Blue मेरठ का ‘ब्लू ड्रम’ हत्याकांड: पत्नी मुस्कान और साहिल दोषी, करीब 13 महीने चली सुनवाई
मेरठ के बहुचर्चित ‘ब्लू ड्रम’ हत्याकांड में जिला अदालत ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया। यह मामला मार्च 2025 में सामने आने के बाद देशभर में चर्चा में रहा था। अदालत का फैसला करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 गवाहों की गवाही के बाद आया।
लंदन से मेरठ लौटे थे सौरभ
Blue अभियोजन के अनुसार, सौरभ राजपूत पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी थे और काम के सिलसिले में लंदन में रहते थे। वह 24 फरवरी 2025 को मेरठ स्थित अपने घर लौटे थे। परिवार के साथ जन्मदिन मनाने के कुछ दिनों बाद 4 मार्च की रात उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस की जांच में आरोप लगाया गया कि उन्हें खाने में नशीली दवा दी गई, जिसके बाद उन पर धारदार हथियार से हमला किया गया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटकर एक बड़े नीले ड्रम में रखा गया और उसमें सीमेंट भरकर शव को छिपाने का प्रयास किया गया। इसी वजह से यह मामला मीडिया में ‘ब्लू ड्रम मर्डर केस’ के नाम से चर्चित हुआ।
पुलिस जांच में सामने आई कहानी
पुलिस के मुताबिक, सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के बीच संबंध थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि दोनों ने मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। जांच में कथित तौर पर चाकू, उस्तरा, सीमेंट, बालू और ड्रम की खरीद से संबंधित साक्ष्य भी सामने रखे गए।
पुलिस का आरोप था कि हत्या के बाद मुस्कान और साहिल मेरठ से निकलकर शिमला चले गए। जांच आगे बढ़ने पर दोनों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बाद में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। मई 2025 में दाखिल आरोपपत्र करीब 1,000 पन्नों का बताया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की हत्या तथा अपराध के स होने का प्रश्न भी सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। बचाव पक्ष ने कथित तौर पर अदालताक्ष्य मिटाने से संबंधित धाराएं लगाई गई थीं।
22 गवाहों की गवाही
Blue मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 22 गवाह पेश किए। इनमें सौरभ के परिवार के सदस्यों और उनके परिचितों के अलावा उन दुकानदारों की गवाही भी शामिल थी, जिनसे कथित तौर पर ड्रम, सीमेंट, बालू, चाकू और अन्य सामान खरीदे जाने की बात सामने आई थी। अभियोजन ने इन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को हत्या की पूरी कड़ी से जोड़ने का प्रयास किया।
मामले में प्रत्यक्षदर्शी होने का प्रश्न भी सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। बचाव पक्ष ने कथित तौर पर अदालत में यह तर्क रखा कि हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और आरोपियों को संपत्ति से जुड़े विवाद के संदर्भ में फंसाया गया है। वहीं अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
126 पेशियां और लंबी कानूनी प्रक्रिया
इस मामले की सुनवाई करीब 13 महीने चली। इस दौरान अदालत में कुल 126 पेशियां हुईं। 17 सितंबर 2026 को अंतिम बहस पूरी हुई। अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए राहत की मांग की
30 सितंबर को अदालत ने पहले दोनों आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया। दोषसिद्धि के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण सजा का निर्धारण है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अभियोजन पहले ही अधिकतम दंड की मांग कर चुका है, लेकिन अंतिम सजा अदालत के आदेश से तय होगी।
मामले का मानवीय पहलू
मामले की जांच और सुनवाई के दौरान परिवार और बच्चों से जुड़े पहलू भी सामने आए। रिपोर्टों के अनुसार, मुस्कान ने जेल में रहते हुए नवंबर 2025 में एक बच्ची को जन्म दिया था। वह मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला जेल में बंद रही है। फैसले से पहले जेल अधिकारियों ने दोनों आरोपियों के व्यवहार में बदलाव की जानकारी भी दी थी।
निष्कर्ष
Blue मेरठ का ब्लू ड्रम हत्याकांड अपने घटनाक्रम, शव को छिपाने के कथित तरीके और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों पर विचार करने के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया है। हालांकि, दोषी ठहराया जाना और सजा सुनाया जाना दो अलग कानूनी चरण हैं। अब अदालत द्वारा सजा के संबंध में आदेश दिया जाना इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा

