AAP ने पूर्व BSP प्रमुख जसवीर सिंह गढ़ी को चमकौर साहिब का हलका इंचार्ज बनाया
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के मौजूदा चेयरमैन और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी को श्री चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र का हलका इंचार्ज नियुक्त किया है। 27 अगस्त 2026 को सामने आया यह फैसला पंजाब की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चमकौर साहिब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है और लंबे समय तक कांग्रेस नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़ी रही है।
AAP के इस कदम को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की जमीनी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। हलका इंचार्ज के तौर पर गढ़ी की जिम्मेदारी पार्टी संगठन को मजबूत करना, स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और विधानसभा क्षेत्र में AAP की राजनीतिक पकड़ बढ़ाना होगी। हालांकि, उनकी नियुक्ति को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट की गारंटी नहीं माना जा सकता। पार्टी ने फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है कि गढ़ी ही अगले चुनाव में AAP के उम्मीदवार होंगे।
दलित चेहरे पर AAP का दांव
जसवीर सिंह गढ़ी की राजनीतिक पहचान मुख्य रूप से दलित राजनीति से जुड़ी रही है। वह कई वर्षों तक BSP में सक्रिय रहे और पंजाब BSP के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। इसके कारण पंजाब के दलित मतदाताओं के बीच उनकी एक स्थापित राजनीतिक पहचान है।
चमकौर साहिब में उन्हें जिम्मेदारी देना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। ऐसे में AAP ने एक ऐसे नेता को संगठन की कमान दी है, जिसका राजनीतिक आधार और सार्वजनिक छवि दलित मुद्दों से गहराई से जुड़ी हुई है। पार्टी की कोशिश को SC मतदाताओं के बीच अपना संगठन मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
BSP से AAP तक का राजनीतिक सफर
गढ़ी का AAP तक पहुंचने का राजनीतिक सफर भी इस नियुक्ति को खास बनाता है। उन्होंने 2019 में सरकारी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था। जून 2019 में मायावती ने उन्हें पंजाब BSP का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। उन्होंने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव फगवाड़ा से BSP उम्मीदवार के रूप में लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आनंदपुर साहिब सीट से BSP प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और वहां भी उन्हें सफलता नहीं मिली।
नवंबर 2024 में BSP ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके कुछ ही समय बाद, 1 जनवरी 2025 को गढ़ी अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदगी में AAP में शामिल हुए। मार्च 2025 में उन्हें पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया।
इस तरह एक पूर्व BSP प्रदेश अध्यक्ष का AAP में शामिल होना और बाद में महत्वपूर्ण संवैधानिक आयोग की जिम्मेदारी संभालना पंजाब की दलित राजनीति में उल्लेखनीय घटनाक्रम रहा है।
चमकौर साहिब क्यों है महत्वपूर्ण?
