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गुवाहाटी, 02 सितंबर ( पेट्रोलियम मंत्रालय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी)
को सूचित किया है कि ऑयल इंडिया लिमिटेड परियोजना के लिए अरुणाचल प्रदेश के दो गांवों में

प्रभावित लोगों को मुआवजा दिए बिना आदिवासियों को जबरन नहीं हटाया जाएगा।
केंद्रीय मंत्रालय के आश्वासन के बाद, मानवाधिकार आयोग ने चकमा डेवलपमेंट फाउंडेशन ऑफ

इंडिया (सीडीएफआई) द्वारा दायर शिकायत को बंद कर दिया है। सीडीएफआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति
में शुक्रवार को यह जानकारी दी।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने एनएचआरसी को यह भी सूचित किया है कि कानून के अनुसार कार्रवाई की
जाएगी। इसके बाद आयेाग ने 31 अगस्त को एक आदेश में शिकायत को बंद कर दिया।

इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए, सीडीएफआई के संस्थापक सुहास चकमा ने कहा कि आयोग का

यह सुरक्षात्मक आदेश परियोजना से प्रभावित चकमा और देवरी लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित
करने में अहम भूमिका निभाएगा।

तेल और गैस की खोज और उत्पादन के लिए अरुणाचल प्रदेश के मुडोक्का नाला और सोमपोई-

द्वितीय गांवों से चकमा और देवरी लोगों को कथित तौर पर जबरन हटाए जाने के खिलाफ एक
शिकायत 20 जनवरी को दायर की गयी थी।

सीडीएफआई की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ओआईएल कंपनी के साथ मिलकर राज्य

सरकार भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों के तहत भूमि का उचित मुआवजा दिए बिना चकमा और
देवरी लोगों को हटा रही है।