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नई दिल्ली, 01 जून  राजधानी दिल्ली में गत सोमवार को हुई तूफानी बारिश से काफी नुकसान पहुंचा
है। कई पेड़-पौधों समेत पुरानी और जर्जर इमारतों के कुछ हिस्से जमींदोज हो गए। इस दौरान दिल्ली की

ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के गुंबद की बुर्जी गिरने और गुंबद को हुए नुकसान की खबरें भी सुर्खियों में छाई
रहीं।

आखिरकार दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इसकी मरम्मत कराए जाने का फैसला लेकर आज से ही इस पर अमल भी
शुरू कर दिया है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि जामा मस्जिद की गोल गुंबद की मरम्मत का काम जल्द से
जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

बोर्ड की तरफ से एक टीम का गठन किया गया है जिसमें कई विशेषज्ञ भी शामिल
हैं। दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने जामा मस्जिद परिसर का दौरा करके मस्जिद के शाही

इमाम सैयद अहमद बुखारी से मुलाकात भी की है। उनके साथ इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज
(इंटैक) और बोर्ड की टीम भी मौजूद थी।

जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान और इंटैक की
टीम के सदस्यों को जमा मस्जिद परिसर में तेज आंधी और बारिश की वजह से होने वाले नुकसान से अवगत

कराया। इमाम ने बताया कि 30 मई को आई तेज आंधी और बारिश से गुंबद की बुर्जी के साथ-साथ मस्जिद में
लगे कई भारी पत्थर भी गिर गए हैं।

उनका कहना है कि एक हिस्सा अभी भी गुंबद पर झूल रहा है और उसके
किसी भी वक्त गिर जाने का खतरा है।

इसकी वजह से किसी तरह की अनहोनी होने की संभावना से इंकार नहीं
किया जा सकता है। इसलिए लटके हुए हिस्से को फौरन हटाए जाने की जरूरत है।

इमाम की बातों पर बोर्ड चेयरमैन ने भी सहमति व्यक्त करते हुए कहा है कि जल्द से जल्द इस काम को पूरा कर
लिया जाएगा। 30 मई को जैसे ही शाम में तेज बारिश और तूफान आया

, उससे जामा मस्जिद के गोल गुंबद की
पीतल के बुर्जी गिरने की खबर ने काफी हलचल पैदा कर दी थी।

मौके पर मौजूद टीम ने बताया है कि गुंबद पर
लगी बुर्जी को देखने से पता लगा है कि यह कई तरह की धातु को मिलाकर बनाई गई है

लेकिन ज्यादातर हिस्सा
पीतल का है और यह काफी भारी है। इसे लोहे के एक राड में डाल कर लगाया गया है।

इसके हिलने की वजह से
गुंबद को भी काफी नुकसान पहुंचा है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के सेक्शन अफसर हाफिज महफूज मोहम्मद ने बताया कि जामा मस्जिद की बुर्जी गिरने की
जानकारी मिलने पर इंजीनियरों की एक टीम सर्वे करने के लिए भेजी थी। जामा मस्जिद की मरम्मत नहीं होने की

वजह इसके जर्जर होने की खबरें पिछले कई सालों से आ रही हैं। शाही इमाम के जरिए शहरी विकास मंत्रालय और
पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान को कई बार पत्र लिखकर मस्जिद की खस्ता हालत के बारे में जानकारी दी गई है। इमाम

की तरफ से दिल्ली वक्फ बोर्ड को भी जामा मस्जिद के खस्ता हालत के बारे में आगाह किया गया है जिस पर
बोर्ड की तरफ से जामा मस्जिद की मरम्मत का फैसला लिए जाने की खबरें भी आई थीं।

बोर्ड ने मरम्मत के लिए
विशेषज्ञों की एक टीम से जामा मस्जिद का सर्वे भी कराया है और इसकी मरम्मत के लिए 50 करोड़ रुपये के
बजट की भी व्यवस्था की है।