चमकौर साहिब पंजाब की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी इस सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। चन्नी की राजनीतिक पहचान इस क्षेत्र के साथ काफी मजबूत रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP के डॉ. चरणजीत सिंह ने यहां से जीत हासिल की थी और वह मौजूदा विधायक हैं।
यही कारण है कि गढ़ी को यहां हलका इंचार्ज बनाना केवल सामान्य संगठनात्मक नियुक्ति नहीं माना जा रहा। AAP एक ओर अपने मौजूदा विधायक के क्षेत्र में संगठन को मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाके में अपने राजनीतिक आधार को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
कुछ राजनीतिक विश्लेषणों में इस नियुक्ति को संभावित उम्मीदवार बदलाव की अटकलों से भी जोड़ा गया है। हालांकि, अभी तक AAP ने मौजूदा विधायक को हटाने या गढ़ी को उम्मीदवार बनाने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए इन अटकलों को फिलहाल राजनीतिक संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
2027 चुनाव की तैयारी तेज
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। AAP के लिए चमकौर साहिब जैसी आरक्षित सीटों पर मजबूत संगठन तैयार करना विशेष महत्व रखता है।
गढ़ी को हलका इंचार्ज बनाकर पार्टी संभवतः बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, पुराने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और नए मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश करेगी। उनके BSP के पुराने अनुभव का इस्तेमाल भी पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।
एक पूर्व BSP प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण गढ़ी को पंजाब की दलित राजनीति, सामाजिक समीकरणों और स्थानीय राजनीतिक नेटवर्क की अच्छी समझ है। AAP के लिए यह अनुभव खासतौर पर उन क्षेत्रों में मददगार हो सकता है जहां SC मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है।
SC आयोग के चेयरमैन के रूप में भूमिका
गढ़ी वर्तमान में पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन हैं। इस पद पर रहते हुए वह अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े विभिन्न मामलों और शिकायतों पर सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहे हैं। आयोग ने राजनीतिक नेताओं से जुड़े कुछ विवादित मामलों में भी स्वतः संज्ञान लिया, जिसके कारण गढ़ी कई बार राजनीतिक सुर्खियों में रहे।
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा से जुड़े कथित जातिगत टिप्पणी विवाद और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से संबंधित मामले में आयोग की कार्रवाई ने गढ़ी को राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बनाया।
उनकी यह सार्वजनिक सक्रियता AAP के लिए राजनीतिक रूप से उपयोगी हो सकती है, क्योंकि पार्टी उन्हें दलित समुदाय से जुड़े मुद्दों पर मुखर नेता के रूप में प्रस्तुत कर सकती है।
कांग्रेस के लिए बढ़ सकती है चुनौती
चमकौर साहिब में गढ़ी की नियुक्ति कांग्रेस के लिए भी महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है। चन्नी की इस क्षेत्र में मजबूत पहचान है, लेकिन AAP अब उनके सामने एक ऐसे नेता को सक्रिय कर रही है जिसकी राजनीतिक पृष्ठभूमि दलित आंदोलन और BSP से जुड़ी रही है।
यह नियुक्ति कांग्रेस और AAP के बीच दलित वोटों को लेकर प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकती है। पंजाब की राजनीति में दलित मतदाता पहले से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए आरक्षित विधानसभा सीटों पर दोनों दलों की रणनीति चुनावी परिणामों पर प्रभाव डाल सकती है।
क्या गढ़ी लड़ेंगे चुनाव?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AAP 2027 में जसवीर सिंह गढ़ी को चमकौर साहिब से उम्मीदवार बनाएगी। फिलहाल इसका कोई आधिकारिक उत्तर नहीं है। हलका इंचार्ज की जिम्मेदारी और विधानसभा टिकट दो अलग-अलग संगठनात्मक फैसले हैं।
पार्टी पहले उनके संगठनात्मक प्रदर्शन, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और मतदाताओं के बीच प्रभाव का आकलन कर सकती है। इसके बाद ही उम्मीदवार चयन पर फैसला होने की संभावना होगी।
निष्कर्ष
AAP द्वारा पूर्व BSP प्रदेश अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी को चमकौर साहिब का हलका इंचार्ज बनाया जाना पंजाब की 2027 चुनावी तैयारियों में एक अहम राजनीतिक कदम है। गढ़ी की दलित राजनीति में पृष्ठभूमि, वर्तमान में SC आयोग के चेयरमैन के रूप में उनकी भूमिका और BSP से AAP तक का सफर इस नियुक्ति को विशेष महत्व देता है।
चमकौर साहिब में कांग्रेस के मजबूत आधार और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की पहचान को देखते हुए AAP का यह फैसला रणनीतिक माना जा रहा है। हालांकि, इसे गढ़ी को विधानसभा टिकट देने का आधिकारिक संकेत कहना अभी जल्दबाजी होगी। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह संगठन को कितना मजबूत करते हैं और AAP इस आरक्षित सीट पर अपनी राजनीतिक स्थिति को किस हद तक मजबूत कर पाती है।
