Amit शाह का दावा: पीएम मोदी के जल प्रयासों से गुजरात हुआ सूखा-मुक्त, 25 साल में नहीं पड़ा बड़ा सूखा
केंद्रीय गृह मंत्री Amit शाह ने गुजरात में जल संरक्षण और पानी की उपलब्धता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए दावा किया है कि 2001 से 2026 तक गुजरात में कोई बड़ा सूखा नहीं पड़ा। शाह ने कहा कि जल संरक्षण, चेक डैम, नर्मदा परियोजना और सिंचाई से जुड़े कई कदमों ने राज्य की पानी की तस्वीर बदल दी है।
Amit शाह ने यह बात 27 अगस्त 2026 को गुजरात के अमरेली जिले के दुधाला गांव में ‘गुजरात गौरव सरोवर’ के उद्घाटन के दौरान कही। करीब 21 एकड़ में फैली इस झील की जल भंडारण क्षमता लगभग 40 करोड़ लीटर बताई गई है। इसका उद्देश्य खेती और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करना है।
2001 के बाद बदली गुजरात की पानी की तस्वीर
Amit शाह ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के बड़े हिस्से में पानी की गंभीर समस्या थी। उनके मुताबिक, इन क्षेत्रों में जल संकट के कारण लोगों और किसानों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था।
शाह ने दावा किया कि मोदी सरकार ने जल संकट से निपटने के लिए बड़े स्तर पर जल संरक्षण का काम शुरू किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 तक करीब 1.5 लाख चेक डैम बनाए गए। इसके अलावा तालाबों, जलाशयों और नदियों के पुनर्जीवन पर भी जोर दिया गया।
शाह के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर निकलने देने के बजाय उसे स्थानीय स्तर पर रोकना और जमीन के भीतर पहुंचाना था। उनका कहना था कि भूजल स्तर बढ़ने से किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर पानी उपलब्ध हुआ और खेती का क्षेत्र भी बढ़ा।
नर्मदा परियोजना को बताया अहम मोड़
Amit शाह ने गुजरात की जल व्यवस्था में नर्मदा परियोजना की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नर्मदा परियोजना की आधारशिला 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी, लेकिन इसके बांध के गेट नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए। शाह के अनुसार, इसके बाद नर्मदा का पानी सौराष्ट्र और कच्छ सहित गुजरात के कई क्षेत्रों तक पहुंचा।
उन्होंने SAUNI योजना का भी उल्लेख किया। इस योजना के जरिए नर्मदा के अतिरिक्त पानी को सौराष्ट्र के विभिन्न बांधों और जलाशयों तक पहुंचाने की कोशिश की गई। शाह ने कहा कि उत्तर और मध्य गुजरात में लगभग 10,000 जलाशयों में नर्मदा का पानी पहुंचाया जा रहा है।
शाह ने सुझलाम सुफलाम योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर गुजरात में जलस्तर बढ़ाने और जल उपलब्धता सुधारने के लिए इस तरह की योजनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘इस बार भी नहीं आई 1980 के दशक जैसी स्थिति’
Amit शाह ने गुजरात के पुराने सूखे के वर्षों को याद करते हुए कहा कि 1985, 1986 और 1987 के दौरान राज्य में गंभीर जल संकट था। उनके अनुसार, उस दौर में लोगों को पानी और पशुओं के लिए चारे जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ा था।
शाह ने कहा कि 2026 में भी El Niño के प्रभाव के कारण संभावित सूखे की आशंका जताई जा रही थी। कुछ गांवों में कम बारिश हुई, लेकिन उनके मुताबिक ऐसी स्थिति नहीं बनी जिसमें लोगों को अपने पशुओं के साथ पानी की तलाश में दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन करना पड़े। उन्होंने इसी आधार पर दावा किया कि गुजरात ने पिछले 25 वर्षों में बड़े सूखे की स्थिति का सामना नहीं किया है।
‘हर बूंद बचाने से सूखे का खतरा खत्म होगा’
Amit शाह ने जल संरक्षण को सूखे से लड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यदि बारिश की हर बूंद को बचाया जाए और उसे जमीन में पहुंचाया जाए तो देश और राज्य में सूखे का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने तालाबों और चेक डैम की संख्या बढ़ाने, जलाशयों से गाद निकालने तथा नदियों और जल स्रोतों के पुनर्जीवन को जल प्रबंधन की महत्वपूर्ण रणनीति बताया। शाह ने कहा कि गुजरात में इन प्रयासों के कारण कई इलाकों में भूजल स्तर में सुधार हुआ है और हरियाली भी बढ़ी है।
केंद्र में जल शक्ति मंत्रालय का भी जिक्र
अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र में कार्यकाल के दौरान बनाए गए जल शक्ति मंत्रालय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पानी को एक अलग और प्रमुख प्रशासनिक प्राथमिकता देने के लिए इस मंत्रालय की स्थापना की गई।
उन्होंने ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर सिस्टम और ‘कैच द रेन’ अभियान जैसी पहलों को भी जल संरक्षण से जोड़ा। शाह के मुताबिक, इन उपायों का लक्ष्य पानी का अधिक कुशल इस्तेमाल करना और बारिश के पानी को जमीन में वापस पहुंचाना है।
शाह ने यह भी दावा किया कि मोदी के नेतृत्व में देश के बांधों की सिंचाई क्षमता में 160 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा उन्होंने जल प्रबंधन और सिंचाई से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में रखा।
गुजरात को ‘वास्तव में सूखा-मुक्त’ बताया
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि गुजरात में अब झीलों और चेक डैम की संख्या बढ़ी है, खेती बेहतर हुई है और हरित क्षेत्र का विस्तार हुआ है। उन्होंने जल संरक्षण को सरकार के साथ-साथ आम लोगों और सामाजिक संगठनों का जनआंदोलन बनाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने दावा किया कि 2001 से 2026 के बीच गुजरात में कहीं भी पुराने समय जैसा बड़ा सूखा नहीं देखा गया और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जल नीतियों तथा योजनाओं का परिणाम बताया।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘गुजरात पूरी तरह सूखा-मुक्त हो गया’ अमित शाह द्वारा किया गया राजनीतिक और प्रशासनिक दावा है। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश, भूजल, सिंचाई और स्थानीय जल संकट की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए इस दावे को समझते समय सूखे की आधिकारिक परिभाषा और क्षेत्रवार वर्षा एवं जल उपलब्धता के आंकड़ों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
जल संरक्षण पर बढ़ता जोर
अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब गुजरात में जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन को लेकर सरकार के साथ निजी संस्थाएं भी सक्रिय हैं। अमरेली में उद्घाटित गुजरात गौरव सरोवर इसी तरह की पहल का उदाहरण है। सरकार का कहना है कि ऐसे जलाशय कृषि, पेयजल और भूजल रिचार्ज—तीनों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, अमित शाह ने गुजरात के पिछले 25 वर्षों के जल प्रबंधन मॉडल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया। उनका मुख्य संदेश रहा कि बारिश के पानी को रोकना, भूजल को रिचार्ज करना, नर्मदा के पानी का विस्तार करना और सिंचाई की आधुनिक तकनीकों को अपनाना ही सूखे से स्थायी मुकाबले का रास्ता है। सरकार के अनुसार, इन्हीं प्रयासों के चलते गुजरात ने 2001 के बाद गंभीर सूखे की परिस्थितियों से खुद को काफी हद तक बाहर निकाला

