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इंडिया सावधान न्यूज़ मजहर अंसारी

लखनऊ बदायूं जनपद की तहसील में काफी समय पूर्व से चला आ रहा शत्रु संपत्ति पर कब्जे को लेकर अनेकों शिकायतें अधिकारियों से लेकर शासन तक को भेजी गईं थीं

जिसको आज तक प्रदेश सरकार ने अपने कब्जे में नहीं ले पा रही है,जबकि प्रदेश सरकार ने विगत महीनों पूर्व में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को एक आदेश पारित किया था

जिसमें प्रदेश की सभी निस्क्रांत और शत्रु संपत्तियों की जानकारी का पूरा ब्योरा एकत्र करके ऑन लाइन किए जाने को कहा गया था,राजस्व परिषद के अध्यक्ष दीपक त्रवेदी ने अपने आदेश में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को कहा गया था

की निस्क्रांत शत्रु संपत्तियों का ब्योरा पूरा एकत्र करते हुए राजस्व परिषद की वेव साइड पर अपलोड किया जाए,और इन संपत्तियों पर कोन काबिज है यह भी बताया जाए

, शत्रु संपत्ति ऐसे लोग जो देश के विभाजन के समय 1062,1965 ,1971 के युद्धों के बाद चीन या पाकिस्तान जाकर बस गए और उन्होंने वहां जाकर नागरिकता हासिल कर ली हो भारत के रक्षा अधिनियम 1962 के तहत सरकार उनकी

संपत्ति को जब्त कर अपने कब्जे में ले सकती है,तथा देश छोड़कर जाने वाले व्यक्तियों की संपत्ति को शत्रु संपत्ति कहा जाता है,

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शमशुल निशा पत्नी अय्यूब खां और अमीर अहमद ख़ां देश के विभाजन के समय देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए,

जो की उपरोक्त संपत्ति लगभग पन्द्रह करोड़ रुपए की हो सकती है मगर उक्त संपत्ति पर भू माफियाओं ने सांठ गांठ कर पत्रावलियों में हेर फेर कराकर कब्जा कर लिया और उस पर प्लाटिंग कर निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है जबकि उक्त

भूमि की शिकायत उपजिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक की जा चुकी है,

अब देखना यह होगा कि इसकी जांच की आंच कहां तक जाती है या बाबा जी का बुल्डोजर अपना कार्य करता नजर आयेगा।

वहीं एक पत्र जिलाधिकारी बदायूं को उपरोक्त शत्रु संपत्ति के लिए भारत सरकार के अधीन अधिग्रहण किए जाने के लिए प्रार्थना पत्र सौंपा गया था जिसको माफियाओं और तहसील कर्मचारियों की संलिप्तता के चलते ठंडा पड़ता चला गया ।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से एक पत्र पत्रांक संख्या 171/8/ निoसo/02-2019 दिनांकित 5 अक्टूबर 2020 को जिलाधिकारी बदायूं को भेजा गया जिसमें उपरोक्त विवादित संपत्ति

की जांच कराकर निस्तारण किए जाने को कहा गया मगर तात्कालीन जिलाधिकारी प्रशांत किशोर का स्थानांतरण हो जाने के कारण उक्त शत्रु संपत्ति/ विवादित भूमि की जांच अधर में लटक गई

और इसका बहुत बड़ा फायदा भू माफियाओं ने उठाया और तहसील सहसवान में रखी पत्रावलियों में हेर फेर कराकर भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर प्लाटिंग कर विक्रय करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया,

जिस पर निर्माण कार्य बहुत तेजी के साथ किया जा रहा है।

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