल्कि आसपास के शहरों को एक बड़े आर्थिक और परिवहन क्षेत्र के रूप में जोड़ना भी है।
BJP प्रमुख कॉरिडोर का प्रस्ताव
प्रारंभिक प्रस्ताव में चार प्रमुख RRTS कॉरिडोर सुझाए गए हैं। पहला कॉरिडोर कोलकाता से कल्याणी, कृष्णनगर और मायापुर होते हुए लगभग 135 किलोमीटर का होगा। इससे उत्तर और नदिया क्षेत्र के महत्वपूर्ण शहरों को कोलकाता से बेहतर संपर्क मिल सकता है।
दूसरे कॉरिडोर में कोलकाता-बर्दवान-दुर्गापुर-आसनसोल को जोड़ने का प्रस्ताव है। इसकी लंबाई करीब 132 किलोमीटर बताई गई है। यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। प्रस्ताव में आसनसोल के मेट्रो नेटवर्क के साथ एकीकरण का भी सुझाव दिया गया है।
तीसरे कॉरिडोर के तहत कोलकाता-फाल्टा-डायमंड हार्बर-हल्दिया को जोड़ने की योजना प्रस्तावित है। यह लगभग 102 किलोमीटर लंबा होगा और इसे प्रस्तावित मैदान-बजबज मेट्रो से जोड़ने का विचार रखा गया है। हल्दिया औद्योगिक और बंदरगाह गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि डायमंड हार्बर और आसपास के क्षेत्र कोलकाता के साथ बढ़ते क्षेत्रीय संपर्क की जरूरत रखते हैं।
चौथा कॉरिडोर सांतरागाछी-कोलाघाट-खड़गपुर-मेदिनीपुर को जोड़ने का प्रस्ताव रखता है। इसकी लंबाई लगभग 135 किलोमीटर बताई गई है। प्रस्ताव में दुर्गापुर और आसनसोल के लिए अलग मेट्रो प्रणालियों के साथ संभावित एकीकरण की बात भी की गई है।
BJP जमीन अधिग्रहण कम करने पर जोर
प्रस्ताव की एक प्रमुख विशेषता यह है कि RRTS कॉरिडोर को जहां संभव हो, मौजूदा राजमार्गों और रेलवे मार्गों के साथ विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इसके पीछे उद्देश्य भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता को कम करना है। बड़े परिवहन प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दा होता है, इसलिए मौजूदा परिवहन गलियारों का उपयोग करने से परियोजना की योजना और क्रियान्वयन में संभावित रूप से मदद मिल सकती है।
हालांकि, वास्तविक निर्माण से पहले विस्तृत इंजीनियरिंग अध्ययन, यात्री मांग का आकलन, पर्यावरणीय प्रभाव और वित्तीय व्यवहार्यता जैसे पहलुओं की जांच आवश्यक होगी।
संयुक्त निगम बनाने का सुझाव
सामिक भट्टाचार्य ने RRTS परियोजना के संचालन और विकास के लिए West Bengal Rapid Transit Corporation (WBRTC) नाम से एक विशेष प्रयोजन संस्था बनाने का सुझाव दिया है। प्रस्तावित संस्था को NCRTC की तर्ज पर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार की संयुक्त भागीदारी वाला मॉडल बनाने की बात कही गई है।
यह मॉडल महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्रीय परिवहन परियोजनाओं में अक्सर एक से अधिक सरकारों और एजेंसियों की भूमिका होती है। भूमि, वित्त, निर्माण, संचालन और विभिन्न परिवहन प्रणालियों के एकीकरण के लिए संस्थागत समन्वय की जरूरत पड़ती है।
केंद्र से विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन की मांग
BJP प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र से फिलहाल सीधे निर्माण की मंजूरी देने के बजाय प्रस्ताव की विस्तृत जांच और व्यवहार्यता अध्ययन कराने का अनुरोध किया है। उनके पत्र के अनुसार, यदि प्रारंभिक प्रस्ताव उपयुक्त पाया जाता है तो इंजीनियरिंग, यात्री मांग और वित्तीय पहलुओं को शामिल करते हुए Detailed Feasibility Study कराई जानी चाहिए। इसमें पश्चिम बंगाल सरकार के साथ समन्वय का भी सुझाव दिया गया है।
इसका अर्थ है कि अभी यह एक प्रस्तावित नेटवर्क है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र की ओर से इस नेटवर्क को मंजूरी देने या निर्माण की समयसीमा घोषित करने की जानकारी सामने नहीं आई है।
औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्रों को जोड़ने की कोशिश
प्रस्तावित नेटवर्क में ऐसे शहरों को शामिल किया गया है जिनका आर्थिक और सामाजिक महत्व अलग-अलग है। दुर्गापुर और आसनसोल औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जबकि हल्दिया बंदरगाह और औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। दूसरी ओर, मायापुर और डायमंड हार्बर जैसे स्थान पर्यटन और क्षेत्रीय आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे नेटवर्क से लंबी दूरी के यात्रियों के साथ-साथ रोजाना काम, शिक्षा और व्यापार के लिए यात्रा करने वाले लोगों को भी संभावित लाभ मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ यात्रियों की संख्या, किराया, स्टेशन की स्थिति, ट्रेनों की आवृत्ति और अन्य परिवहन साधनों के साथ कनेक्टिविटी जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।
आगे की प्रक्रिया
फिलहाल सामिक भट्टाचार्य का पत्र केंद्र के सामने एक प्रारंभिक प्रस्ताव रखता है। अगला चरण केंद्र सरकार द्वारा प्रस्ताव की समीक्षा और उसकी तकनीकी तथा आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन करना होगा। यदि प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाता है, तो विस्तृत अध्ययन के बाद ही कॉरिडोर की अंतिम लंबाई, स्टेशन, लागत, वित्तीय मॉडल और निर्माण कार्यक्रम जैसी चीजें तय की जा सकती हैं।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित RRTS नेटवर्क का उद्देश्य कोलकाता और दक्षिण बंगाल के प्रमुख शहरों के बीच तेज और अधिक व्यवस्थित क्षेत्रीय संपर्क विकसित करना है। प्रस्ताव में चार कॉरिडोर, मौजूदा परिवहन मार्गों के अधिकतम उपयोग और केंद्र-राज्य साझेदारी वाले संस्थागत मॉडल की परिकल्पना की गई है। फिलहाल यह प्रस्ताव अध्ययन के चरण में है और इसकी वास्तविक स्थिति केंद्र तथा राज्य सरकारों के आगे के निर्णयों पर निर्भर करेगी।

