PM मोदी ने वाल्मीकि जयंती पर देशवासियों को दी बधाई, बोले— महर्षि के विचार हर युग में करेंगे मार्गदर्शन
नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं और आने वाले समय में भी राष्ट्र को समृद्ध करते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने मानवता के लिए महर्षि के अनमोल संदेशों को देशवासियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बताया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में लिखा, “आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की असीम शुभकामनाएं। उनके सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। मानवता के लिए उनके अनमोल संदेश देशवासियों के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।”
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक सुभाषित भी साझा किया। इसके माध्यम से उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के हृदय में जागी करुणा और रामायण की रचना की प्रेरणा को रेखांकित किया। उनका संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भारतीय साहित्य, मानवीय संवेदना और सामाजिक मूल्यों की महत्ता भी सामने आई।
महर्षि वाल्मीकि के जीवन और विचारों का महत्व
महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत के महान कवियों में गिना जाता है। परंपरा के अनुसार, उन्हें आदिकवि कहा जाता है और उनके द्वारा रचित रामायण भारतीय साहित्य तथा सांस्कृतिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण आधार है।
रामायण में भगवान राम के जीवन, उनके कर्तव्य, संघर्ष, आदर्श और मानवीय संबंधों का वर्णन मिलता है। इस महाकाव्य ने सदियों से भारतीय समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक चेतना को प्रभावित किया है।
महर्षि वाल्मीकि का महत्व केवल रामायण की रचना तक सीमित नहीं है। उनकी परंपरा से जुड़े संदेश करुणा, धैर्य, सत्य, कर्तव्य और मानवता जैसे मूल्यों पर भी जोर देते हैं। यही कारण है कि वाल्मीकि जयंती पर देशभर में धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा उनके योगदान को याद किया जाता है।
PM मोदी ने भी अपने संदेश में इसी विरासत को रेखांकित करते हुए कहा कि महर्षि के विचार हर युग में राष्ट्र को प्रेरित करते रहेंगे।
संस्कृत सुभाषित साझा कर बताई करुणा की महत्ता
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के साथ एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें उस प्रसंग का उल्लेख है जब महर्षि वाल्मीकि ने क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक पक्षी को शिकारी के बाण से घायल होते देखा। मादा पक्षी के करुण विलाप को सुनकर उनके हृदय में गहरी संवेदना उत्पन्न हुई।
इस प्रसंग को भारतीय काव्य परंपरा में प्रथम श्लोक की उत्पत्ति से जोड़कर देखा जाता है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए सुभाषित का भाव भी यही है कि किसी जीव के दुख को देखकर उत्पन्न हुई करुणा काव्य के रूप में अभिव्यक्त हुई और रामायण की रचना का आधार बनी।
इस संदेश के माध्यम से प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व में निहित करुणा, समभाव, तपस्या और विद्वत्ता को रेखांकित किया।
‘मन की बात’ में भी किया था महर्षि वाल्मीकि को याद
वाल्मीकि जयंती से एक दिन पहले, रविवार को प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी महर्षि वाल्मीकि का उल्लेख किया था।
उन्होंने कहा था कि हजारों वर्ष बीत जाने के बाद भी महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज लोगों को नई सीख देती है। उनके अनुसार, रामायण निरंतर प्रयास करते रहने के साथ सेवा, करुणा और सामाजिक समरसता का महत्व भी समझाती है।
PM ने भगवान राम के चरित्र का उल्लेख करते हुए माता शबरी के प्रति उनके प्रेम और निषादराज के साथ उनकी मित्रता को सामाजिक सद्भाव का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सबको साथ लेकर चलने का भाव आज भी समाज के लिए प्रासंगिक है।
अयोध्या के राम मंदिर और महर्षि वाल्मीकि का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अयोध्या के राम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी से जुड़े मंदिरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास भारत की उस सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध करते हैं, जिसमें सेवा, सामाजिक समरसता और करुणा को विशेष महत्व दिया गया है।
उन्होंने अयोध्या के हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखे जाने का जिक्र करते हुए इसे उनकी विरासत के सम्मान से जोड़ा। अयोध्या स्थित महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी उनके नाम और योगदान को व्यापक पहचान देने वाला एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
देशभर में मनाई जाती है वाल्मीकि जयंती
वाल्मीकि जयंती महर्षि वाल्मीकि के जीवन और साहित्यिक योगदान को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन विभिन्न स्थानों पर शोभायात्राएं, धार्मिक सभाएं, भजन-कीर्तन और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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