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BP. सिंह का 75 वर्ष की उम्र में निधन: ‘CID’ और ‘आहट’ के निर्माता को हार्ट अटैक, टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर

1. भारतीय टेलीविजन जगत के लिए दुखद खबर

भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़ी एक दुखद खबर ने दर्शकों और मनोरंजन जगत को भावुक कर दिया है। लोकप्रिय टीवी शो ‘CID’ और हॉरर सीरियल ‘आहट’ के निर्माता बी.पी. सिंह के निधन की खबर से टेलीविजन जगत में शोक का माहौल है। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर ने उन लाखों दर्शकों को झकझोर दिया है, जिन्होंने उनके बनाए कार्यक्रमों को वर्षों तक पसंद किया।

बी.पी. सिंह भारतीय टेलीविजन के उन रचनाकारों में शामिल रहे, जिन्होंने छोटे पर्दे पर अपराध, रहस्य और रोमांच की कहानियों को एक अलग पहचान दिलाई। उनके निर्देशन और निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। खास तौर पर ‘CID’ ने भारतीय टेलीविजन पर लंबे समय तक अपनी लोकप्रियता बनाए रखी और कई पीढ़ियों के दर्शकों का मनोरंजन किया।

उनके निधन की खबर केवल एक निर्माता के जाने का दुख नहीं है, बल्कि उस दौर की याद भी है, जब टेलीविजन पर कहानियों, किरदारों और मजबूत पटकथा के माध्यम से दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाया जाता था।

2. हार्ट अटैक से हुआ निधन, लंबे समय से नहीं थे स्वस्थ

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बी.पी. सिंह का निधन 27 अक्टूबर 2026 को मुंबई में हुआ। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें सुबह के समय दिल का दौरा पड़ा था। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें मुंबई के सांताक्रूज स्थित सूर्या अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बताया गया कि बी.पी. सिंह कुछ समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे। ‘CID’ में इंस्पेक्टर दया का किरदार निभाने वाले अभिनेता दयानंद शेट्टी ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि वह काफी समय से अस्वस्थ थे।

दयानंद शेट्टी के अनुसार, बी.पी. सिंह का जीवन अपने काम और कंटेंट निर्माण के इर्द-गिर्द ही घूमता था। वह अपने काम के प्रति बेहद समर्पित थे और शूटिंग तथा कैमरे की बारीकियों को अच्छी तरह समझते थे। उनके जाने से कलाकारों और तकनीकी टीम से जुड़े लोगों ने एक अनुभवी मार्गदर्शक खो दिया है।

CID’ ने घर-घर में बनाई पहचान

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C.I.D. (1998)

बी.पी. सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में टीवी शो ‘CID’ का नाम सबसे ऊपर आता है। वर्ष 1998 में शुरू हुए इस अपराध-आधारित धारावाहिक ने भारतीय टेलीविजन पर अपनी अलग पहचान बनाई। शो में अपराध की गुत्थियां सुलझाने वाली टीम, जांच के दिलचस्प तरीके और यादगार संवाद दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।

शिवाजी साटम ने एसीपी प्रद्युमन, आदित्य श्रीवास्तव ने इंस्पेक्टर अभिजीत और दयानंद शेट्टी ने इंस्पेक्टर दया की भूमिका निभाकर दर्शकों का दिल जीता। इन किरदारों की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि वे टेलीविजन की दुनिया के प्रतिष्ठित चेहरों में शामिल हो गए।

‘कुछ तो गड़बड़ है’ जैसे संवाद और ‘दया, दरवाजा तोड़ दो’ जैसी चर्चित पंक्तियां लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन गईं। इस शो ने कई वर्षों तक दर्शकों को अपराध, रहस्य और जांच की दुनिया से जोड़े रखा।

‘CID’ की सफलता में बी.पी. सिंह की कहानी कहने की शैली, तकनीकी समझ और मजबूत टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह शो उनकी रचनात्मक सोच का ऐसा उदाहरण बना, जिसे आज भी दर्शक याद करते हैं।

4. ‘आहट’ से डर और रोमांच को मिली नई पहचान

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बी.पी. सिंह केवल अपराध से जुड़ी कहानियों तक सीमित नहीं थे। उन्होंने हॉरर और सुपरनैचुरल कहानियों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय काम किया। वर्ष 1995 में प्रसारित हुआ धारावाहिक ‘आहट’ भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय हॉरर शोज में गिना जाता है।

