Andhra चुनाव में धांधली? CJP नेता का वीडियो गंभीर सवाल उठाता है, चंद्रबाबू नायडू सरकार पर लगाए बूथ कैप्चरिंग के आरोप
आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में नगर निकाय चुनावों की मतगणना के बीच CJP (Cockroach Janta Party) के नेता अशुतोष रंका ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आंध्र प्रदेश में मतदान के दौरान बूथ कैप्चरिंग और चुनावी धांधली की घटनाएं हुई हैं।
अशुतोष रंका ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सवाल उठाया कि एक तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैदराबाद में लोकतंत्र बचाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में कथित तौर पर चुनावी अनियमितताएं हो रही हैं। उनके इस बयान और साझा किए गए वीडियो ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
हालांकि, वीडियो में दिखाई गई घटनाओं और बूथ कैप्चरिंग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों को फिलहाल राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
CJP नेता अशुतोष रंका ने क्या आरोप लगाए?
CJP नेता अशुतोष रंका ने 3 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि जब अमित शाह हैदराबाद में ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली कर रहे हैं, उसी समय पड़ोसी आंध्र प्रदेश में बूथ कैप्चरिंग और चुनावी धांधली के दृश्य सामने आ रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके सहयोगियों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रंका की पोस्ट का मुख्य संदेश यह था कि लोकतंत्र की रक्षा की बात करने वाले राजनीतिक दलों को अपने शासन वाले राज्यों में भी चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब आंध्र प्रदेश के 92 शहरी स्थानीय निकायों में हुए चुनावों की मतगणना चल रही थी। ऐसे में वीडियो और आरोपों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
अमित शाह की रैली और आंध्र प्रदेश का चुनावी विवाद
इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू अमित शाह की हैदराबाद में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली भी है।
2 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में लोकतंत्र और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। भाजपा की ओर से आयोजित इस अभियान में विपक्षी INDIA गठबंधन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस भी प्रमुख रही।
इसी पृष्ठभूमि में अशुतोष रंका ने आंध्र प्रदेश की घटनाओं को उठाते हुए भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर सवाल खड़े किए।
उनका आरोप है कि लोकतंत्र की रक्षा का संदेश देने के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
आंध्र प्रदेश के 92 शहरी निकायों में हुई मतगणना
आंध्र प्रदेश में रविवार को शहरी स्थानीय निकायों के लिए मतदान हुआ था। मंगलवार, 3 नवंबर को मतगणना शुरू हुई।
राज्य के कुल 92 शहरी स्थानीय निकायों में चुनावी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इनमें 13 नगर निगम और 79 नगरपालिकाएं तथा नगर पंचायतें शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार:
- कुल 96,89,061 मतदाता पंजीकृत थे।
- इनमें से 60,22,411 मतदाताओं ने मतदान किया।
- कुल मतदान प्रतिशत 62.16 प्रतिशत दर्ज किया गया।
- मतगणना के लिए 138 केंद्र बनाए गए थे।
- 47,817 अधिकारियों और कर्मचारियों को चुनावी प्रक्रिया में लगाया गया था।
मतदान और मतगणना के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों की निगरानी के लिए CCTV कैमरे भी लगाए गए थे।
इन चुनावों में सत्तारूढ़ TDP, जनसेना पार्टी और भाजपा का गठबंधन मुकाबले में है। वहीं वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) विपक्ष की भूमिका में चुनाव लड़ रही है।
जगन मोहन रेड्डी ने भी लगाए गंभीर आरोप
CJP नेता के वीडियो से पहले आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी भी नगर निकाय चुनावों में कथित धांधली का मुद्दा उठा चुके हैं।
जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि कडप्पा जिले के पुलिवेंदुला में 80 मतदान केंद्रों में से 70 पर उनकी पार्टी के पोलिंग एजेंटों को प्रवेश नहीं करने दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर पार्टी एजेंटों को जबरन बाहर निकाला गया और मतदाताओं को डराने-धमकाने की घटनाएं हुईं।
