PM थाईलैंड के गणेश भक्त पंथौन थीरखानोन का पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में किया उल्लेख
PM नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और भगवान गणेश के प्रति देश-विदेश में मौजूद श्रद्धा का उल्लेख करते हुए थाईलैंड के पंथौन थीरखानोन की कहानी साझा की। प्रधानमंत्री ने उनके चार दशक से अधिक लंबे अध्ययन, साधना और भगवान गणेश से जुड़े सांस्कृतिक कार्यों को रेखांकित किया। यह उदाहरण इस बात पर केंद्रित था कि भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं भारत की सीमाओं से बाहर भी लोगों को आकर्षित करती रही हैं।
PM मोदी ने बताया कि थाईलैंड में भगवान गणेश को ‘फ्रा फिकानेट’ के नाम से भी जाना जाता है। पंथौन थीरखानोन के जीवन में भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा की शुरुआत उस समय हुई, जब वे केवल 19 वर्ष के थे। उनके पिता ने उन्हें भगवान गणेश की एक तस्वीर उपहार में दी थी। प्रधानमंत्री के अनुसार, इसी घटना के बाद उनके भीतर गणेश जी के प्रति गहरी श्रद्धा विकसित हुई। इसके बाद उन्होंने भगवान गणेश से जुड़ी परंपराओं और मान्यताओं का अध्ययन करने में अपना काफी समय लगाया।
पंथौन ने केवल थाईलैंड तक ही अपनी रुचि सीमित नहीं रखी। उन्होंने भारत और नेपाल सहित एशिया के विभिन्न देशों की यात्राएं कीं और विशेष रूप से महाराष्ट्र की संस्कृति तथा धार्मिक परंपराओं के प्रति रुचि दिखाई। महाराष्ट्र में भगवान गणेश से जुड़ी प्रसिद्ध अष्टविनायक परंपरा ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। अष्टविनायक यात्रा भगवान गणेश के आठ प्रमुख मंदिरों की धार्मिक यात्रा है, जो महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित हैं। पंथौन इस परंपरा को समझने और अनुभव करने के लिए महाराष्ट्र की अनेक यात्राएं कर चुके हैं।
PM मोदी ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि पंथौन के प्रयासों से थाईलैंड में अष्टविनायक यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं की रुचि बढ़ी है। यानी भारत में प्रचलित एक विशिष्ट धार्मिक परंपरा को उन्होंने थाई समाज में भी परिचित कराने में योगदान दिया। उनके प्रयासों ने भारत और थाईलैंड के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संपर्क के एक उदाहरण को सामने रखा है।
पंथौन थीरखानोन की सबसे उल्लेखनीय पहलों में से एक गणेश हिमाल म्यूजियम है। प्रधानमंत्री के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2002 में उत्तरी थाईलैंड के चियांग माई में इस संग्रहालय की स्थापना की थी। आज इस संग्रहालय में भगवान गणेश की 10,000 से अधिक मूर्तियां मौजूद हैं। यह संग्रहालय केवल मूर्तियों का संग्रह भर नहीं है, बल्कि भगवान गणेश से जुड़ी कला, परंपराओं और श्रद्धा को समझने का एक स्थान भी बन गया है।
इस संग्रहालय की एक विशेषता अष्टविनायक की मूर्तियों से जुड़ी है। जिन श्रद्धालुओं के लिए भारत आकर अष्टविनायक यात्रा करना संभव नहीं है, वे चियांग माई स्थित संग्रहालय में अष्टविनायक स्वरूपों के दर्शन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि यहां प्रत्येक रविवार सुबह लगभग 10 बजे भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके अतिरिक्त गणेश जी से जुड़े विशेष अवसरों पर भी यहां धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
PM मोदी ने पंथौन की कहानी को केवल व्यक्तिगत भक्ति के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि इसे भारत की संस्कृति, कला और परंपराओं के अंतरराष्ट्रीय प्रसार के संदर्भ में भी रखा। उनके अनुसार, भारत की आस्था और सांस्कृतिक विरासत दूसरे देशों में भी लोगों को आकर्षित कर रही है। पंथौन का जीवन इसी व्यापक सांस्कृतिक जुड़ाव का एक उदाहरण है।
भगवान गणेश को भारतीय परंपरा में ज्ञान, बुद्धि और शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। गणेश उत्सव के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में गणपति बप्पा का स्वागत श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जाता है। इसी संदर्भ को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने थाईलैंड में गणेश जी के प्रति मौजूद श्रद्धा का उल्लेख किया। इससे ‘मन की बात’ के उस हिस्से में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान का विषय भी सामने आया।
पंथौन थीरखानोन की कहानी इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय है कि एक विदेशी नागरिक ने भारतीय संस्कृति की एक विशिष्ट परंपरा में लंबे समय तक रुचि बनाए रखी और उसे अपने देश में लोगों तक पहुंचाने के लिए संस्थागत प्रयास किया। चियांग माई का गणेश हिमाल म्यूजियम इस प्रयास का एक ठोस उदाहरण है।
‘मन की बात’ में इस प्रसंग को शामिल करते हुए प्रधानमंत्री ने ऐसी प्रेरक कहानियों को सामने लाने की अपनी परंपरा को जारी रखा। उन्होंने देशवासियों से भी अपने आसपास हो रहे सकारात्मक और प्रेरक कार्यों की जानकारी साझा करने का आग्रह किया। पंथौन की कहानी इसी विचार के अनुरूप सामने आई—एक ऐसी कहानी, जिसमें व्यक्तिगत श्रद्धा समय के साथ अध्ययन, यात्राओं, संग्रह और सांस्कृतिक गतिविधियों का रूप लेती दिखाई देती है।
इस प्रकार, थाईलैंड के पंथौन थीरखानोन का उल्लेख भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों के एक अनोखे उदाहरण को सामने लाता है। भगवान गणेश के प्रति उनकी चार दशक से अधिक लंबी रुचि, महाराष्ट्र की अष्टविनायक परंपरा से उनका जुड़ाव और चियांग माई में गणेश संग्रहालय की स्थापना यह दर्शाती है कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराएं भौगोलिक सीमाओं से परे भी लोगों के बीच संवाद का माध्यम बन सकती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी पहल को ‘मन की बात’ में रेखांकित करते हुए पंथौन के प्रयासों की सराहना की और भगवान गणेश के आशीर्वाद की कामना की।