इस कार्यक्रम में भूत-प्रेत, रहस्यमयी घटनाओं और अलौकिक शक्तियों से जुड़ी कहानियां दिखाई जाती थीं। डरावना माहौल, रहस्यपूर्ण घटनाक्रम और अप्रत्याशित मोड़ इसकी खासियत थे। उस दौर में जब टेलीविजन पर हॉरर कंटेंट की आज जैसी विविधता नहीं थी, तब ‘आहट’ ने दर्शकों के बीच अपनी मजबूत जगह बनाई।

इस शो ने खासकर 1990 और 2000 के दशक में टेलीविजन देखने वाले दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। ‘CID’ के माध्यम से अपराध और जांच की कहानियां पेश करने वाले बी.पी. सिंह ने ‘आहट’ के जरिए यह भी साबित किया कि वह अलग-अलग विधाओं में दर्शकों को बांधे रखने की क्षमता रखते थे।

5. कैमरे के पीछे से शुरू हुआ था सफर

बी.पी. सिंह का पूरा नाम बृजेंद्र पाल सिंह था। उनका जन्म देहरादून में हुआ था और उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से सिनेमैटोग्राफी की पढ़ाई की थी। वर्ष 1973 में उन्होंने दूरदर्शन के साथ समाचार कैमरामैन के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।

कैमरे के पीछे काम करने के अनुभव ने उन्हें दृश्यों की बारीकियों, प्रकाश व्यवस्था और कहानी को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारने की गहरी समझ दी। आगे चलकर उन्होंने निर्माण और निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और अपनी अलग पहचान स्थापित की।

दूरदर्शन के धारावाहिक ‘एक शून्य शून्य’ और बाद में ‘CID’ जैसे कार्यक्रमों ने उनके करियर को नई दिशा दी। उन्होंने फायरवर्क्स प्रोडक्शंस के माध्यम से भी टेलीविजन की दुनिया में अपनी पहचान मजबूत की।

6. ‘CID’ में खुद भी निभाया था अहम किरदार

बी.पी. सिंह की एक खास पहचान यह भी थी कि वह अपने लोकप्रिय शो ‘CID’ में कभी-कभी अभिनय करते नजर आते थे। उन्होंने इसमें डीसीपी शमशेर सिंह चिटोले का किरदार निभाया, जो अपने अलग अंदाज और हास्यपूर्ण व्यक्तित्व के कारण दर्शकों को पसंद आया।

इस तरह वह केवल पर्दे के पीछे रहकर कहानी गढ़ने वाले निर्माता नहीं थे, बल्कि पर्दे पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे। निर्माता, निर्देशक और अभिनेता के रूप में उनका अनुभव शो को एक अलग पहचान देने में सहायक रहा।

उन्होंने अपने करियर में कई अन्य टेलीविजन परियोजनाओं से भी जुड़कर काम किया। भारतीय टेलीविजन में अपराध और रहस्य आधारित कार्यक्रमों को लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

7. अशोक पंडित और टीवी कलाकारों ने जताया शोक

बी.पी. सिंह के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म और टेलीविजन जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने उन्हें शानदार फिल्मकार, अच्छा इंसान और अपना प्रिय मित्र बताया। उन्होंने कहा कि ‘CID’ और ‘आहट’ के माध्यम से सिंह ने देशभर के दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा और उनका काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

दयानंद शेट्टी की भावुक प्रतिक्रिया से भी यह स्पष्ट हुआ कि बी.पी. सिंह का अपने कलाकारों के साथ गहरा रिश्ता था। उनके लिए काम केवल पेशा नहीं, बल्कि जुनून था। उनकी कार्यशैली और अनुभव ने कलाकारों तथा तकनीकी टीम को बहुत कुछ सीखने का अवसर दिया।

8. अंतिम संस्कार और विरासत

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बी.पी. सिंह के अंतिम संस्कार की तैयारी 28 अक्टूबर 2026 के लिए की गई थी। उनके निधन से भारतीय टेलीविजन ने एक ऐसे निर्माता-निर्देशक को खो दिया, जिन्होंने अपराध और हॉरर जैसी विधाओं को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी विरासत केवल उनके बनाए धारावाहिकों तक सीमित नहीं है। ‘CID’ के यादगार किरदार और ‘आहट’ की रहस्यमयी कहानियां उन दर्शकों की यादों में हमेशा जीवित रहेंगी, जिन्होंने वर्षों तक इन कार्यक्रमों का आनंद लिया।

बी.पी. सिंह का निधन भारतीय टेलीविजन के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके काम ने यह साबित किया कि अच्छी कहानी, प्रभावशाली प्रस्तुति और दर्शकों से जुड़ने की क्षमता किसी भी कार्यक्रम को कालजयी बना सकती है। भले ही वह आ

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