जगन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मतदान केंद्रों पर वोटर पर्चियां छीनी गईं और फर्जी मतदान कराया गया। उन्होंने इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए दोबारा मतदान कराने की मांग की।
YSRCP प्रमुख ने राज्य निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, पुलिवेंदुला के 70 बूथों पर अनियमितताओं की शिकायत के बावजूद केवल चार बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश देना पर्याप्त नहीं है।
हालांकि, ये सभी आरोप YSRCP नेतृत्व की ओर से लगाए गए हैं और इनकी अंतिम पुष्टि जांच तथा संबंधित अधिकारियों के निष्कर्षों से ही हो सकती है।
पत्रकारों पर हमले ने भी बढ़ाई चिंता
आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान पत्रकारों पर हमले की घटनाएं भी सामने आई हैं।
पुलिवेंदुला में चुनावी कवरेज कर रही इंडिया टुडे की टीम पर भीड़ ने हमला किया। रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने कैमरा क्षतिग्रस्त कर दिया और मेमोरी कार्ड तथा बैटरी छीन ली।
इस घटना के बाद पत्रकारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और CCTV फुटेज की मदद से हमलावरों की पहचान करने की बात कही।
दूसरी तरफ TDP नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्षी कार्यकर्ता चुनावी माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। पार्टी ने YSRCP के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
इस तरह राज्य में चुनावी हिंसा और धांधली के आरोपों को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक पक्ष आमने-सामने हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस पूरे विवाद में आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर आयोग की जिम्मेदारी होती है कि वह निष्पक्ष जांच करे और जरूरत पड़ने पर उचित कार्रवाई करे।
पुनर्मतदान का निर्णय भी संबंधित शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और निर्धारित चुनावी नियमों के आधार पर लिया जाता है।
YSRCP ने आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया है, जबकि CJP नेता ने भी अपने वीडियो के माध्यम से चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर राज्य निर्वाचन आयोग की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया और वीडियो की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
क्या आंध्र प्रदेश में चुनावी निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है?
आंध्र प्रदेश का यह विवाद अब केवल TDP और YSRCP के बीच राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं रह गया है। CJP नेता अशुतोष रंका की सोशल मीडिया पोस्ट ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर चल रही लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता की बहस से भी जोड़ दिया है।
एक तरफ भाजपा और उसके सहयोगी दल चुनावी व्यवस्था की मजबूती की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
ऐसे में कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिलना जरूरी है:
- क्या साझा किए गए वीडियो में वास्तव में बूथ कैप्चरिंग की घटनाएं दिखाई गई हैं?
- क्या चुनाव आयोग ने इन घटनाओं की जांच शुरू की है?
- पुलिवेंदुला सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्मतदान की जरूरत है या नहीं?
- क्या पत्रकारों और मतदान एजेंटों पर हुए हमलों के मामलों में दोषियों की पहचान होगी?
इन सवालों का जवाब जांच रिपोर्ट और आधिकारिक कार्रवाई से ही मिल सकता है।
निष्कर्ष
आंध्र प्रदेश के नगर निकाय चुनावों के दौरान सामने आए विवाद ने एक बार फिर भारतीय चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर बहस तेज कर दी है। CJP नेता अशुतोष रंका का वीडियो, जगन मोहन रेड्डी के आरोप और पत्रकारों पर हमले की घटनाएं इस पूरे मामले को गंभीर बनाती हैं।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राज्य में व्यापक स्तर पर चुनावी धांधली साबित हो चुकी है। इसके लिए निष्पक्ष जांच, वीडियो साक्ष्यों का सत्यापन और निर्वाचन आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट जरूरी है।
लोकतंत्र में चुनाव जीतना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना भी है कि प्रत्येक मतदाता बिना डर और दबाव के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके। अब सबकी निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग की कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
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