Chidambaram ने SIR को लेकर कांग्रेस के रुख से अलग बात कही, बोले—तमिलनाडु चुनाव नतीजे पर इसका असर साबित नहीं
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर पार्टी के भीतर चल रही बहस के बीच एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। चिदंबरम ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाया जाना गलत था, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि मतदाताओं के नाम हटने की वजह से ही तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की जीत और DMK की हार हुई।
28 सितंबर 2026 को कराईकुडी में पत्रकारों से बातचीत में चिदंबरम ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा कुछ मतदाताओं के नाम हटाए गए और जिन लोगों के नाम हटे, उन्हें सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने इस दावे को अलग विषय बताया कि इन नामों को हटाए जाने से चुनाव का पूरा परिणाम प्रभावित हुआ। उनके अनुसार, विपक्ष को मतों में हेरफेर के अपने दावे को प्रमाणित करना होगा।
SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध
तमिलनाडु में SIR और मतदाता सूची में बदलाव का मुद्दा चुनाव के बाद भी राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।
Chidambaram ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस और INDIA ब्लॉक आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। साथ ही उन्होंने कथित रूप से हटाए गए मतदाताओं के नाम वापस जोड़े जाने और दूसरे राज्यों में SIR को तत्काल रोकने की मांग का समर्थन किया।
लेकिन चिदंबरम की टिप्पणी का महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि उन्होंने SIR की प्रक्रिया पर आपत्ति जताने और तमिलनाडु चुनाव के परिणाम को सीधे उसी प्रक्रिया का परिणाम मानने के बीच अंतर किया। उन्होंने कहा कि नाम हटाना गलत हो सकता है, लेकिन इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि इसी वजह से TVK ने जीत हासिल की या DMK को हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव परिणाम को लेकर क्या कहा?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK के प्रदर्शन और DMK के परिणाम के संदर्भ में मतदाता सूची विवाद राजनीतिक चर्चा का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने मतदाता नाम हटाए जाने और चुनाव परिणामों के बीच संबंध होने के आरोप लगाए हैं। चिदंबरम ने हालांकि इस संबंध को स्थापित करने के लिए प्रमाण की आवश्यकता पर जोर दिया।
उनका बयान इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि यह उस समय आया है जब कांग्रेस सहित विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। चिदंबरम ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां कायम रखते हुए चुनावी नतीजे के कारणों को लेकर अपेक्षाकृत सावधानीपूर्ण रुख अपनाया।
TVK की भूमिका पर भी टिप्पणी
Chidambaram से TVK के कांग्रेस के साथ राजनीतिक संबंधों और SIR के मुद्दे पर उसकी चुप्पी के बारे में भी सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि TVK को कांग्रेस का सहयोगी होने के कारण हर मुद्दे पर तत्काल अपनी राय व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी उपचुनावों के बाद किसी मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि TVK के पास संसद में कोई सांसद नहीं है और इसलिए INDIA ब्लॉक की आगामी संसदीय बैठक में उसकी भागीदारी को लेकर अलग स्थिति है। यह टिप्पणी कांग्रेस और TVK के बीच संबंधों को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा के बीच आई है।
मतदाता सूची और चुनावी परिणाम में अंतर
चिदंबरम के बयान को समझने के लिए SIR विवाद के दो अलग पहलुओं को अलग-अलग देखना जरूरी है। पहला पहलू है मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं का नाम सूची में बने रहना। दूसरा पहलू है किसी विशेष चुनाव परिणाम पर मतदाता सूची में हुए बदलाव का वास्तविक प्रभाव।
पहले मुद्दे पर चिदंबरम का रुख स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए, उन्हें सूची में होना चाहिए था। लेकिन दूसरे मुद्दे पर उन्होंने किसी सीधे निष्कर्ष से परहेज किया। उनका कहना है कि यदि यह दावा किया जा रहा है कि नाम हटाने से किसी दल को चुनावी नुकसान या दूसरे दल को फायदा हुआ, तो उस दावे के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक है।
यह अंतर राजनीतिक और चुनावी बहस में महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में गलती या नाम हटना एक प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा सवाल हो सकता है, जबकि किसी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का दावा एक अलग स्तर का आरोप है, जिसके लिए निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़ों और अन्य प्रमाणों की जरूरत पड़ती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर चिदंबरम का रुख
SIR के साथ-साथ चिदंबरम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी कड़ा रुख व्यक्त किया। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग भी की। ये चिदंबरम के व्यक्तिगत राजनीतिक वक्तव्य हैं और इन्हें आरोप/मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।
कांग्रेस के लिए बयान का महत्व
Chidambaram की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब तमिलनाडु में चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक दल अलग-अलग कारण और व्याख्याएं सामने रख रहे हैं। एक ओर कांग्रेस और उसके सहयोगी मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चिदंबरम ने चुनाव परिणाम और SIR के बीच सीधा कारणात्मक संबंध स्थापित करने से इनकार किया है।
इससे बहस का फोकस केवल यह पूछने तक सीमित नहीं रहता कि कितने नाम हटाए गए, बल्कि यह सवाल भी उठता है कि हटाए गए नामों में कितने पात्र मतदाता थे, वे किन निर्वाचन क्षेत्रों में थे और क्या उनके हटने से किसी उम्मीदवार या दल के परिणाम पर मापने योग्य प्रभाव पड़ा।
कुल मिलाकर, पी. चिदंबरम का ताजा बयान SIR विवाद में कांग्रेस के भीतर मौजूद अलग-अलग जोर को सामने लाता है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को गलत बताया और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही की मांग जारी रखी, लेकिन साथ ही यह कहने से परहेज किया कि यही कारण TVK की जीत और DMK की हार के लिए जिम्मेदार था। उनका कहना है कि चुनाव परिणाम को मतदाता नाम हटाने से जोड़ने वाले दावे के लिए प्रमाण आवश्यक हैं।

